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अविनाश तिवारी की कविताएँ

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      बेवफा

: यूं रस्ते पे जाते कल देखा उन्हें
देख हमको पलट के वो जाने लगी।

बेखुदी थी सनम तुमसे कुछ न कहा,
साथ छोड़ी वो खुद दूर जाने लगी।

जख्म जो दिया तूने हमने उफ न किया,
दर्द दिल का दे वो खुद  मुस्काने लगी।

तेरे होठों की हंसी गंवारा हमे
दर्द दवा बन गयी सहलाने लगी।

जफ़ा तू करे और वफ़ा हम करे
राह मिल जुल के अब आसाँ करे
कब तक रहोगे बनके सितमगर
आओ अपना गुलिस्तां जवां हम करें।

हम हैं न जीते न तुम भी हो हारे
आओ रिश्तों को हम नया मोड़ दे।

सुनो मेरी ये गुजारिश की ओ बेखबर
देख मंज़िल भी पास अब आने लगी।।


एक प्रयास


             




                 प्रेम
              धरा का
          सबने है पाया
        आओ इसका जतन करें
            हरित करें धरा को
               वृक्षारोपण हम
                     करें।

                    चलो
                 दीपक जलाएं
                अंधेरा दूर भगाएं
            मन में एक विश्वाश जगाएं
               रोशन हो सबका घर
                  अपना हो एक
                     आशियाना

                      उम्मीद
                      का दामन
                    थाम के चलिए
         मंज़िल चलकर पास आएगी
               हौसले अपने जिंदा रख
                 अटल हो तेरे हर इरादे
                    तो असफलता दूर
                          भागेगी
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
छत्तीसगढ़
उपहार
************


तेरी रहमत का क्या हिसाब रखूं


मेरी सांसो में बस तेरा नाम है।
किस घड़ी तेरा सुमिरन करूं
मेरा पल पल तेरा देनदार है
जीवन दिया अनमोल
माता पिता का कर्जदार है
है।
सांसो में तुम ह्रदय में स्वरूप तुम्हारा है।
अखण्ड तू प्रचंड तू बस तेरा ही सहारा है।
तू मेघ है रहमत का कृपा तुम बरसाना
मैं पथिक व्यथित हूं भटका राह नई दिखलाना

तू सागर है अमृत का प्रेम सुधा बन जाना
मै निर्मोही पतित हूँ प्रभु अपने चरण बिठाना।
भारत भूमि में जन्म लिया
ये मेरा सौभाग्य है।
घट घट में रमते मेरे भोले राम
प्रति क्षण तेरा उपहार है।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
छत्तीसगढ़
[28/12/2018 08:34] avinashtiwari:

सुन मेरी माता शारदे


अपनी चरणों मे स्थान दे
ओ मेरी माता शारदे
विद्या का भंडार दे
मां शारदे ओ मां शारदे।

जगमग ज्योति ज्ञान भर देना
सप्त सुरों की सरगम देना
  हँसवाहनी वीणा पानी
खुशियों  का संसार दे
मां शारदे ओ मां शारदे

हम भटके है घोर अंधेरा
  छुद्र विचार का पल पल डेरा
  स्वेत वर्णी तु विद्यादायनी
मन भक्ति से सँवार दे
मां शारदे ओ मां शारदे

बुद्धिप्रदायनी स्वेताम्बर धरणी
कंठ कोकिला कमल विहारिणी
तू संगीत है सप्त कला का
मन निर्मल कर दे।

मां शारदे ओ मां शारदे।
[28/12/2018 22:45] avinashtiwari:

समय(सेदोका)


जो बीत गया
वो फिर नहीं आये
नया सबेरा कब
नियति क्रम
व्यापकता अनन्त
दृढ़ प्रतिज्ञ मन



कर्म प्रधान
फल की न हो चिंता
पुरुषार्थ ही धर्म
गीता का ज्ञान
धर्म पथ की राह
ईश्वर ही गवाह।


@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
छत्तीसगढ़
[30/12/2018 18:02] avinashtiwari:

हवाएं जो बदली कि नाविक किधर गए।


जो बहके थे कल मदमस्त आज
पिघल गए।

मुख मोड़ा था कल हमारी बेकशी पर,
जुबां थी उनकी  कहते हैं फिसल गए।

अकेले हैं गुमसुम साथी अब बदल गए,
समय जो पलटा दरबारी टहल गए।
नक्कार खाने में तूती कोई सुनता नही
वक्त की मार से शहंशाह भी दहल
गए।

हुनर मन्द कुछ चिपकू अब उनसे चिपक गए।
जयकारों की बाढ़ आई और मुद्दे फिर बह गए।

तू लड़ हालातों से #अवि कि जूझना तेरा मुकद्दर रहा।
बाज़ार में देखो आज खोटे सिक्के
चल गए।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
[02/01 18:25] avinashtiwari:

है हमको अभिमान ये वीरों की है शान वन्देमातरम वन्देमातरम


अमर शहीदों के रक्त का मान वन्देमातरम
आजादी के परवानों का गान वन्देमातरम
वन्देमातरम वन्देमातरम।
हिमालय का सीना बोले सागर की गहराई डोले
भगत सुभाष की सांसो से निकले तान
  वन्देमातरम
वन्देमातरम वन्देमातरम
देश प्रेम की भाव जगाये
प्रेम सुधा की रस

