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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 237 // हिस्सा // कविता जयन्त श्रीवास्तव

प्रविष्टि क्रमांक - 237

कविता जयन्त श्रीवास्तव

हिस्सा

घर में सम्पत्ति को लेकर विवाद छिड़ा था ,बाऊजी के निधन के बाद हर कोई इसी बात पर दबी जबान से चर्चा करता कि, अम्मा किसको क्या बांटेंगी किसके हिस्से क्या आएगा..क्योंकि बाऊजी ने वसीयत अम्मा के हाथों सौंपी थी, जिसके कागजात लेकर वकील साहब आने ही वाले थे..बड़ी बहू , छोटी बहू तेरहवीं के दूसरे दिन ..जाड़े की धूप में अपने अपने बच्चों की साफ सफाई तेल मालिश कर रही थी..! मंझली बहू हमेशा की तरह अन्य कार्य निपटा रही थी और बड़े और छोटे भइया के लिए ट्रेन में खाने हेतु जलपान का प्रबंध भी ,आज ही लौट जाएंगे वे दोनों..! इधर अम्मा मंझले के सिर में तेल लगा रही थी..मंझला माँ की गोद में लेटा था बच्चों की तरह... पिता के निधन के बाद मां और मंझला आंखों ही आंखों में मूक बातें कर लेते..विरक्ति के एहसास ने मां को ही नहीं ,मंझले को भी झकझोर दिया था..रोजगार हीन जो था, फैक्ट्री में हाथ कट जाने के बाद से बाऊजी ही उसका आसरा थे, दोनों भाई व भाभियों  की निगाह में वो निकम्मा और बाऊजी के पैसे खाने वाला राक्षस था।

तभी छोटी बहू ने अपने डेढ़ साल के बेटे को खींच के जबरन उसके हाथों व पांवों की मालिश शुरू कर दी, बच्चा जोरों से चीखने लगा ..! उसकी हड्डियां जन्मजात कमजोर थी इसलिए अब तक खड़ा नहीं हो पाता था..अम्मा ने बहू को देखा और कुछ न बोली..इतने में छत पर अचानक से बड़े व छोटे दोनों क्रोध से उफनते हुए पहुंचे..

"अम्मा अम्मा ..ये क्या गांव के खेत ,गांव का घर सब मंझले को दे दिया ..' और हमें हमें केवल आम के बाग और इस मकान के तीन अलग अलग हिस्से में रखा ? ऐसा क्यों?

अम्मा ने मुस्कुराते हुए कहा..ये मेरा सोचा समझा फैसला है..तुम दोनों शहर में रहते हो गांव कभी जाओगे नहीं ..!' 

अम्मा की बात बीच में काट कर छोटी बहू बोल पड़ी

" ..पर अम्मा ! क्या हम आपके बच्चे नहीं ..? जो आपने मंझले भाई साहब को ज्यादा हिस्सा दे दिया ? ये भेदभाव नहीं तो और क्या है ?

"अम्मा ने चश्मा ठीक करते हुए कहा ..हाँ छोटी बहू, सोच समझ कर ही लिया फैसला कि किसे क्या और कितना देना है ..एक मां ये निर्णय ले सकती है कि किस बच्चे को क्या देना है क्या नहीं ? क्या किसके लिए जरूरी है ..तूने भी तो अपने बड़े बेटे की इतनी मालिश नहीं की थी जितनी छोटे के हाथों पांवों की किया करती है..ये भेदभाव है या कुछ और..? "

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कविता जयन्त श्रीवास्तव

प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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