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विभिन्न देवतागण एवं उनके वाहन // श्रीमती उमा, डॉ.नवीन मेहता(एम.ए.-हिन्दी)



हमारे देवता सम्पूर्ण ब्रह्मांड में पलक झपकते ही भ्रमण कर लेते हैं। वे शक्ति के स्वरूप हैं। सम्पूर्ण जगत् उन्हीं की शक्ति से चलायमान है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों में प्रत्येक देवता का एक विशेष वाहन बतलाया गया है। प्रकृति के वाहन देवताओं के स्वभाव उनके कार्य तथा स्थान के अनुरूप बतलाए गये हैं। धर्मप्रेमी जनता देवताओं के साथ ही उनके वाहनरूपी पशु-पक्षी का हम संरक्षण करें, प्रकृति के सन्तुलन को बनाए रखें। देवपूजन के साथ उनका भी पूजन इन्हीं बातों की ओर इंगित करता है। इस लेख में भगवान के प्रमुख वाहनों का वर्णन है।

मूषक- यह भगवान श्रीगणेश जी का वाहन है। ‘मूष’ शब्द का अर्थ है लूटना या चुराना। चूहा अपनी भूख शान्त करने के लिए खाद्य सामग्री चुराता है। वह अच्छे बुरे की पहिचान नहीं कर सकता है। अच्छी - अच्छी चीजों को काट देता है। वह कुतर्की है। वस्तुओं को कुतर डालता है। श्रीगणेश ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। उनके सामने कोई टिक नहीं सकता है। मनुष्य का मस्तिष्क भी चूहे के समान होता है। श्रीगणेश जी ने कुतर्क करने वालों को अपने नीचे दबा कर रखा है।

वृषभ-वृषभ भगवान शिव का वाहन हैं। शिवजी के गणों में बैल (वृषभ) को श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। वृषभ स्वभाव से शान्त होता है। वह शारीरिक रूप से शक्तिशाली है। वह भगवान शिव के व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है। भगवान शिव शक्ति संपन्न हैं तथा स्वभाव से शान्त और संयमित हैं। नंदी के चार पैर धर्म के चार स्तम्भ क्षमा, दया, दान और तप के द्योतक हैं। नंदी की सफेद रंग पवित्रता तथा स्वच्छता का प्रतीक है।

शेर- माँ दुर्गा का वाहन शेर है। माँ दुर्गा शक्ति स्वरूपा है। उनका वाहन शेर भी बल, पराक्रम, शक्ति, शौर्य और क्रोध का प्रतीक है। जिस प्रकार शेर दहाड़ता है और जंगल की शान्ति भंग हो जाती है उसी प्रकार माँ दुर्गा की अन्याय के प्रति हुँकार इतनी विकराल होती है कि, उसके सामने सारी आवाज धीमी प्रतीत होती है। स्त्री को अपने घर को बुद्धि चातुर्य से सुखी बनाना चाहिये। अपनी शक्ति को नष्ट नहीं करना चाहिए।

मोर- कार्तिकेय देवताओं के सेनापति हैं। वे शिव पार्वती के पुत्र तथा श्रीगणेश के बड़े भाई हैं। मोर, कार्तिकेय का वाहन है। भगवान विष्णु ने कार्तिकेय को यह वाहन के रूप में भेंट किया था। मोर, चंचलता का प्रतीक है। मोर सुन्दर तो है  ही वह चतुर भी है। वह साँप को बड़ी चतुराई से मारता है कार्तिकेय ने चंचल मोर को अपना वाहन बना रखा है।

हंस- यह माँ सरस्वती का वाहन है। हंस पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। माता सरस्वती शुभ्र-वस्त्रा है। कहा जाता है कि हंस नीर-क्षीर- विवेकी होता है। वह अवगुण छोड़ देता है और गुण को ग्रहण कर लेता है। हंस भी श्वेत रंगधारी है। ज्ञान, जिज्ञासा और पवित्रता के प्रतीक हंस पर सरस्वती विराजित हंै।

कौआ- कौआ शनिदेव का प्रमुख वाहन है। वैसे शनिदेव के नौ वाहन हैं अलग -अलग राशि पर अलग-अलग वाहन का प्रभाव पड़ता है। हंस, हाथी तथा घोड़े पर सवार शनि का प्रभाव अच्छा होता है। गधे,कुत्तेे,गिद्ध,सियार,भैंसा पर सवार होकर जब शनिदेव आते हैं तो कुछ राशियों पर इनका विपरीत प्रभाव पड़ता है।

अश्व-समुद्र मंथन के समय उच्चैश्रवा नामक घोड़ा निकला था। हमारे पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार सूर्य, सात घोड़ों पर सवार होकर पृथ्वी को प्रकाशित करते हैं। घोड़ा मेहनती पशु है। सेना में इनका प्रमुख स्थान है। विवाह में वर घोड़ी पर सवार होकर आता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार कलियुग में कल्कि अवतार घुड़सवारी करता हुआ आयेगा।

