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पुस्तक समीक्षा - कृति:-स्वेटर(कहानी संग्रह) लेखक:- अशोक जमनानी प्रकाशक:-संदर्भ प्रकाशन,भोपाल समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"

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पुस्तक समीक्षा कृति:-स्वेटर(कहानी संग्रह) लेखक:- अशोक जमनानी प्रकाशक:-संदर्भ प्रकाशन,भोपाल समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"   ...

पुस्तक समीक्षा

कृति:-स्वेटर(कहानी संग्रह)

लेखक:- अशोक जमनानी

प्रकाशक:-संदर्भ प्रकाशन,भोपाल

समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"

   अशोक जमनानी जी के इस कहानी संग्रह में कुल पन्द्रह कहानियाँ हैं। 128 पृष्ठ की इस कृति की कहानियों को आकाशवाणी भोपाल ने पिछले कुछ वर्षों में प्रसारित किया था। आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी साकेत अग्निहोत्री  का लेखक को पूर्ण मार्गदर्शन व आत्मीयता मिली।इस कृति की आमुख कथा स्वेटर में अमोल के स्वेटर व प्रेम प्रसंग की चर्चा हर जुबान पर हो जाती है। कोई कहता ये स्वेटर उसकी माँ की आखरी निशानी है। कोई कहता अमोल तांत्रिक के चक्कर मे आ गया। बुरी नज़र से बचने के लिए भद्दा स्वेटर पहनता है। असल मे अमोल ने वह स्वेटर फुटपाथ से खरीदा था। अगली कहानी चोर में सेठ द्वारा लड़को को गश्त लगाने के लिए तुरंत रुपये देने की हाँ भरने की बात पर सभी को आश्चर्य हुआ। खुद अपनी धर्मपत्नी को भी वे सच बात नहीं बताते हैं कि कम्बल ओढ़कर बैठा वह व्यक्ति खुद सेठ जी ही थे।  सेठानी जब पूछती है तो वे कहते हैं घबराहट का कारण ये है कि पुराना मकान जो बिक गया उसकी पूरी रकम सेठ घर ले आये थे। जुगल को लग रहा था कि चोर सेठ की हवेली में है। लाला कितना समझदार निकला। अगली कहानी सुन्दर में बुआ कहानियाँ सुनाती है ।उनकी कहानियों में भूत प्रेत चुड़ैलों को सुंदर बताती थी। कार्तिक कहता बुआ भला चुड़ैल बहुत डायन भी सुंदर रहती है क्या ?

  कार्तिक बुआ से कहता है कि वह एक दिन गक्त सिद्ध करके ही दम लेगा की बुआ गलत बताती है। कार्तिक सिविल सर्विसेस की तैयारी करता है। कार्तिक कहता भूत प्रेत रूप बदलकर सुन्दरता का धोखा दे सकते हैं लेकिन सुन्दर नहीं होते। बुआ उसे माँ का स्नेह भी देती और दोस्त का साथ भी। कार्तिक नये शहर चला जाता है। उसे सिविल सर्विसेस में सफलता मिल जाती है। उसकी शादी हो जाती है। उसके बच्चे बड़े हो जाते है। बुआ से मिलने कार्तिक जा नहीं पाया। दस बरस बीत गए। एक दिन वह बच्चों से वादा करता है कि मैं तुम्हें दुनिया की सबसे बेहतरीन कहानियां कहने वाली हस्ती से तुम्हें मिलवाऊंगा। तब बुआ बताती है कि ये मेरे पति और उस औरत की तस्वीर है जिसे मेरे पति ने मुझसे शादी के बाद रिश्ता जोड़ लिया था। पुरानी होने के बावजूद तस्वीरों में चेहरे बेहद स्पष्ट थे। बुआ की कहानियों मे जितने भूत प्रेत चुड़ैलें सुन्दर होती है।

  परकम्पा वासिनी कहानी में बताया कि माँ घर परिवार के लिए कितने रूप धारण करती है जब बेटे माँ को घर से बाहर निकाल देते हैं उस समय वह माँ आत्महत्या करने के लिए नर्मदा मैया में डूबने के लिए तैयार हो जाती है। अचानक वह परिक्रमा के साथी से मिल जाती है। अपने मधुर कंठ का मोल उसे जान पड़ता है। वह गाँव गाँव भजन सुनाती अब परिक्रमा में आगे चलती पीछे उसके भीड़ चलती। वह परकम्पा वासिनी बन परिवार तार देती है। लफ्फाज कहानी भी इस कृति की श्रेष्ठ कहानी लगी।

