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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 316 // त्यौहार // निरुपमा मिश्रा

प्रविष्टि क्रमांक - 316

निरुपमा मिश्रा

   त्यौहार

"माँ, बाबा कब आयेंगे ?"- नन्हे राजू ने बेसब्री से पूछा तो आँगन को गोबर से लीपती करके दीपावली पूजन की तैयारी में लगी माँ मुस्करा दी - " अभी बस आ रहे होंगे "| राजू सुनकर खुशी से उछलता बाहर अपने बाबा की राह देखने चला गया | 

   गुड़िया अपनी माँ के काम-काज में हाथ बंटाते हुए धीरे से बोली -" माँ कहीं पिछली बार की तरह ही इस बार भी हमारी दीवाली फीकी तो नहीं रह जायेगी न " | माँ बेटी के सवाल पर चिंतामग्न हो उठी तो बेटी भी चुपचाप अपने काम में लगी रही |

  "राजू, गुड़िया.... कहाँ हो तुम दोनों -" बाबा की आवाज पर दोनों बच्चे चहक उठे और दरवाजे की तरफ दौड़ पड़े , बाबा ने अपने कंधे से झोला उतार कर बेटी को थमा दिया , बेटी गुड़िया ने उसमें झांककर देखा तो एक छोटा डिब्बा मिठाई कुछ दीपक और बाकी सामान था | बाबा बेहद थके हुए लग रहे थे  , वो पास में पड़ी चारपाई पर बैठकर राजू की माँ को पानी का गिलास हाथ में लिए हुए खड़े देखा | बुझी - बुझी सी आवाज में राजू के बाबा ने अपनी पत्नी की ओर देख कर कहा कि -"इस बार भी बनिये ने मेरी पगार नहीं बढ़ाई और त्यौहार पर बढ़ने वाली महंगाई की मार तो जैसे मार ही डालेगी हमें , झोले में जरूरी सामान ही ला पाया हूँ उसी से काम चला लो इस बार भी "|

   गुड़िया की माँ ने बड़े ही शांत स्वर में अपने पति को सांत्वना देते हुए कहा कि -" तो क्या हुआ हम सब जितना है उसी में खुश हैं , कम से कम हम सपरिवार खुशी - खुशी एक साथ त्यौहार तो मनायेंगे  और अब मैं भी कोई काम पकड़ लेती हूँ जिससे आपका बोझ भी कम हो जायेगा और बच्चों की जरुरतें भी पूरी हो जाया करेंगी "|

पत्नी की बात सुनकर राजू और गुड़िया के पिता अपने परिवार को  मंत्रमुग्ध से देखते ही रहे |

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          निरुपमा मिश्रा

हैदरगढ़ जिला - बाराबंकी ( उ०प्र०)

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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