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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 317 // हमसे दोस्ती कर लो // निरूपमा मिश्रा

प्रविष्टि क्रमांक - 317

निरूपमा मिश्रा

हमसे दोस्ती कर लो

विद्यालय में महिला सशक्तिकरण दिवस मनाये जाने के अवसर पर खूब जोरशोर से तैयारियां की गई थी जिसमें सबसे ज्यादा मेहनत स्कूल की टीचर रेखा ने ही की जिसके लिए वो हमेशा ही जानी जाती रही है | प्रिंसीपल सर ने आयोजन के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी महोदय के आने की सूचना पर सभी को अवगत करा दिया , थोड़ी ही देर बाद एक के बाद एक गाड़ियों का काफिला डीएम साहब के साथ स्कूल की तरफ आ गया |

    कार्यक्रम को बीच में ही छोड़कर डीएम साहब को अपने किसी अन्य कार्यक्रम के लिए जाना पड़ा तो अन्य सभी कार्यक्रम में एसडीएम साहब ने अपनी मौजूदगी दी , कार्यक्रम का समापन पुरस्कार वितरण के साथ ही सकुशल सम्पन्न होने से समस्त विद्यालय स्टाफ की जान में जान आई |

  सभी अपने - अपने घर की ओर चल पड़े तो रेखा ने भी अपनी स्कूटी स्टार्ट की और अपने गाँव के रास्ते चल पड़ी , थोड़ी दूर जाकर रेखा को ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसका नाम लेते हुए उसका पीछा कर रहा है कि तभी एक बोलेरो उसे ओवरटेक करते हुए सामने आकर खड़ी हुई और उसमें से सफेद-काले शूट में चश्मा चढ़ाये एक आदमी उतरा और रेखा के बिल्कुल करीब आकर बोला -"मैडम जी, हम आपके चाहने वाले हैं घबराओ नहीं हमसे" रेखा अचानक हुई इस बात से हड़बड़ा गई तभी वो आदमी फिर बोल पड़ा -" हम आपसे गहरी दोस्ती करना चाहते हैं रेखा जी " और इतना कहते ही उस आदमी ने रेखा का हाथ जोर से पकड़ लिया , रेखा उस समय अपने-आप को उस सन्नाटे में अचानक हुई इस घटना से बहुत बेबस पाया मगर हिम्मत करके अपना हाथ छुड़ाते हुए तेज आवाज में बोली -" कौन हो तुम और इस तरह से बदतमीजी से बात करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई "

   रेखा के तमतमाते चेहरे को देख वो आदमी बेशर्मी से हँस पड़ा उस पर रेखा की किसी बात का जैसे कोई असर नहीं हुआ कि तभी पीछे से रेखा के स्कूल के प्रिंसीपल अपने बेटे के साथ मोटरसाइकिल से उसी रास्ते पर आ रहे थे तो उन्होंने अपनी गाड़ी रेखा के पीछे रोक दी , प्रिंसिपल सर की आवाज पर रेखा पीछे मुड़ कर देखने लगी कि इतने में बोलेरो से आया आदमी वहाँ से नौ दो ग्यारह हो गया था |

1 टिप्पणियाँ

  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है आपकी सलाह, सुझाव हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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