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यहूदी जाति के लोग इतने बुद्धि वान क्यों और कैसे? शोध लेख ----डॉक्टर स्टीफन कार्र लिओन. अनुवादक---- मंजुल भटनागर , मुंबई

शोध लेख ----डॉक्टर स्टीफन कार्र लिओन.

अनुवादक---- मंजुल भटनागर , मुंबई

"यहूदी जाति के लोग इतने बुद्धिमान क्यों और कैसे हैं "??

  "लेखक ने डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान तीन साल की  इंटर्नशिप के लिए इसराइल में कुछ अस्पतालों में समय बिताया उसी समय के बहुमूल्य अनुभव पर उनका शोध लेख  "

एक अनुसन्धान के दौरान मेरे मन में जिज्ञासा जगी और में सोचने पर मजबवूर हो गया कि आखिर कार यहूदी लोग इतने बुद्धिमान कैसे हैं ?

यह इनकार नहीं किया जा सकता है कि यहूदियों का व्यापार जगत में और शिक्षा जगत कला जगत में बोलबाला है। विज्ञान सौंदर्य प्रसाधन होटल उद्योग फ़िल्में अनेक क्षेत्र में उनके युवा विश्व के और देशों से अग्रणी हैं। आज विश्व में ७० प्रतिशत यहूदी लोगों ने इन क्षेत्रों पर कब्जा किया हुआ है। आखिर क्यों और कैसे ??

अपने प्रवास के दूसरे सत्र में मुझे केलोफोर्निआ जाना था में सोच कर हैरान था कि ईश्वर ने यहूदियों को ही क्यों इन उच्च कोटि की नेमतों से बक्शा है क्या ये इक कोई चमत्कार है या इस के पीछे उनके परिवारों की और समाज की या देश की कोई बड़ी तैयारी है ?

मेरी खोज में मुझे यह सब जानने के लिए तकरीबन आठ साल का समय लगा और मैंने अपने खोज के दौरान जो जानकारी उपलब्ध की वो यहूदियों के खान पान ,उनकी धर्म संस्कृति ,गर्भवती स्त्रियों के गर्भ धारण करने के दौरान की तैयारियां शामिल थीं जो यहूदियों को विश्व के दूसरे देशों के युवा और बच्चों से अलग और ज्यादा बुद्धिमान और ऊर्जावान बनाती है।

यहाँ हम उनकी महिलाओं के गर्भवती होने की प्रारंभिक तैयारी के साथ अपनी खोज आरम्भ करते हैं  . इसराइल में, पहली बात मैंने देखा है कि एक गर्भवती माँ हमेशा खुश रहती है और उसकी दैनिक क्रियाओं में गीत गाना, पियानो बजाना और हमेशा अपने पति के साथ बैठ कर एक साथ गणित की समस्याओं को हल निकालते रहना शामिल रहता है। .

लेखक कहते हैं ज़ब मैंने गर्भवती महिलाओं को हमेशा गणित की किताबें ले जाते हुए देखा तो मैं यह देख कर बहुत हैरान था  . कभी-कभी मैं कुछ समस्याओं का समाधान करने के लिए उनकी मदद भी करता था . मैंने उनसे पूछना चाहा कि क्या इस गणित के प्रश्न हल करने से गर्भ में आने वाले बच्चे के लिए कुछ लाभ हो सकता है? उनका जवाब था हाँ गर्भ में आने के बाद बालक के मस्तिष्क विकास के लिए अभी से  बच्चे को प्रशिक्षित करने के लिए मां का गणित के सवाल हल करते रहना बेहद लाज़मी है। उनका कहना था कि यह जरूरी है कि आने वाली संतान प्रतिभाशाली हो, इसी लिए यहूदी महिलाएं गणित के मुश्किल सवाल पूरी गर्भावस्था के दौरान हल करती रहती हैँ .

दूसरी बात मैंने यह देखी कि गर्भावस्था के दौरान यहूदी महिलाएं अपने भोजन का ख़ास ख्याल रखती हैं. वो गर्भ के दौरान बादाम दूध और खजूर ज्यादा मात्रा में लेती हैं। दोपहर के भोजन के लिए वह मछली चावल का आहार लेती हैं और सलाद में बादाम और अन्य मेवे  . इक बात और कि गर्भवती माताओं के लिए कॉड लिवर तेल लेना अति आवश्यक है। यहूदी अपने आने वाले बच्चे की तैयारी गर्भावस्था के प्रथम सप्ताह से ही शुरू देते हैं और आज यह सब उनकी संस्कृति का इक प्रमुख हिस्सा है

