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इंतजार - आशा रौतेला मेहरा

इंतजार

मीना रातभर सुहाग की सेज पर पति का इंतजार करती रही परंतु महेंद्र प्रताप नहीं आए। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद तो जैसे घर से उनका वैराग्य हो गया था। अपनी दीदी दीपा के कहने पर उन्होंने मीना से शादी तो कर ली पर उसे कभी पत्नी का दर्जा नहीं दिया। दिन गुजरते रहे। मीना को अपने पति की बेरूखी अच्छी नहीं लगती थी। मीना पढ़ी-लिखी और कुशाग्र बुद्धि की थी। दीपा दीदी के कहने पर वह बिजनेस में हाथ बँटाने लगी। पहली पत्नी की मृत्यु के बाद महेंद्र प्रताप का मन बिजनेस से हट सा गया था। कंपनी भी लगातार घाटे में जा रही थी। पर मीना के आने से कंपनी की माली हालत सुधरने लगी।

एक दिन महेंद्र प्रताप बहुत बीमार पड़ गए। उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। मीना ने उनकी बहुत सेवा की पर उनकी हालत नहीं सुधरी। डॉक्टर ने बताया है कि महेंद्र प्रताप की दोनों किडनी खराब हो गई हैं। मीना ने पत्नी धर्म निभाते हुए अपनी एक किडनी अपने पति को दे दी। धीरे-धीरे महेंद्र प्रताप ठीक होने लगे। एक दिन दीपा दीदी ने उन्हें बताया कि मीना ने अपनी किडनी देकर उनकी जान बचाई है तो उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े। आज महेंद्र प्रताप को अपनी गलती का एहसास हो चुका था। मीना के त्याग, समर्पण तथा प्यार-स्नेह ने एक बार उन्हें फिर प्यार करने पर मजबूर कर दिया। हाँ उन्हें मीना से प्यार हो गया था। अपने प्यार का इजहार करना चाहते थे पर उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी। वे मीना के कमरे में गए और मीना का हाथ पकड़कर बोले, आई लव यू मीना। उनके मुँह से ये शब्द सुनकर मीना रो पड़ी और बोली, आपने ये बात कहने में आठ साल लगा दिए। महेंद्र प्रताप ने उसे गले से लगा लिया। वह फूट-फूटकर रोने लगी। सारे गिले-शिकवे आँसू में बह गए।

आशा रौतेला मेहरा

कविता कॉलोनी

नई दिल्ली

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