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वेलेंटाइन डे विशेष – लघुकथा – प्यार का दिन – ज्ञानदेव मुकेश

प्‍यार का दिन

रंग-बिरंगे फूलों से लकदक राजधानी वाटिका आज युवावर्ग की नई-नई जोड़ियों की जमघट से कुछ ज्‍यादा ही गुलजार लग रही थी। सभी जोड़ियां एक-दूसरे के कमर में हाथ डाले खुशबूदार हवा की तरह वाटिका में लहरा सी रही थीं। वे सभी एक दूसरे को सुन्‍दर-सुन्‍दर उपहार दे रहे थे और पूरी गर्मजोशी से आलिंगन लेते हुए वेलेनटाइन डे विश कर रहे थे।

लेकिन अन्‍य दिनों की तरह वे बूढे दम्‍पति आज कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। युवक-युवती की एक जोड़ी उनसे पुराने समय से परिचित थी। वे बूढ़े दम्‍पति रोज सुबह वाटिका में टहलने आते थे। पर खास आज के दिन उन्‍हें आया हुआ न देखकर वह युवा जोड़ी बड़ी हैरान थी। उस बूढ़े दम्‍पति का घर पास में ही था। वे उनके घर जा पहुंचे। बूढ़े बाबा ने दरवाजा खोला। युवक ने पूछा, ‘‘बाबा, आज आपलोग बाग में क्‍यों नहीं आए ? आइए, हम सभी वहां वेलेनटाइन डे मना रहे हैं।''

बूढ़े बाबा ने उदास होते हुए कहा, ‘‘आज तुम्‍हारी चाची सुबह ही गुसलखाने में गिर कर बेहोश हो गई। इतनी सुबह मैं किसी को बुला भी नहीं सकता था। मेरे कमर में भी काफी दर्द था। फिर भी मैं उसे किसी तरह घसीटकर बिस्‍तर पर ले गया। चेहरे पर कई बार पानी के छींटे दिए। बहुत देर बाद उसे होश आया। मैंने उसकी कमर दबाई और पांव में बाम लगाया। फिर मैंने उसे चाय बनाकर पिलाई। बड़ी मुश्‍किल से कुछ खाने के लिए बनाया। मैंने उसे अभी नाश्‍ता कराया ही था कि मुझे भी चक्‍कर आ गया और मैं नीचे फर्श पर गिर पड़ा।

‘‘अब उसकी बारी थी कि वह मेरी सहायता करे। वह किसी तरह बिस्‍तर से उठी और बड़ी मशक्‍कत के बाद मुझे बिस्‍तर पर लिटाया। वह काफी देर तक मेरा सर दबाती रही और तलवों में तेल की मालिश करती रही। बस, अभी-अभी मुझे होश आया कि तभी तुम्‍हारी घंटी हमें सुनाई दी। मैं उसे वापस बिस्‍तर पर लिटाकर किसी तरह लड़खड़ाते हुए आकर दरवाजा खोलने आया हूं।''

ऐसा वृतांत सुनकर दोनों युवक-युवती उदास हो गए। युवती ने पूछा, ‘‘क्‍या आप हमारे साथ वाटिका में नहीं आएंगे ?''

बूढ़े ने कहा, ‘‘बेटा, हमें माफ करो। हम वेलेनटाइन डे भला क्‍या मनाएंगे ? हमारे पास एक-दूसरे को देने के लिए कोई गिफ्‍ट भी तो नहीं है।''

तभी दोनों युवक युवती अंदर बिस्‍तर तक आ गए और उन्‍होंने बूढे-बुढिया का हाथ पकड़कर गर्मजोशी से वेलेनटाइन डे विश किया। बुढ़िया ने आश्‍चर्य से कहा, ‘‘हमने तो वेलेनटाइन मनाया नहीं। फिर हमें क्‍यों विश कर रहे हो ?''

युवक और युवती ने आंखें नीची कर लीं और धीमे स्‍वर में कहा, ‘‘अंकल-आंटी, आपलोग वाटिका में नहीं आए और कोई गिफ्‍ट भी नहीं दिया। मगर आपलोगों ने आज जो वेलेनटाइन डे मनाया वह हमलोगों के वेलेनटाइन डे से कई गुना बेहतर था।''

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-ज्ञानदेव मुकेश  

फ्‍लैट संख्‍या-301, साई हारमनी अपार्टमेन्‍ट,

अल्‍पना मार्केट के पास,

न्‍यू पाटलिपुत्र कालोनी,

पटना-800013 (बिहार)

gyandevam@rediffmail.com

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