सफेद हाथी-इन्द्रदेव का वाहन सफेद हाथी है। वर्तमान में यह लुप्तप्राय है। इन्द्र के हाथी का नाम ऐरावत हाथी है। सफेद हाथी शान्त समझदार तथा तीक्ष्ण बुद्धि के लिए प्रसिद्ध है। ‘‘इरा’’ जल को कहते हैं। समुद्र मंथन के समय प्राप्त हुए हाथी का नाम ऐरावत है। प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार सफेद हाथी के चार दाँत होते हैं। कहते हैं, उत्तरी ध्रुव पर किसी समय मानव का निवास था। ऐसा वैज्ञानिकों का दावा है।

भैंसा - यमराज का वाहन भैंसा होता है। यम को मृत्यु का देवता कहा गया है। पौराणिक ग्रन्थों में यम को भैंसेे पर सवार बतलाया गया है। कहा जाता है कि भैंसा सामाजिक प्राणी है। कई भैंसे मिलकर एक दूसरे की रक्षा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि, भैंसा अपनी शक्ति का दुरूपयोग नहीं करता है। वह आत्मरक्षा के लिए शेर से भी सामना कर लेता है। भैंसे का स्वरूप भयानक होता है। यमराज का स्वरूप भी भयानक है। यमराज मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार दंड देता है।

कुत्ता (श्वान)-कुत्ता (श्वान)भैरव भगवान का वाहन है। प्रमुख रूप से काले रंग का श्वान विशेषरूप से पूजित है। भैरव अष्टमी तथा भैरव जयन्ती या भेरू पूजन के दिन काले श्वान को ही प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह स्वामिभक्त और विश्वसनीय पशु है। यह अपनी असाधारण घ्राण शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। पुलिस विभाग में आपराधिक मामलों में अपराधियों को पकड़ने के लिए, विशेष नस्ल के कुत्तों को रखा जाता है। भारतीय घरों में कुत्ते को प्रतिदिन रोटी डाली जाती है। भूकम्प आदि प्राकृतिक आपदा में कुत्ते को पूर्वाभास हो जाता है। कुत्ता घर की चैकस चैकीदारी भी करता है तथा स्वामी की रक्षा करता है।

मगरमच्छ - गंगा का वाहन मगरमच्छ है। यह नदियों के जल में विचरण करता है। ऐसी मान्यता है कि जल के जीवों में मगरमच्छ 25 करोड़ साल से अस्तित्व में है। विद्युत उत्पादन के कारण बाँध बनने से जहाँ नदियो का पानी कम है वहाँ मगरमच्छ संकट में है।

गरूड- भगवान विष्णु के वाहन गरूड़ हैं। विष्णु भगवान शक्तिशाली हैं। गरूड़ भी शक्ति सम्पन्न, बुद्धिमान तथा अपनी दूरदृष्टि के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रजापति कश्यप की पत्नी विनता के पुत्र हैं। इनके दूसरे भाई का नाम अरूण है। अरूण के पुत्र, श्री राम जी के समय जटायु और संपाती हुए। इन्होंने सीताजी की रक्षा एवं खोज में अपूर्व सहायता की थी।

बकरा- अग्निदेव का वाहन है। जीवन में अग्नि का जन्म से लेकर मृत्यु तक सम्बन्ध बना रहता है। ऋग्वेद में भी सर्वप्रथम अग्नि का ही वर्णन आता है।

उल्लू- उल्लू को माँ लक्ष्मी का वाहन दर्शाया गया है। यह निशाचरी प्राणी है और इसे बुद्धिमान माना गया है। यह धन संपत्ति का पक्षी माना जाता है। इसे कुछ लोग अशुभ मानते हैं। इसकी कई प्रजातियाँ तो दुर्लभ हो गई है। यह रात्रि जागरण करता है। यह अपनी तेज दृष्टि, श्रवण शक्ति,शीत ऋतु में उड़ने की शक्ति, निशब्द उड़ान तथा धीमे उड़ने की कला के लिये प्रसिद्ध है। लक्ष्मी जी ने स्वयं उल्लू को वाहन के रूप में स्वीकार किया है।

इस प्रकार बन्दर, भालू, सर्प, गाय, कबूतर आदि कई पशुओं ने भगवान का सामीप्य प्राप्त किया है। हमारे जीवन में भी इनमें से कई पशुओं का महत्वपूर्ण स्थान है। हमें इनका संरक्षण करना चाहिये। इनकी हिंसा करने से प्रकृति का नुकसान होगा। मनुष्य का वाहन उसका मन है। मन सर्वाधिक चंचल होता है। यदि, वह हमारे वश में होगा तो ही, हम जीवन में सफलता प्राप्त कर सकेंगे। शासन द्वारा भी वन्यजीव की सुरक्षा हेतु अनेक कानून बनाये गये हैं ये जीव हमारे पर्यावरण का सन्तुलन बनाए रखने में सहयोग करते हैं।



                                                              भवदीय                       
                                        श्रीमती उमा, डॉ. नवीन मेहता(एम.ए..-हिन्दी )
        सीनियर एमआईजी 103 व्यासनगर
ऋषिनगर विस्तार,उज्जैन,मप्र 456010
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