समीक्षा - कविता की संहिता है, रस-छंद-अलंकार और काव्य विधाएँ - आचार्य संजीव ‘सलिल’

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सृष्टि के अन्य जीवों की तुलना में मानव सभ्यता की उन्नति तथा स्थायित्व का कारण ध्वनि को आत्मसात कर स्मरण रखना, ध्वनि से अर्थ ग्रहण कर सं...



सृष्टि के अन्य जीवों की तुलना में मानव सभ्यता की उन्नति तथा स्थायित्व का कारण ध्वनि को आत्मसात कर स्मरण रखना, ध्वनि से अर्थ ग्रहण कर संप्रेषित करना, ध्वनि का नियमबद्ध प्रयोगकर भाषा तथा ध्वनि को चिन्ह विशेष के माध्यम से अंकित-लिपिबद्ध कर लिख-पढ़-समझ पाना है। इस प्रक्रिया ने आदिकाल से अब तक मानव मात्र को हुए अनुभवों की अनुभूतियाँ संचयित-संरक्षित तथा संप्रेषित किया जाना संभव किया। पीढ़ी-दर-पीढ़ी सृजित-संकलित ग्यान राशि  सर्वकल्याण की कामना से संयुक्त की जाकर साहित्य कही गई। न्यूनाधिक लयात्मकता तथा सरसता के आधार पर साहित्य को गद्य तथा पद्य में वर्गीकृत किया गया।

विश्ववाणी हिंदी में पद्य साहित्य की रचना संबंधी आचार संहिता को प्रथमाचार्य महर्षि पिंगल के नाम पर पिंगल शास्त्र कहा गया है। पिंगल शास्त्र के तीन प्रकोष्ठ पद्य रचना, पद्य समझना तथा पद्य सिखाना हैं। ऋषि-आश्रमों तथा गुरु-शिष्य परंपरा को यवन-अँग्रेज पराधीनता काल में सुविचारित ढंग से नष्ट कर क्रमशः अरबी-फारसी आधारित उर्दू व अंग्रेजी को राज-काज की भाषा बनाकर भारतीय साहित्य विशेषकर पिंगल के स्वतंत्र चिंतन-मनन-सृजन को हतोत्साहित कर उस पर अरबी-फारसी छंदशास्त्र को आरोपित किया गया।लगभग दो सदी पूर्व जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’ रचित छंद' प्रभाकर ने अपभ्रंश व संस्कृत से हिंदी को विरासत में मिले छंदों के विधान का वर्णन किया। रस-छंद-अलंकार विषयक अधिकांश पुस्तकें विविध पाठ्यक्रमों पर आधारित रहीं। ओमप्रकाश बरसैंया कृत 'छंद-क्षीरधि' तथा रामदेवलाल ‘विभोर’ कृत 'छंद-विधान' छंद प्रभाकर की छाया से मुक्त न हो सकीं। नारायणदास व सौरभ पांडे नवरचनाकारों की सुविधा के लिए कुछ छंदों की रचना प्रक्रिया तक सीमित रहे। इस पृष्ठ भूमि में विवेच्य कृति भानु जी के पश्चात मौलिक दृष्टि से हिंदी पिंगल के आकलन का महत्वपूर्ण स्वतंत्र प्रयास कहा जा सकता है।

राजेन्द्र वर्मा जी बैंक अधिकारी रहे हैं, भिन्न ध्रुवों के मध्य समन्वय-संतुलन स्थापित करने की कला में निपुण हैं। अत: विषय के वर्गीकरण, अपनी मान्यताओं के अनुरूप चयनित विषय सामग्री के चयन तथा 'पिंगल' एवं 'उरूज' के मध्य सेतु-स्थापन करने का पुष्ट प्रयास कर सके हैं। कृति के प्रत्येक अध्याय में विषयवस्तु के विस्तार को सीमित पृष्ठों में समेटना और अपनी मान्यताओं की पुष्टि करना नट कौशल की तरह कठिन है, तनिक संतुलन डगमगाते ही सँभालना दुष्कर हो जाता है, किंतु राजेन्द्र जी कहीं डगमगाये  नहीं।

उर्दू छंद-शास्त्री पिंगल-लेखन में उर्दू तक ही सीमित रहते हैं जबकि हिंदी छंद-शास्त्री उर्दू-पिंगल के महिमा मंडन का मोह नहीं तज पाते। यह प्रवृत्ति नव रचनाकारों को हिंदी का क्रीड़ांगण छोड़ उर्दू की तंग गली में खड़ा कर देती है। राजेन्द्र जी ने एक पग आगे रखते हुए वर्तमान में प्रचलित हिंदी और उर्दू छंदों को एक साथ रखकर छंद की बारीकियां सोदाहरण देने का सफल प्रयास किया है, साथ-ही उन्होंने अंग्रेजी और जापानी के भी कुछ छंदों को काफी हद तक स्पर्श किया है।

