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लघुकथा // गरीबी की आन // चन्द्रिका व्यास


भैरवी का ब्याह लखनऊ के हरखु के साथ बडी सादगी के साथ हुआ था ! पन्द्रह साल की भैरवी बीस साल के गभरु जवान से ब्याही थी!
ससुराल में प्रथम दिन को ही सासु मां ने बता दिया था की उनका बेटा बहुत ही पानीदार है !
कुछ ही दिनों में भैरवी को पता चल गया की पति में कितना पानी है!
छोटी मोटी नौकरी थी मालिक ने गुस्से में कुछ कहा नौकरी छोड़  दी!
घर आकर कहने लगा अरे कुछ भी कहे....
अपने सम्मान को बट्टा लग रहा था! मां ने भी कुछ न कहा!
झूठी अहं और सम्मान की आड़ ले अब वह कुछ काम ही नहीं  करता था! धीरे धीरे जीवनोपयोगी समस्या बढ़ गई  और भैरवी को बाहर काम पर निकलना पडा!
अनपढ़ और गरीबी अत: भैरवी दूसरे के घर बर्तन झाडू करने लगी!


लखनऊ  की ठण्ड..
भैरवी अपने आप को कड़ाके  की ठण्ड से अपने साडी के पल्लू में अपने हाथ डाल बचाने की कोशिश कर रही थी और बुदबुदाती जा रही थी--------- निगोडी ठण्ड है-------- की कम होने का नाम ही नहीं  ले रही है!
सुबह सुबह वह बर्तन धोने के लिये ठिठुरती हुई ठण्डे पानी में हाथ डाल ही रही थी कि सेठानी ने कहा... भैरवी बर्तन थोडा साफ धोयाकर साबुन रह जाता है!
कड़ाके की ठण्ड और ऊपर से यह ठण्डा पानी.....
सेठानी की बात सुन वह धीरे से बुदबुदाई..... खुद तो गरम स्वेटर पहनकर बैठी है और खाना खाकर हाथ धोने को गरम पानी लेती है.... उसे क्या पता ठण्डे पानी में जान सुख रही है !
बर्तन मांजकर  वह कमरे में झाडू कर रही थी, तभी कोने में उसे गरम बंदर टोपी दिखा! तुरंत सर्दी से बुखार में तपते
अपने चौदह साल के बच्चे का चेहरा सामने अंकित हो उठा! तुरंत उसने साडी के अंदर टोपी रख ली और जल्दी जल्दी
काम पूरा कर निकल पडी!


उसने तीन चार घर और काम किया! किसी ने देखा नहीं यह सोचते हुए वह घर जा रही थी तभी उसे पति का पानी याद आया!
कुछ समय पहले एक सेठानी ने अपने पति की उतरन यानी पुरानी कमीज दी थी जिसे फेंककर पति ने कहा....
क्या हम भिखारी हैं?
उसकी आन का जोरदार तमाचा याद आते ही वह गाल सहलाने लगी और टोपी  सड़क पर ठण्ड से ठिठुरते सोते हुये भिखारी पर पडी!
भैरवी आत्म संतोष से भरी श्वांस लेती हुई, लंबे लंबे डग भरती हुई घर की तरफ बढ़ गई....


चन्द्रिका व्यास
खारघर नवीमुंबई

1 टिप्पणियाँ


  1. आदरणीय महोदय, आपकी रचना सराहनीय है विनम्र निवेदन है कि लघुकथा क्रमांक 180 जिसका शीर्षक राशि रत्न है, http://www.rachanakar.org/2019/01/2019-180.html पर भी अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करने की कृपा कीजिए। कहते हैं कि कोई भी रचनाकार नहीं बल्कि रचना बड़ी होती है, अतएव सर्वश्रेष्ठ साहित्य दुनिया को पढ़ने को मिले, इसलिए आपके विचार/सुझाव/टिप्पणी जरूरी हैं। विश्वास है आपका मार्गदर्शन प्रस्तुत रचना को अवश्य भी प्राप्त होगा। अग्रिम धन्यवाद

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