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लोगों का कद - विनोद सिल्ला की कविताएँ

1.
लोगों का कद

मेरे
आस-पास के
लोगों का कद
हो गया
उनके वास्तविक कद से
कहीं अधिक ऊँचा

विड़ंबना यह भी है
वो नहीं जानते
झुकना भी

इसलिए मैंने ही
करने पड़ेंगे
अपने चौखट-दरवाजे
उनके कद के अनुरूप

ताकि बचाया जा सके
रिश्तों को
दुर्घटनाग्रस्त होने से

-विनोद सिल्ला©
2.
खोई हुई आजादी

मैं ढूंढ रहा हूँ
अपनी खोई आजादी
मजहबी नारों के बीच
न्यायाधीश के दिए निर्णयों में
संविधान के संशोधनों में
लालकिले की
प्राचीर से दिए
प्रधानमंत्री के भाषणों में
चुनाव पूर्व
राजनेताओं द्वारा
किए वादों में

लेकिन नित के
ऑनर किलिंग के समाचार
अनियन्त्रित-हिंसक
दंगाई भीड
उजड़ती झुग्गी-बस्तियाँ
यौन पीड़िता की चीखें
दे रही हैं
सशक्त गवाही
कहीं भी
आजादी न होने की

-विनोद सिल्ला©
3.
कमाल के समीक्षक

एक मेरा मित्र
बात-बात पर
कोसता है संविधान को
ठहराता है इसे कॉपी-पेस्ट

एक दिन मैंने
पूछ ही लिया
कितनी बार पढ़ा है संविधान
उसने कहा
एक बार भी नहीं

कभी देखा है दूर से
भारतीय संविधान
उसका जवाब था
कभी नहीं देखा

न कभी पढ़ा
न कभी देखा
फिर भी कर डाली
संविधान की समीक्षा
कमाल के समीक्षक हैं

-विनोद सिल्ला©
4.
जीवन का सफर

जीवन के सफर में
अनेकों बार आई
खुशियों की रेलगाड़ी
कभी समय पर तो
कभी निर्धारित
समय से, विलंब से
चलो देर आई
दुरुस्त आई
आई तो

हमारी चाहत है इसे
सरपट दौड़ते देखने की
लेकिन यह ठहर जाती है
हर स्टेशन पर
निर्धारित समय से
अधिक समय तक

अनेक बार
टिकट जांचते टी.टी.ई. की
अशोभनीय टिप्पणियाँ
डाल देती हैं
रंग में भंग

कभी सहृदय यात्री
लगा देते हैं चार चांद
सफर

कभी खड़ूस सहयात्री
कर देते हैं दूभर
जीवन का सफर

-विनोद सिल्ला©
5.
कौन है उत्तरदायी

जब शुद्रों को
नहीं था अधिकार
सेना में भर्ती होने का
युद्ध करने का
तब होता रहा भारत
बार-बार
विदेशियों का गुलाम
उस सब के लिए
कौन है उत्तरदायी
नहीं लिखा
किसी पुस्तक ने
किसी ग्रंथ ने
ढूंढ़ती रही
मेरी खोजी नजर
आज तक

-विनोद सिल्ला©
6.
गवाही

शंबूक ऋषि की
कटी गर्दन
एकलव्य का
कटा अंगूठा
टूटे व जीर्ण-शीर्ण
बौद्ध स्तूप
खंडित बुद्ध की प्रतिमाएं
ध्वस्त तक्षशिला व नालंदा
तहस-नहस
बौद्ध साहित्य
धूमिल बौद्ध इतिहास
दे रहा है गवाही
कितना असहिष्णु
कितना भयावह
था अतीत

-विनोद सिल्ला©
7.
सुंदरता

सुंदर चेहरे
नहीं होते सदैव सुंदर
यह सुंदरता
बाह्य आकार-प्रकार
बाह्य मापदंड आधारित
सुंदरता है
जरूरी नहीं यह
व्यवहार की कसौटी पर
अक्सर खरी उतरे
व्यवहार आधारित सुंदरता
होती है सदैव सुंदर
यही सुंदरता
होती है
वास्तविक सुंदरता
इसके लिए
नहीं जाना होता
ब्यूटी पार्लर
इसके लिए
नहीं होती आवश्यकता
सौंदर्य प्रसाधनों की
यही होती है
विशुद्ध सुंदरता

-विनोद सिल्ला©
8.
खारा ही रहा

सागर की तरह
मानव जीवन में
मीठे जल की
कितनी नदियाँ
जा मिलीं
लेकिन फिर भी
मानव जीवन
सागर की तरह
खारा ही रहा
जबकि नदियों ने
खो दिया
अपना अस्तित्व
मीठा करने के लिए
सागर को

-विनोद सिल्ला©
9.
दुष्टता

दुष्टता करने वाला ही
नहीं होता दुष्ट
उसकी दुष्टता के
मूकदर्शक भी
होते हैं दुष्ट
उसका समर्थन
करने वाले भी
होते हैं दुष्ट
उसकी दुष्टता का
स्तूतिगान करने वाले भी
होते हैं दुष्ट
उसे सहयोग करने वाले भी
होते हैं दुष्ट
वास्तव में दुष्टता के
प्रोत्साहक, मूकदर्शक
व स्तुतिगायक ही होते हैं
वास्तविक दुष्ट

-विनोद सिल्ला©
10.
वह था मात्र इंसान

आदिकाल में
नहीं था मानव
क्लीन शेव्ड
करता नहीं था कंघी
लगता होगा जटाओं में
भयावह-असभ्य
लेकिन वास्तव में
वह था
कहीं अधिक सभ्य
आज के क्लीन शेव्ड
फ्रैंच-कट
या कंघी किए
इंसानों से
नहीं था वह
व्यभिचार में लिप्त
नहीं था वह भ्रष्टाचारी
नहीं करता था कालाबाजारी
मुक्त था
जाति-धर्म से
गोत्र विवादों से
अन्य फसादों से
वह था मात्र इंसान

-विनोद सिल्ला©

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परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

2 टिप्पणियाँ

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