इक बार इक गर्भवती स्त्री के पति ने मुझे रात को भोजन पर आमंत्रित किया तो मैंने महसूस किया और मैंने देखा है कि यहूदी लोग हमेशा मछली खाना पसंद करते है, लेकिन उसके साथ वो ब्रेड लेते हैं वो किसी दो प्रकार के मांस को इक टाइम इकट्ठा भोजन में नहीं लेते  . उनका विश्वास है कि मांस और मछली इक साथ लेने से शरीर को कोई लाभ नहीं होगा।

इसराइल में धूम्रपान वर्जित है, आप यदि उनके घर एक अतिथि हैं, तो भी उनके घर में जाकर धूम्रपान नहीं कर सकते वे विनम्रता से धूम्रपान के लिए बाहर जाने के लिए कह देते हैं। इसराइल में विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिकों के मुताबिक, निकोटीन हमारे मस्तिष्क में कोशिकाओं को नष्ट कर देता है हमारे भविष्य की संतान और डीएनए को प्रभावित करती है। यहूदियों के अनुसार सिगरेट पीने के परिणामस्वरूप आने वाली पीढ़ियों मूर्ख और दोषपूर्ण जन्म लेंगी । सभी धूम्रपान करने वालों कृपया ध्यान दें! (विडंबना यह है कि इसराइल सिगरेट का सबसे बड़ा उत्पादक है ... क्या आप जानते हैं यह ------?

यहूदियों के यहां शिशु  के लिए भोजन का सेवन माता-पिता के मार्गदर्शन में होता है, सबसे पहले सुबह उठ कर बच्चा बादाम के साथ फल और काडलीवर ऑयल लेते हैं। खोज के दौरान लेखक को पता लगा कि यहूदी बच्चों को कम से कम 3 भाषाओं, यानी हिब्रू, अरबी और अंग्रेजी सीखनी और जाननी पड़ती है बचपन से ही उन्हें  पियानो और वायलिन बजाने में प्रशिक्षित किया जाना बहुत जरूरी है।

यहूदी मानते हैं कि इस जीवन शैली को अपना कर और इस पर अभ्यास से जन्म लेने वाली संतान का बौद्धिक स्तर ऊँचा होता है और वो देश के इक बुद्धिमान नागरिक बन सकते हैं।  यहूदी वैज्ञानिकों के मुताबिक, संगीत के सीखने से बच्चों के मस्तिष्क के तार उत्तेजित रहते हैं । यहूदियों के प्रतिभाशाली होने का यह इक प्रमुख कारण है.

यहूदियों के स्कूल में विद्यार्थियों को कक्षा  1 से 6  तक जो विषय सिखाये या पढ़ाये जाते हैं उनमें व्यापार गणित प्रमुख हैं। इसके बाद की कक्षाओं में विज्ञान विषयों और विज्ञान विषय से सम्बंधित विषय की प्राथमिकता रहती है ।  केलोफोर्निया में विधार्थियों का बौद्धिक स्तर या लेवल बहुत ऊँचा रहता है इसी के साथ साथ स्कूली शिक्षा में यहूदी बच्चों को तीरंदाजी शूटिंग और एथलेटिक्स जैसे खेल भी जरुरी तौर पर सिखाये जाते हैं और यह उनके स्कूल सेलेबस का इक अति आवश्यक पहलू में शामिल रहता हैं.

उच्च विद्यालय के छात्रों पर  विज्ञान के अधिक अध्ययन पर जोर दिया जाता है। उच्च शिक्षा में छात्र यूनिवर्सिटी लेवल पर विभिन्न उत्पादों को बनाने ,चिकित्सा का ज्ञान पाने और दूसरी अलग परियोजनाओं जैसे इंजीनियरिंग डॉक्टरी होटल इंडस्ट्री और वाणिज्य आदि का ज्ञान प्राप्त करते हैं। एक सफल परियोजना या विचार का ज्ञान उच्च अध्ययन संस्थान, पॉलिटेक्निक या विश्वविद्यालयों में ही दिया जाता है। सभी स्तर पर पढ़ने वाले छात्र को निर्णय शक्ति को मज़बूत बनाने के लिए वहां समय समय पर अनेक वर्कशॉप चलायी जाती हैं।

विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष में व्यापार संकाय को अधिक वरीयता दी गई है। व्यावसायिक अध्ययन में छात्रों को एक परियोजना दी जाती है और वे केवल तभी उनके समूह या कंपनी को ज्वाइन कर सकते हैं जब वो कम्पनी को  10 USD1 लाख का मुनाफा बना कर दें सकते हैं।

हैरान होने की बात नहीं यह वास्तविकता है, और यही कारण है कि दुनिया के व्यापार में आधे से ज्यादा यहूदियों की वर्चस्वता है। उदाहरण के लिए यदि देखें कि  Levis का ब्रांड व्यापार और फैशन के लिए एक इजरायली विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जा रहा है.

