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लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन 2019 - प्रविष्टि क्रमांक - 338 // खामोशी टूट गयी // ममता छिब्बर

प्रविष्टि क्रमांक -

ममता छिब्बर

खामोशी टूट गयी

स्कूल से घर आई तो महक को घर का माहौल बदला हुआ सा लगा।
मां कमरे में रो रही थी, बुआ गुस्से से बुदबुदा रही थी।
मां ने कई बार पूछने पर भी कुछ नहीं बोला।
शाम को जब पापा काम से लौटे तो फिर लड़ाई झगड़ा शुरू हुआ ।
चेतना को छत के कमरे में जाकर पढ़ने को कह दिया गया।.
जब लौटी तो सब लोग खाना खा रहे थे , माँ रोते रोते किचन में काम कर रही थी।
बच्चों को बड़े लोगों के बीच बोलने की इजाजत नहीं थी, किसी से सवाल करने का तो सवाल ही नहीं था।
इतना तो समझ आ गया था कि घर में मां और उससे सभी नाराज हैं जो सब सुबह घर में हुआ उसके परिणाम स्वरूप पापा भी अब उनसे बात नहीं कर रहे हैं ।

2 दिन सब ऐसे ही चलता रहा, इस बीच ताऊ जी जो घर के पास ही एक मकान में रहते थे तीन-चार बार घर आए माँ ने उनकी तरफ देखा तक नहीं ।
महक को इतना तो पता चल गया था कि बात ताऊ जी के विषय में थी।

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रविवार का दिन था ताऊजी-ताईजी भी खाने पर घर आ रखे थे।.
महक को माँ ने ताऊ जी के सामने आने से मना कर रखा था, पिछले 3 साल से ताऊ जी के घर आते ही उसे अपने कमरे में बैठकर पढ़ने को बोल दिया जाता था।
खिड़की के पास बैठी महक बाहर सब लोगों को देखते-देखते खाना खा रही थी।
मां की कही बातें अब उसे ज्यादा समझ आने लगी थी घर में ताऊ जी का दबदबा था। घर के सारे फैसले उनकी इजाजत से लिए जाते थे।

मां ने महक को बताया था - ताऊजी कई बार बिना दरवाजा खटखटाएं उनके कमरे में घुस जाया करते थे।
एक बार अंधेरे का फायदा उठाते हुए उन्होंने मां से छेड़छाड़ की कोशिश भी की थी, मां के चिल्लाने पर सारे लोग एकत्र हो गए थे।
पापा ने मां को उनसे दूर रहने को कह बात खत्म कर दी थी पर उन्हें किसी ने कुछ नहीं कहा था, उनके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया और उन्होंने अपनी हरकतें जारी रखी ।

उस दिन 12 वर्ष की महक को माँ ने वह सब बातें समझाई जो समझने के लिए वह तब बहुत छोटी थी ।
उसके शरीर पर किस का, कितना हक है उसे समझाया गया, घर या बाहर का कोई सदस्य उससे किस दायरे में रह कर बात कर सकता है या छू सकता है उसे बताया गया।.
दायरा तोड़ने पर उसे अपने लिए आवाज उठानी पड़ेगी ये भी उसे समझाया गया।
कोई कुछ खाने को दे या खेलने को घर बुलाए तो बिना सोचे ना कहना है, ताऊजी जैसे और भी बहुत लोग है दुनिया में सबसे बचके रहना है।

दादा जी खाना खा कर टहलने को जैसे ही घर से बाहर निकले बुआ शुरू हो गई- बेशर्मी देखी इनकी 4 दिन हो गए, कोई दुआ सलाम नहीं ।
अभी तो साथ रह रही है तो बच्चे को उल्टी सीधी बातें सिखाती रहती हैं। कैसे इज्जत करेगा बच्चा घर के बड़ों की।
15 साल की छोटी सी लड़की को घर के आदमियों के बारे में गलत बातें कहती हैं।

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अभी ३ दिन पहले महक परोजेक्ट बनाने अपनी सहेली के घर जा रही थी तो इन्होंने उसे अपने ताऊ जी जैसे आदमियों से बचकर रहने की सलाह दी।

अब भाभी जी से रहा ना गया वह भी गुस्से से आग बबूला होते हुए बोली कैसी औरत हो तुम जिस घर में रह रही है उसी उसी घर के आदमियों के लिए उल्टी सीधी बातें बच्चे के दिमाग में डाल रही हो।.
अभी छोटी बच्ची है वह, घर से बाहर जाकर उसने किसी से ऐसी बातें कह दी तो क्या इज्जत रह जाएगी घर की? तुम्हें पता नहीं इस उमर् में बच्चे अपने दोस्तों से अपनी सारी बातें शेयर करते है।

