रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 312 // पुत्र का पुण्य // गोपाल ठहाका

प्रविष्टि क्रमांक - 312

गोपाल ठहाका

पुत्र का पुण्य

"रमैया...ऐ.. रमैया क्या कर रहा है"?- पिता ने अपने पुत्र को पुकारा |

"आया... काहे चिल्ला रहे हो, क्या बात है कोई तो काम बिना रोक-टोक के करने दो" रमैया ने खीझते हुए कहा |

" कुछ..नहीं | मुझे एक गिलास पानी देना, बड़ी प्यास लगी है|"चारपाई के नीचे से गंदा गिलास पकड़ाते हुए पिता ने याचना की|

" मेरे पास समय नहीं है बाज़ार में शर्बत पिलाने जा रहे हैं ,आज गंगा दशहरा है ,कुछ पुण्य कर ले तो बुढ़ापे में आपकी तरह रिरियाना न पड़े |आपको तो कभी पुण्य के काम करने की फुर्सत नहीं मिली , अब हमारे पुण्य में दखल मत  करो|"- कहता हुआ रमैया चला गया |

      पिता के हाथ से गिलास जमीन पर गिर पड़ा और सोचने लगे शायद वो सही कह रहा था |

                       --

                      गोपाल ठहाका

                श्याम सदन, देविन पूरवा, 

                  सर्कुलर रोड हरदोई

          पिन कोड 241001 उत्तर प्रदेश

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.