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रोचक आलेख - एक जोकर की ज़रूरत - डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

भले ही यह विरोधाभास लगे लेकिन जहां जहां, किसी भी कारण से, वातावरण बेहद गंभीर हो जाता है, वहां एक जोकर की उपस्थिति आवश्यक हो जाती है। सर्कस तो आपने देखा ही होगा। वहां बेहद खतरनाक करतब दिखाए जाते हैं, लोगों की सांसें थम जाती है। तभी एक जोकर आता है और अपनी हास्यास्पद अदाओं से वह गंभीर वातावरण को चुटकियों में हल्का कर देता है। हम हर समय गंभीर बने नहीं रह सकते। सच तो यह है की जो लोग हँसते, मुस्कराते नहीं उनसे हमेशा सावधान रहने की ज़रूरत है।

जोकर मसख़रा होता है। मज़ाक करता है। वह जोक सुनाता है। अपनी हुलिया भी वह कुछ ऐसी बना लेता है जिसे देखकर हंसी छूट जाए। हंसाना ही उसका मुख्य काम होता है। लोग बड़े बड़े गंभीर कार्यों को अंजाम इसीलिए दे पाते हैं कि उनके आसपास एक जोकर भी होता है जो उनके गंभीर कार्यों को सरल और संभव बना देता है। कभी बहस करते हुए दो व्यक्तियों को ध्यान से देखिए। जैसे जैसे बहस बढ़ती जाती है, लगता है कहीं परस्पर हाथापाई न हो जाए। बस तभी एक जोकर की ज़रूरत होती है। वह बीच में कुछ ऐसी बात कह देता है कि हाथापाई पर आमादा व्यक्तियों का स्नायुतंत्र ढीला पड़ जाता है और उन्हें तनाव से मुक्ति मिल जाती है। हाथापाई कम से कम स्थगित तो हो ही जाती है। जोकर कभी हिंसक नहीं हो सकता। उसका एतबार हमेशा अहिंसा में रहा है।

गंभीर से गम्भीर काम खतरे में न पड़ जाएं, इसलिए हंसी की थोड़ी खुराक ज़रूरी होती है। गंभीर बने रह पाना, कोई हंसी-खेल नहीं है। इसके लिए हंसी आवश्यक है। आप हंसते हैं इसीलिए गंभीर भी रह सकते हैं। जो हँस तक नहीं सकता वह गंभीर भला क्या रह पाएगा ?

हंसना अपने आप में एक गंभीर विषय है क्योंकि यही वह काट है जो आपको जानलेवा गंभीरता से मुक्त करती है। लेकिन हंसी की मात्रा का भी ख्याल रखना ज़रूरी होता है। ध्यान रहना होता है कि हंसी भी कहीं जानलेवा न हो जाए। ज्यादह हंसी और ज्यादह गंभीरता दोनों ही वर्जित हैं। अति किसी की भी क्यों न हो, अच्छी नहीं होती।

आप कल्पना करें कि आपको कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया जाए और इस तरह आपको गंभीर बने रहने के लिए मजबूर कर दिया जाए। ज़ाहिर है आप ऐसी स्थिति देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकते। उकता जाएंगे। आपको तब एक जोकर की आवश्यकता महसूस होगी ही होगी जो आपको थोड़ा हंसा सके और वातावरण को थोड़ा हलका बना सके।

जिन लोगों को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजा जाता है वे पारंपरिक रूप से गंभीर और समझदार व्यक्ति होते हैं। लेकिन उनकी यात्रा यदि साल-दो-साल की हो तो वह काफी उबाऊ हो सकती है। नासा मंगल मिशन पर एक टीम भेज रहा है। इसमें ज़ाहिर है वे लोग ही स्थान पा सकते हैं जो जानकार हों, समझदार हों और जो अपने मिशन के लिए समर्पित हों। इस मिशन पर अज्ञानियों और नासमझों के लिए कोई स्थान हो ही नहीं सकता। लेकिन इस टीम में, सारे जहां का आश्चर्य, एक जोकर का होना ज़रूरी समझा गया है। नासा के शोध के अनुसार मंगल ग्रह पर किसी भी मिशन को सफल होने के लिए एक मजाहिया शख्स की सख्त आवश्यकता है जो टीम के लोगों के मनोबल को ऊंचा रख सके। अत: एक ऐसे जोकर या ‘क्लाउन-फिगर’ की तलाश की जा रही है जो टीम के लिए हास्य का अहम रोल निभा कर मिशन की सफलता में अपनी ख़ास भूमिका निभा सके। आप अंदाज़ कीजिए, यह चयन कितना महत्त्वपूर्ण है कि जो अभी से उस ऐसे व्यक्ति की तलाश में जुट गया है जिसे २०३० के दशक में संभावित यात्रा करनी है !

यात्रा और यात्रा के लिए एक “क्लाउन-फिगर” की तलाश की सफलता के लिए हमारी शुभ-कामनाएं।

--डा. सुरेन्द्र वर्मा

१०/१ सर्कुलर रोड / इलाहाबाद -२११००१

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