है भारत का स्वाभिमान
मेरा गान वन्देमातरम
वन्देमातरम वन्देमातरम

गंगा यमुना कलकल  करती
सागर चरण पखारे
मन्दिर यही मस्जिद यहीं
चर्च और गुरद्वारे

हिंदुस्तानी नाद का पहचान
वन्देमातरम
सिंहों की दहाड़ का नाम
वन्देमातरम।
वन्देमातरम वन्देमातरम।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा
[08/01 12:55] avinashtiwari:

अवि के दोहे


★★★★★★★★★

सत्य आचरण धर्म मूल
प्रेम जगत  का  सार।
लाख छुपाय छिप न सके,
असत की होत हार ।।

घट घट प्रभु का वास है,
मन भटकत दिन रैन
हरि मिले दीन कुटी में,
भजते गुण दिन रैन।।

राधा नची बंशी धुन,
गोपी प्रभु नचाय।
शबरी के जूठे बेर,
प्रेम बस राम खाय।।

करनी आप सुधारिये
दोष न पर में डाल।
हम चलें नेक राह पर,
बदल न अपने चाल।


       घड़ी
घड़ी घड़ी का फेर है,
     मन में राखो धीर।
राजा रंक बन जात है,
    बदल जात तकदीर।।

             प्रेम

प्रेम न सौदा मानिये,
     आतम  सुने पुकार।
  हरि मिलत हैं प्रीत भजे
मति समझो व्यापार।।

         दान

देवन तो करतार है,
   मत कर रे अभिमान।
दान करत ही धन बढ़ी,
    व्यरथ पदारथ जान।।

        व्यवहार

कटुता कभू न राखिये,
    मीठा राखो व्यवहार
इक दिन सबे जाना है,
     भवसागर के पार।।


           मां
मां देवी का रूप है,
      ममता की है खान।
करे तपस्या शिशु हित में
धरती की भगवान।।

           पिता

पिता  हृदय सागर बसे,
   पर्वत सा जो गम्भीर।
कठोर बने पुत्र हित में
   सँवार दे तकदीर।।
 
        पुत्र/सुत

पुत्र वही जो मान रखे,
पिता की रखे लाज।
मर्यादा में काज करे
विवेकी हो विचार।।
 
         भाई

भरत लखन सा भाई हो,
मन की जाने बात ।
अनुरागी जो चित रखे,
स्वार्थहीन व्यवहार।।

     बहन

प्रेम की दीया बहना 
     अंगना जो दमकाय
बात बात में गुस्सा  कर
  मर्जी अपनी चलाय।।


कोशिश


कोशिश कभी न छोड़िये, मत बैठो तुम हार।
चींटी से जा सीख लो , कैसे उठाय भार।।

             आलस

आलस कभी न कीजिये, श्रम की जयजय कार।
करम साधना कीजिये, ये गीता का सार।।
 
              भाग्य

भाग्य भरोसे न रहें, कर हैं तेरे पास।
दोष न दे विधाता को,भगवन सबके साथ।।

            सुख

मन  राखे सन्तोष धन , सुख का ये है सार।
हानि लाभ जग की रीत,रहिये सदा उदार।

@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
[10/01 19:37] avinashtiwari:

हिंदी हूँ मैं हिंदी


भारत के माथे की बिंदी।
कभी आसमान पर कभी रसातल पर घूमती अतरंगी
हिंदी हूँ मैं हिंदी।।
मुझे छोड़कर सेमिनारों में चलते अंगरीजी अक्षर
न्यायालय के कामकाजों की मुझको नही खबर
अपने ही देश तिरस्कृत होकर बन गई आज फिरंगी
हिंदी हूँ मै हिंदी।।
शेखी मारते मिडिया बोले आज हिंगलिश
हिंदी तो उपेक्षित पड़ी रौब मारे विकीलीक्स
पुस्तक में बंद पड़ी कब होउंगी मैं चंगी
हिंदी हूँ मैं हिंदी
मुझमें निराला मैं मधुशाला
गीतांजलि का शब्द मैं
गोदान मैं कफ़न मैं
असीमित अपरिमित
फिर हूँ मैं बन्दी
हिंदी हूँ मैं हिंदी

विश्व हिंदी दिवस अमर हो
@#अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा
छत्तीसगढ़
[12/01 10:19] avinashtiwari:

युवा दिवस

************

वो आवाज था हर युवा का
जन चेतना का संचार किया।
राष्ट्र वाद का बोध कराकर
विचार क्रांति का सूत्रपात किया।
विश्व बंधुत्व का संदेश देकर
नव युग का निर्माण किया।
धर्म सभा मे हिंदुस्तान का
ऊंचा नाम किया।
है धन्य धरा भारत भूमि
नरेंद्र को जिसने जन्म दिया,
वह असीमित व्यापक अनन्त
प्रखरता से आलोकित हुआ।
उस ज्योति किरण से आलोकित
भारत का ह्रदय कहता है।
ज्ञानपुंज विवेकानंद को सादर
वन्दन करता है।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा


#युवा दिवस की असीम शुभकामना

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