लेखक कहता है कि आप ने देखा होगा कि यहूदी किस तरह प्रार्थना करते हैं ,वे हमेशा अपना सिर हिला कर ईश्वर को स्मरण करते हैं - उनका मानना है कि ऐसा करने से उन्हें प्रोत्साहन मिलता है और अधिक ऑक्सीजन मस्तिष्क को मिलती है इस्लाम धर्म में भी यही बात है जहाँ वो सिर झुका कर प्रार्थना करते हैं

जापानी को देखो, वे हमेशा अपनी संस्कृति को अनुमोदन करते हैं और सिर झुका कर ईश्वर की प्रार्थना करते हैं - जापानी युवा भी बहुत स्मार्ट हैं - उन्हें सुशी (ताजा मछली) से प्यार है। यह एक संयोग है कि यहूदी और जापानी लोगों की कई बातें एक सी हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका में यहूदियों का लिए वाणिज्य और व्यापारिक केंद्र न्यूयॉर्क में स्थित हैं - वहां सिर्फ केवल यहूदियों के लिए खानपान की सुविधा दी जाती है किसी भी यहूदी का लिखा कोई भी उपन्यास या कोई लाभदायक विचार, उनकी कंपनी ब्याज मुक्त ऋण देकर अपने युवा और स्कूल कॉलेज में भिजवाती है और उन्हें यकीन रहता है कि उनके व्यापार इन्हीं सब बातों से आज पूरे विश्व भर में इतना उन्नत है।

आज कल यहूदी कंपनियों के प्रायोजकों की कम्पनी स्टारबक्स, डेल कंप्यूटर, कोका कोला, DKNY, ओरेकल, Levis, डंकिन डोनट, हॉलीवुड की फिल्मों और अन्य व्यवसायों में लगे हैं विश्व भर में फैले हुए हैं। इस प्रकार आज विश्व के सैकड़ों युवा शक्ति को प्रोत्साहित करते रहें हैं।

विश्व स्तर पर यहूदी छात्रों की गहरी मांग है। न्यूयॉर्क में यहूदी चिकित्सा स्नातकों को न्यूयार्क वासी अपने साथ रजिस्टर करते हैं और पढाई के लिए ब्याज मुक्त ऋण भी दिलवाते हैं और अपने साथ निजी तौर अभ्यास करने की अनुमति के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इसीलिए न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया के अस्पतालों हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी रहती है।

लेखक कहते हैं धूम्रपान करना और संतान पैदा करना मानों बेवकूफों की ज़मात इकट्ठी करने जैसा है।  2005 में सिंगापुर के लिए यात्रा के दौरान, लेखक ने देखा कि धूम्रपान करने वालों को सिँगापुर में ,समाज से बहिष्कृत कर देते थे । वहां सिगरेट के एक पैकेट की कीमत  7 अमरीकी डालर थी जिसे देख कर लेखक को काफी हैरानी हुई। इसराइल की ही तरह, ध्रूमपान सिँगापुर में वर्जित है। सरकार चलाने का ढंग सिंगापुर में इजरायल के समान ही है। इसी कारण सिंगापुर के ज्यादातर विश्वविद्यालय उच्च मानकों के है, भले ही सिंगापुर भगौलिक दृष्टि से मैनहट्टन से भी छोटा है।

लेखक बताता है कि उनकी थीसिस में, उन्होंने धर्म या जाति को स्पर्श नहीं किया आगे लेखक कहता है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा क्यों यहूदियों को अपने पर इतना घमंड है और क्यों वो इतने अभिमानी है .लेखक चाहते हैं कि उनका मंतव्य बस यह है की यदि हम भी कोशिश करें तो हम भी क्या यहूदियों की तरह बुद्धिमान पीढ़ियों का उत्पादन नहीं कर सकते हैं ?? *

जवाब ये हो सकता है कि हाँ कर सकते हैं पर हमें ऊपर दिए तरीकों या मानकों को मनन करना होगा और अपनी तीन पीढ़ियों के भीतर खाने और परवरिश के बारे में अपनी दैनिक आदतों को बदलने की जरूरत पर जोर देना होगा

अंत में लेखक कहते हैं ,मनुष्य जाति शांति से रहें और सब मिलकर मानव जाति की भलाई कर सकें यही उनकी अभिलाषा है  , इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन हैं किस देश के हैं किस जाति के हैं या किस धर्म के  .भविष्य की पीढ़ियां बुद्धि वान हो ऊर्जावान हो और वो देश राष्ट्र विश्व के उत्थान और हित में अपना सफलतम योगदान दें सकें तभी इस दुनिया की भलाई है।

---.

मंजुल भटनागर अनुवादक

मुंबई  ,अँधेरी पश्चिम

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