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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 280 से 284 // डॉ सतीश शुक्ल

प्रविष्टि क्रमांक - 280


 

डॉ सतीश शुक्ल

हिस्सा

आज दामिनी ससुराल से वापिस आयी थी. आते ही साथ अम्मा जी से लिपट कर रो पड़ी.
“ मैं जब आ रही थी सासू माँ ने मुझे याद दिलाया कि मिन्नी की शादी होने वाली है. उसके दान – दहेज़ में तुम्हारे मायके वालों का कितना हिस्सा रहेगा ?”
   अम्मा जी को वह घटना याद आ गयी. जब दामिनी की शादी होने को थी. तो उन्होंने यही बात अपनी बहू सुलेखा से पूछी थी.

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प्रविष्टि क्रमांक - 281 

डॉ सतीश शुक्ल                  

वापसी

रघुशरण जी सपत्नीक वापस भारत आ रहे थे. रह-रह कर उनके कानों में अपने बेटे की आवाज़ गूँज रही थी.
  “ पापा – मम्मी का इलाज़ मुंबई में ही करा लो. वहां कैंसर पर काफी रिसर्च हो रही है. टाटा मेमोरियल हास्पिटल में मेरे दोस्त के पिता मशहूर सर्जन हैं. उससे मम्मी के इलाज के लिए सिफारिश करा दूँगा.” यहाँ उनके इलाज में 5000 डालर लगेगा यानि कि साढ़े चार लाख. वहाँ तो आधे खर्च में यह ओपरेशन हो जाएगा. अभी हमारी इन्शोरेंस पॉलिसी भी रेन्यू होना है. डैडी आप तो जानते हैं अभी खर्चे कितने हैं. यू नो सन्नी का एडमीशन होना है. उनको वह घटना याद आ गयी. जब सुरेश को विदेश जाना था .उन्होंने जब पत्नी से पैसे की व्यवस्था न होने की बात कही तो उसने अपना चन्द्रहार निकाल कर देते हुए कहा था अपना बेटा काबिल बन जाए ,ऐसे कई हार बन जायेंगे .

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डॉ सतीश शुक्ल

  प्रविष्टि क्रमांक - 282
           भगवान का एकाकीपन

रेलवे ट्रैक के पास एक कोने में बियाबान में बिराजे भगवान ऊब रहे थे. ना ही पुजारी आता है और आस-पास बसे भक्तगण, न ही प्रसाद चढ़ावा आता है.
   आसपास की झुग्गियों में रहने वाले भक्त नगर पालिका द्वारा बेदखल कर दिए गये थे.

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डॉ सतीश शुक्ल

प्रविष्टि क्रमांक - 283   

            नमक का कर्ज़

वह फक्कड़ बाबा थे और आसपास के आवारा कुत्तों को रोटी खिलाते थे.
   कुछ दिनों बाद वहाँ पर दंगा भड़का, कुछ दंगाइयों ने बाबा के घर पर हमला बोल दिया. गली के सारे कुत्तों ने मिलकर उन दंगाइयों ने खदेड़ दिया.

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डॉ सतीश शुक्ल

प्रविष्टि क्रमांक - 284

                  अंगदान

उनको अपनी मोटर साइकिल से बहुत प्रेम था. बच्चों ने उन्हें चलाने से मना कर दिया और वह पार्किंग में खड़े-खड़े धूल खाने लगी. इस पर बेटे ने निर्णय लिया कि उसे बेच दे.
  जब गैरेज का मिस्त्री उसे लेने को आया तो उन्होंने उससे कहा- इसके अच्छे पार्ट्स निकाल कर ही इसे भंगार में बेचना .
   दूसरे दिन मिस्त्री एक मोटर साइकिल लेकर आया था. जिसमें उनकी मोटर साइकिल की हेडलाइट लगी थी.
उन्होंने उस पर हाथ फेरा और तसल्ली की साँस थी.

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लेखक परिचय

डॉ सतीश शुक्ल

जन्म – 15/10/1947, मध्यप्रदेश में,

शिक्षा – एमए. [ अर्थशास्त्र ] पीएचडी, अखिल भारतीय सेवा से निवृत

प्रकाशित : 17 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें 4 लघुकथा संग्रह

सम्प्रति : नवी मुंबई में आवास

पता : ए- 1401, पटेल हैरिटेज कोऑहासो.,सेक्टर- 7

खारघर- 410210 नवी मम्बई


अणु डाक- madanshukla1947@gmail.com

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