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हास्य-व्यंग्य - जलवा कुत्ता कल्चर का --- रामविलास जांगिड़

मेरी गली में कई तरह के कुत्ते रहते हैं। आपकी में भी होंगे। उनकी में भी होंगे। इस गली, उस गली। इस नगर, उस डगर। कुत्ते सर्वत्र व्याप्त हैं। जैसे नेता जी सर्वत्र व्याप्त हैं। मेरी गली में कुत्तों के तीन - चार राष्ट्रीय गुट है। सात - आठ राज्य स्तरीय गुट भी। लेकिन मुझे पता ही नहीं चलता कि कौन सा कुत्ता किस गुट का है। दूर से तो हरगिज़ पता नहीं चलता, और नजदीक से पता लगाना बिल्कुल संभव नहीं । कई बार तो ऐसा लगता है कि सभी कुत्ते गुटनिरपेक्ष हैं। बिल्कुल एक गुटी। कुत्तों - कुत्तों के बीच फर्क करना बड़ा मुश्किल होता है जैसे नेता - नेता के बीच फर्क करना मुश्किल। दूर क्या दो- चार कुत्ते पास भी आ जाएं तो आपस में भेद करना बड़ा कठिन काम है। हालांकि हर कुत्ते का अपना वोट है, अपना गुट है और अपना एक अदद वोट बैंक भी।

हर कुत्ते की अपनी अलग पहचान है। किसी की पहुंच और पूंछ पर बड़ा काला सा दाग है तो किसी के चेहरे पर। हर कुत्ते के गले में अलग तरह का पट्टा, दुपट्टा, तिपट्टा नजर आता है ; किंतु आपस में भेद करना संभव नहीं। जिस कुत्ते को सुबह किसी एक गुट में देखता हूं दोपहर तक वह किसी दूसरे गुट में पूंछ हिलाता दिखाई पड़ता है। फिर शाम तक किसी तीसरे गुट में हड्डी चबाता नजर आता है। एक कुत्ता मेरी नजर में आया। मैंने उसे पहचानने की कोशिश की। इस पहचान में मैं स्वयं अपने को भूल गया। मैंने देखा एक कुत्ता जब भी जरूरत होती मेरे पास चला आता। वह कूं-कूं करता। मैं उसे रोटी डालता, जैसे कोई वोटर अपना वोट डाल देता है। रोटी डालते वक्त मैं कोई खोज खबर नहीं लेता मैं आखिर किस कुत्ते को अपनी रोटी डाल रहा हूं; जैसे अधिकांश वोटर भी अपना वोट डालने की कोई खोज -खबर नहीं लेते हैं। कुत्ता रोटी मिलते ही चुपचाप उठ जाता है। अपने आगे वाले पंजों से रोटी उठा लेता है। कुत्ता आगे वाली टांगो को हाथ समझता है। इन्हीं आगे वाली टांगो से वह रोटी चबाता है। जब कुत्ता रोटी खाने पर आ गया तो आप चाहे जितनी लाठी मारो अगला रोटी लेकर ही छोड़ेगा। यही नहीं आपके टिफिन में से रोटी कैप्चर करके ले ही जाएगा। जैसे शास्त्र सम्मत लोग वोट केप्चर करते हैं। कुत्ता कल्चर का ऐसा ही जलवा है।

कुत्ते की पूंछ हमेशा टेढ़ी रहती है। टेढ़ी उंगली से घी निकलता है और टेढ़ी पहुंच व सीधी पूछ से काम निकलता है। लेकिन अगर कुत्ते की पूंछ सीधी हो गई तो समझा जाना चाहिए कि वह कुत्ता पागल है। नेता जी की पूंछ कभी सीधी नहीं होती है इस मामले में वे कुत्ते से भिन्न है। उनकी सीधी पूछ होती है डायरेक्ट अप्रोच।कहते हैं कि युधिष्ठिर ने कौरवों को हराने के बाद एक कुत्ते को पाल लिया था। वस्तुतः युधिष्ठिर अपने तप, सत्य व प्रेम की खपच्चियों के सहारे कुत्ते की पूंछ को सीधी करने की कोशिश में लगे रहे। परंतु कुत्ता सच्चा कुत्ता ही रहा। युधिष्ठिर अंत तक कुत्ते की पूंछ सीधी नहीं कर पाए। तब कुत्ते की पूंछ सीधी करने के चक्कर में युधिष्ठिर कुत्ते को स्वर्ग में ही ले गए ; किंतु पूंछ पाकिस्तान बनकर रह गई। सीधी होने का नाम ही नहीं । अलबत्ता युधिष्ठिर के तप, सत्य व प्रेम जरूर टेढ़े हो गए। कुत्ता तो अंत तक सच्चा कुत्ता ही बना रहता है।

लेकिन पूंछ तो पूंछ। चाहे सीधी हो चाहे टेढ़ी। ऐसे ही बड़े ही कलात्मक ढंग से अपनी - अपनी पूंछ सिकोड़े जब मेरी गली के कुत्ते सामूहिक रूप से भोंकते हैं तब लगता है कि गली में कोई जलजला आ गया है। पूरा मोहल्ला अपनी-अपनी खिड़कियों से यह कार्यक्रम देखने में लग जाता। एक बार एक कुत्ते के पीछे दूसरा, तीसरा , चौथा कुत्ता दौड़ लगा रहा था। सबसे पीछे वाला कुत्ता भी जोर से दौड़ लगा रहा था। तब एकाएक पीछे वाले कुत्ते ने अपने से आगे वाले से पूछा -' हम क्यों दौड़ रहे हैं , और कहां दौड़ रहे हैं? ' आगे वाला भी नहीं जानता था। उससे आगे वाला भी नहीं। बात जब आलाकमान कुत्ते के पास पहुंची तो उसने कहा - ' गांव के पोखर के पास बिजली के नए खंभे आए हैं। हमें उनका उद्घाटन करना है। इसलिए खबरदार जो किसी ने बीच रास्ते में मूत्र दान किया।' आलाकमान के इस 'गुट व्हिप' के बाद सभी कुत्ते वहां गए। किंतु गीले खंभों को देखने से पता लगा कि पहले ही गांव के विरोधी गुट वाले कुत्तों ने उनका उद्घाटन कर दिया था। इस बात पर मेरी गली का माहौल पूरा कुत्तामय हो गया। दोनों गुटों में जबरदस्त लड़ाई छिड़ गई। ऐसी लड़ाई में पूरे मोहल्ले का जीना हराम हो गया। हालांकि अक्सर ऐसी लड़ाई छिड़ती ही रहती। एक ही गुट में। अलग-अलग गुट में। कई बार मैंने अपनी रोटी अलग लेकर जंगल में जाकर खानी चाही। जैसे ही टिफिन खोलकर रोटी उठाई कि कुत्ता प्रकट हो गया। हर बार रोटी खाकर ही गया। आपने दी तो ली।नहीं दी तो छीनी। वोटों का भी यही सब किस्सा है। कुत्तों ने किसको छोड़ा है साहब! यही तो कुत्ता कल्चर है जनाब!

-- रामविलास जांगिड़, 18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023)राजस्थान

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