काव्य क्या है?, रस गुण रीति और वृत्ति, अलंकार, छंद विधान, काव्य दोष तथा प्रमुख काव्य विधाएँ  शीर्षक अध्यायों तथा परिशिष्टों के माध्यम से राजेन्द्र जी ने जटिल तथा गूढ़ विषय को वर्गीकृत कर सरलता से समझाया है। प्रथम अध्याय में संस्कृत, हिंदी व अंग्रेजी काव्याचार्यों के अनुभवों का संकेतन वरिष्ठों के चिंतन-मनन के लिए उपयुक्त है किंतु नवोदित इतने मतों को एक साथ देखकर भ्रमित हो सकते हैं। रस की निष्पत्ति, तत्व,  उत्पत्ति, प्रकार, गुण,  रीति व वृत्ति आदि की चर्चा 'कम लिखे को अधिक समझना' की लोकोक्ति के अनुसार है। रसों के वर्णन में परंपरागत छंदों का प्रयोग किया गया है, लेकिन प्रस्तुति में नवीनता है। रसों के विश्लेषण से विषयवस्तु आसानी से स्पष्ट हो जाती है। ऐसा लगता है कि लेखक ने अलंकार को अधिक महत्त्व दिया है, तभी उसने शब्द-अर्थ तथा चित्र अलंकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला है, लेकिन प्रस्तुति को सारणीबद्ध कर देने से वह बात नहीं आ पायी जो सामान्य विवेचन से आती।।
छंद-विधान अध्याय के अंतर्गत लगभग ९० प्रकार के वर्णिक और ५० प्रकार के मात्रिक छंदों का सारणीबद्ध विवेचन संभवत: पहली बार किया गया है। वर्णिक छंदों में उर्दू छन्दविधान में प्रचलित बहरों को भी शामिल किया गया जो हिंदी के छंदों के प्रतिरूप हैं, जैसे- पीयूषवर्ष, भुजंगप्रयात, गीतिका, विधाता। लेकिन प्रस्तुति की सारणीकरण पद्धति ने वाक्य विन्यासकृत विस्तार की संभावना ही समाप्त कर दी। इससे छंदों का तुलनात्मक साम्य और वैषम्य देख पाना तो सहज साध्य हुआ, किंतु विषय की  जटिलता और नीरसता नहीं घटी।

कृति का वैशिष्ट्य काव्य दोषों को भी महत्व देना है। राजेन्द्र जी जानते हैं कि हिसाब तब तक ठीक नहीं होता जब तक दोष समाप्त न हों। आचार्य मम्मट की अवधारणा पर आधारित चार प्रकार के काव्यदोषों- पदगत, वाक्यगत, अर्थगत, और रसगत,  पर चर्चा की गयी है। लेखक ने शिल्प,  तुकांत,  समांत,  पद, अर्थ,  रस आदि से संबंधित दोषों का सोदाहरण निरूपण सारणीबद्ध ढंग से किया है। इससे कृति की उपादेयता बढ़ी है।
प्रमुख काव्य विधाएँ शीर्षक अध्याय के अंतर्गत दोहा, सोरठा, कुंडलिया, पदावलि, सवैया, कवित्त, नवगीत,  ग्राम्य गीत,  फिल्मी गीत, गजल,  हिंदी गजल आदि की उत्पत्ति, प्रकार, गुण-दोष आदि का विवेचन पूर्व ग्रंथों की अपेक्षा अधिक साफगोई व विस्तार से किया गया है। नयी कविता या समकालीन कविता को भी ग्रन्थ में समेटा गया है। हिंदी-प्रेमियों और उर्दू-पक्षधरों की नाराजगी का ख़तरा उठाकर भी ग़ज़ल-रुबाई आदि से सम्बंधित सामग्री के प्रस्तुतीकरण में राजेन्द्र जी ने गंगो-जमुनी परंपरा का पालन करने की कोशिश की है। हाइकु, ताँका, सदोका, चोका आदि जापानी छंदों तथा सॉनेट जैसे अल्प प्रचलित छंद को समेटनेवाले राजेन्द्र जी ने  गिद्दा, अभंग, ककुभ, जनक छंद आदि की अनदेखी की है।

ग्रंथांत में परिशिष्टों के अंतर्गत शोधछात्रों के लिए उपयोगी साहित्य के उल्लेख ने कृति की उपादेयता  बढ़ाई है। एक परिशिष्ट के अंतर्गत हिंदी कवियों और उनकी प्रमुख कृतियों की सूची दी गयी है जिसमें प्राचीन कवियों से लेकर वर्ष १९५० तक जन्मे १८५ कवियों को सम्मिलित किया गया है। यह कार्य संभवत पहली बार देखने में आया है।  सारत: राजेन्द्र वर्मा रचित विवेचित कृति रचनाकारों, अध्यापकों तथा विद्यार्थी वर्ग के लिए समान रूप से उपयोगी है।
         
-- विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन,
जबलपुर ४८२००१ (ई-मेल: salil.sanjiv@gmail.com.)

पुस्तक विवरण
पुस्तक का नाम रस-छन्द-अलंकार और काव्य-विधाएँ
लेखक राजेन्द्र वर्मा  (मो. 80096 60096)
प्रकाशक साहित्य भण्डार, चाहचन्द ( जीरो रोड), इलाहाबाद – 211 003
(मो. 93351 55792, 94152 14878)
संस्करण प्रथम, 2018
पृष्ठ संख्या 351
मूल्य रु. 375 (पेपरबैक)

नाम

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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: समीक्षा - कविता की संहिता है, रस-छंद-अलंकार और काव्य विधाएँ - आचार्य संजीव ‘सलिल’
समीक्षा - कविता की संहिता है, रस-छंद-अलंकार और काव्य विधाएँ - आचार्य संजीव ‘सलिल’
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रचनाकार
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