   टिकिट कहानी में गोकुल के पास टिकिट नहीं रहता है। दस रुपये में कंडक्टर अंदर बिठाते हैं पाँच रुपये में बस के पीछे लटक कर जाना पड़ता है। पन्द्रह किलोमीटर। सड़क पर हाथ छूटे तो गिरने का डर। किसानों की समस्या अतिवृष्टि होने पर खेत मे बीज गल जाता है। बारिश समय पर नहीं होती। बीज के लिए उधार लेने पड़ते हैं। कर्ज़ नहीं चूकता। अस्पताल में इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता है। मुसीबत के दो नहीं बीस हाथ होते हैं। ये जो बस का कंडक्टर है ना वो ही मेरा बेटा है। अतीत में यही गोकुल सब्जियाँ बेचता था। वर्तमान में इसके पास केवल पाँच रुपये हैं।

  रंग कहानी में शिशिर व मेघना के रिश्तों का रंग इसमें बताया है। इस कहानी में बताया कि होली प्राकृतिक रंगों से खेलना चाहिए। पलाश में इत्र मिलाकर होली खेलिए। केमिकल के रंगों से त्वचा को बहुत नुकसान होता है। रिश्तों के रंग आपसी प्रेम व अपनत्व से गहरे होते हैं। एक अच्छी कहानी।

   उल्टी चप्पले कहानी में छोटी बिटिया को पिताजी कहते है बेटे गिर जाओगे चप्पल उल्टी है। वही बेटी बड़ी हो जाती है। पिताजी वृद्धावस्था में आते हैं तो बिटिया कहती है पिताजी चप्पलें उल्टी है आप सही पहनों गिर जाओगे।

    झुर्रियाँ कहानी में सगुनी दस लीटर दूध मे चोरी छिपे एक लीटर पानी मिलाती है। बारिश में गांव कैसे अस्त व्यस्त हो जाते हैं। रास्ते बन्द हो जाते हैं ।आवागमन ठप्प हो जाते हैं। सुन्दर चित्रण कहानी में किया है । सगुनी आजी की गोद मे सर रखती है तो दमकते सगुनी के चेहरे पर झुर्रियां दिखती हैं।

   अलग कहानी में सुगंधा आत्महत्या की कोशिश करती है। वह निलय से कहती है। तुम मेरा व विक्रम का तलाक करा दो। मेरा और विक्रम का साथ रहना असंभव है। वकील हाँ भर लेता है। वकील कहता है पति पत्नी सहमत है तो तलाक हो जाएगा।

विचारों का मेल नहीं होने से परिवार कैसे बिखरते हैं। इस कहानी में लेखक ने बताने का प्रयास किया है

   अलमारी कहानी में वितान और नव्या शहर के छोटे मकान में रहते हैं। वितान को धूल से एलर्जी है। नव्या बार बार सफाई करती है। लेकिन शयन कक्ष में रसोई घर होने से पिछले कमरे में सामान रखने जाती। कोई आ जाता तो साफ करती। फिर रसोई का काम करना हो तो सामान लाती। एक दिन वितान उसे पीहर भेज देता है।  नव्या नई अलमारी पर एक चिट्ठी छोड़ चल जाती है।दस दिन बाद नव्या का फोन आता है। नई अलमारी से सभी सामान व्यवस्थित जम जाते हैं। अलमारी लक्की निकली। मेरी पगार दस हज़ार बढ़ गई। फोन पर नव्या को सुना कर दोनों के चेहरे खिल गए।

   लाल चीटियां कहानी में पुराने स्कूल की प्राकृतिक छटा का सुंदर वर्णन किया जिसमें बताया कि स्कूल में बरगद पीपल नीम के पेड़ हैं।कनेर गुलमोहर भी है। राजीव  गौरी को स्कूल की सबसे पुरानी टीचर माधवी से मिलाता है। गौरी कॉलेज में पढ़ाती है। रिसर्च करती है। उसके पांच साल की बेटी स्नेहा भी है। माधवी उसे पढ़ाने के लिए तैयार हो जाती है।

इस कहानी में बताया कि नोकरी के लिए प्रिंसिपल जो बेटी कह कर पुकारता था। आज शर्त रखता है कि तीन चार दिन उसके साथ घूमने जाए तो नोकरी पक्की कर देगा। जब माधवी घर आकर ये बात बताती है वह पति सास ससुर से साथ देने की कहती है । वह थाने में रिपोर्ट लिखाने की कहती है। मगर रात भर परिवार के सदस्य फैसला कर सुबह उसे बुलाकर कहते है  न्याय मिलते मिलते तेरी उम्र बीत जाएगी । तू प्रिंसिपल के साथ जा। हमे नोकरी पक्की चाहिए। उसके पाँव से जमीन खिसक गई। वह कॉलेज में लाल चींटी के डर से आलथी पालथी मारकर बैठती थी। आज तो घर पर लाल चींटी ने काटा। उसके पूरे शरीर पर लाल चकते हो गए।

  ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ इस कहानी में बताया है। और उससे होने वाले नुकसान भी। फाल्गुन में गर्मी पड़ रही है। जबकि किसी जमाने मे ठण्ड पड़ती है। शास्त्र जिसे प्रलय कहते है उसे ही विज्ञान में ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं। धर्म और विज्ञान में अंतर बताया है। विज्ञान प्रमाण पर आधारित है। धर्म तर्क पर। तर्क और प्रमाण में अंतर होता है। गाँव मे पंडित आज भी पुरानी रूढ़ियों को मानते है। मधेसर के सिधारने पर उसकी पत्नी सोलह सिंगार कर रहती है। पति की मृत्यु दुर्घटना में होती है। अधोगति में जाने वाले कि सदगति नहीं होती। पूजा पाठ कराना चाहिए। ऐसा व्यक्ति अधम योनि में जाता हैं। विधवा को श्रृंगार नहीं करना चाहिए। आज भी गांवों में ये रूढ़ियाँ है जिन्हें बन्द करने की जरूरत है।मृत्यु भोज में जमीन बिक जाती है। कहानी में बताया कि पन्द्रह बीघा जमीन कैसे इलाज व क्रिया कर्म में खर्च किए जाने पर बिक जाती है। मृत्यु भोज बन्द करना चाहिए। इस पर सरकारी कानून के तहत रोक भी है।

  जमीन कहानी में बरसात के साथ रात भर जागने का अर्थ बताया।नलिनी कहती है इस बारिश के पास बरसने के लाइट कोई जमीन नहीं है।मुझे अपनी जमीन चाहिए। आलोक शादी शुदा है। उसकी पत्नी नेहा बेटे सुशांत के साथ दिल्ली रहती है। बेटे को होस्टल का खाना रास नहीं आया। बेटा बीमार रहने लगा। पति पत्नी दोनों ने निर्णय लिया कि नेहा जब तक वह पढ़ेगा साथ रहेगी। नलिनी का इधर एक्सीडेंट हो जाता है। आठ दिन बाद आलोक उससे मिलता है।नलिनी उसे जवानी से लेकर पूरी कहानी सुनाती है। कैसे एक अमीर लड़के से उसकी शादी घर वालों के कहने पर हुई। पावस नाम का वह लड़का जिस लड़की को चाहता था उसने पावस से शादी नहीं कर दूसरे लड़के से शादी कर ली थी। पावस को दुनिया की कोई भी लड़की हो नफरत हो गई थी। मानसिक रूप से पावस बीमार रहने लगा था घर वालों ने नलिनी जैसे सुशील लड़की से इस विश्वास से शादी कर दी कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन पावस नलिनी से मात्र हवस पूरी करता। उसे मारता पीटता था। पावस विदेश चल जाता है  इधर नलिनी की नोकरी सरकारी अधिकारी की मिल जाती है। दो वर्षोज में वह पावस को चिढ़ाती। दोस्तों के साथ वक़्त बिताती। खुशी मनाती। पावस जेल चला जाता है। जेल से आने के बाद एक दिन पता चलता है कि पावस सारी जायदाद नलिनी के नाम कर आत्महत्या कर लेता है। रिश्तों का सच बयां करती कहानी अच्छी लगी।

  इस कृति की अंतिम कहानी कुम्भ दादी में कुम्भ स्नान का महत्व समझाने का प्रयास किया है। दादी चमडे का काम करने वाले रैदास के हाथ से उज्जैन की शिप्रा नदी से भर कर लाए कलश से नोवाँ कुम्भ स्नान आँगन में बैठ करती है। दादी की आंखें छलक उठी। दोनों कुलों में उजियारा हो गया।

  कहानियों की भाषा सीधी,सरल व बोधगम्य है। मुहावरों व लोकोक्तियों का प्रयोग सुन्दर ढंग से किया है।विवरणात्मक, वर्णनात्मक शेली देखते ही बनती है। घटनाक्रम के अनुसार सजीव चित्रण मिलता है। कहानियों में गजब का कोतुहल पढ़ने को मिलता है। पूरी कहानी पढ़ने की जिज्ञासा होती है।

  पारिवारिक,सामाजिक कहानियों का सुन्दर गुलदस्ता है यह स्वेटर कहानी संग्रह। जमनानी जी को इस कृति से साहित्य जगत में नई पहचान मिले। इसी कामना के साथ हार्दिक बधाई।

- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"

शिक्षक एवम साहित्यकार

98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान

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रचनाकार: पुस्तक समीक्षा - कृति:-स्वेटर(कहानी संग्रह) लेखक:- अशोक जमनानी प्रकाशक:-संदर्भ प्रकाशन,भोपाल समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"
पुस्तक समीक्षा - कृति:-स्वेटर(कहानी संग्रह) लेखक:- अशोक जमनानी प्रकाशक:-संदर्भ प्रकाशन,भोपाल समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"
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