तुम्हारे चक्कर में इनकी बदनामी हुई तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी, माफी मांगो इनसे, बुआ भी माँ पर माफी मांगने का दबाव बनाने लगी।.
इस पर पापा मां को समझाते हुए बोले देखो एक ही घर में रहना है ऐसे रोज-रोज के झगड़े अच्छे नहीं चलो माफी मांग कर बात खत्म करो।
मां के माफी ना मांगने पर ताऊ जी गुस्से में मां की ओर बढ़े- तेरी हिम्मत कैसे।.
इतने में महक माँ और ताऊ जी के बीच आ खड़ी हुई।
" मेरी माँ किसी से भी माफी नहीं मांगेंगी, इस आदमी से तो बिल्कुल नहीं।"
पापा को अपनी ओर आते देख महक ने उन्हें दूर से ही कह दिया - नहीं पापा, आज नहीं ।
आज मैं चुप नहीं रहूंगी।
हमारे बीच रहने वाला यह आदमी जिसे मैं ताऊजी कहती हूं इंसान नहीं है राक्षस है।
यह मेरी मां ने मुझे आज नहीं, जब मैं 12 साल की थी तब समझाया था।
वो खुद बेशक जिंदगी भर इनके डर में जीती रही हैं पर मुझे माँ ने डरना नहीं सिखाया है।

और ताई जी अगर मैं घर से बाहर जाकर लोगों को सच कहूंगी तो ताऊ जी की बदनामी होगी इस बात का ख्याल मेरी मां को रखना चाहिए था, वाकई मेरी मां को ??
जब 12 साल के छोटे से बच्चे को उन्होंने अपनी गोद में बिठाकर ब्लू फिल्म दिखाई थी, तब छोटी बच्ची नहीं थी मैं ? तब ख्याल नहीं था अपनी इज्जत का।
इन्हें नहीं लगता था कि एक छोटे से बच्चे को ये जो सब दिखा रहे हैं वह बाहर जाकर लोगों को बताएगी तो लोग क्या कहेंगे ?
ये बातें समझने को मैं अब भी छोटी हूँ और 12 साल की बच्ची जो लड़के लड़की के शरीर का अंतर तक नहीं जानती थी, उससे बेढंगी बातें की गई, उसे गलत तरीके से छुआ गया तब इन्हें ख्याल नहीं आया मेरी मासूमियत का।.

15 साल की लड़की को समझाना गलत है 12 साल की बच्ची के साथ जो ताऊजी ने किया वो सही था???? क्यों बुआ। खामोश क्यों हो अब???

उम्र का लिहाज, रिश्ते का लिहाज, सब लिहाज मां के लिए ही क्यों? इनके लिए क्यों कुछ नहीं ??
एक चरित्रहीन इंसान कुछ भी करता रहे,
इन्हें कोई कुछ नहीं कहेगा।

मेरी मां को अच्छे से पता था अगर उस दिन मेरे साथ कुछ हो भी गया होता तो उन्हें बात दबाने को ही कहा जाता।

माँ ने मुझे बोलना सिखाया , इनकी सच्चाई तो आप कभी मानेंगे नहीं पर मैं अपने मां के साथ हूं बेशक आप सब हमारे खिलाफ हैं।
इन्होंने बहार कितनी ही लड़कियों के साथ क्या कुछ नहीं किया होगा जैसे इनकी हरकतें हैं आप लोग तो जिंदगी भर छुपाते ही रहेंगे।
२० साल तक बहुत सह लिया माँ ने।
अब और कुछ बर्दाश्त नहीं करेंगी।
माफ़ी नहीं मागेंगी इनसे ,  इन्हें तो सजा़ मिलनी चाहिए।

दरवाजे पर दस्तक हुई , देखा तो पुलिस खड़ी थी।
बुआ पास जाकर बोली घरेलू मसला है, छोटी लड़की है ऐसे ही घर वालों से नाराज होकर फोन कर दिया होगा। परेशान कर दिया आपको।

पापा बोल पडे़- अब ये मसला घरेलू नहीं रहा।
एक बाप अपनी बेटी के साथ हुए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई है।.
गिरफ्तारी तो होगी ही।

(ताऊजी को गिरफ्तार कर लिया गया।
बेशक आज पूरा घर हमारे खिलाफ था, पर पापा का साथ होना पूरी दुनिया के साथ होने जैसा था)

ममता छिब्बर

० नाम : ममता छिब्बर
० पिता का नाम : एम एन छिब्बर
० शिक्षा : Msc Mathematics
० वर्तमान/स्थायी पता : 32/1 कैनाल रोड़ , राजपुर, देहरादून उत्तराखडं

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