हीरानन्द सोज एक अफसाना निगार - मनजीत सिंह

SHARE:

हीरानन्द सोज 20वीं सताब्दी के एक सुलझे हुए और तरक्की पंसद शायर और मशहूर अफसाना निगार की हैसियत से जाना जाता है। वैसे तो इनकी रूचि अफसाना लिख...

हीरानन्द सोज 20वीं सताब्दी के एक सुलझे हुए और तरक्की पंसद शायर और मशहूर अफसाना निगार की हैसियत से जाना जाता है। वैसे तो इनकी रूचि अफसाना लिखने में ही रही है। इसका बुनियादी तौर पर भी अफसाना निगार ही है। उनके जीवन में प्रसिद्धि और यश आया है वो केवल ओर केवल शायरी से ज्यादा आया है। वो हमेशा नज्म, शायरी, कविता अफसाना, नसर आदि में बुलबुल की तरह चहचहाते रहे है। उनकी पहली किताब ‘नक्शगर‘ 238 सफों की है जो साया हुई है इस किताब के जरिये वो कहते है कि ‘ मैं हीरानन्द सोज जो अफसाना निगार होने का दावेदार हूं इस साहित्यिक विधा में प्रमाणित स्तर हासिल करने के लिए दो अफसाना संग्रह ‘ कागज की दीवार और साहित्य समंदर और सीप साया हुई मगर फिर भी न जाने क्यूं साहित्यिक क्षेत्रों के बतौर शायर पहचान रखता है। दरअसल मेरा कोई काव्य संग्रह प्रकाशित नहीं हुआ है। मुमकिन इस की वजह मेरे नाम के साथ जुडा हुआ उपनाम हो या वो काव्य रचनाएं जो समय समय पर साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है रेडियो में प्रसारित होती रही है। मुशायरों में जगह-जगह शिरकत भी इसकी वजह हो सकती है।

हीरानन्द सोज का सम्बंध साहित्य के उस क्षेत्र से हो रहा है जहां पर उर्दू जबान व साहित्य की वरिष्ठ हस्तियां संसार के अस्तित्व में आई है यानी इनकी पैदाईश मियावांली जो कि पाकिस्तान में है श्री टेकचन्द के यहां हुई। हीरानन्द सोज ने शिक्षण प्रशिक्षण मियांवाली से ही प्राप्त किया 10वीं कक्षा के पश्चात ये तकनीकी प्रशिक्षण के लिए लाहौर चले आए और यहीं के साहित्यिक वातावरण में रच बस गए। इनके बाद इन्होंने रेलवे में नौकरी कर ली और विभिन्न स्थानों पर निवास करते हुए अन्त में स्थाई तौर पर फरीदाबाद में स्थापित हो गए। यहीं 8 जनवरी 2002 को इंतकाल हो गया। मिंयावाली की सरजमींन से त्रिलोकचन्द महरूम जगन्नाथ आजाद मुहम्मद फिरोज शाह सलीम अहसान मुहम्मद अजमल नियाजी फारूख रोखडी और गुलजार बुखारी जैसी महान हस्तिया पैदा हुई। हीरानन्द सोज जहां उर्दू जबान व अदब के प्रेमी व आशिक थे। तो वहीं उन्हें अपनी मादरी जबान सराईकी पर भी गर्व था। वो सराईकी जबान में भी शेर कहते थे इनका काव्य संग्रह ‘सूरज मेरे आवाकूब‘ में प्रकाशित होकर अत्यधिक प्रसिद्ध हुआ इस काव्य संग्रह में जहां गजलें अपने काव्य परिपक्वता और विषय की भिन्नता तथा जबान की मिठास सुन्दरता आकर्षण गीत-संगीत का अहसास कराती है। और बहुत सी इमेजरियां पाठ के मन मस्तिष्क पर छा जाने की शक्ति रखती है तो वहीं दूसरी ओर इनकी नजमें भी अपना सानी नहीं रखती है इस तरह हम कह सकते है कि हीरानन्द सोज को जहां गजल लिखने का सम्पूर्ण दक्षता प्राप्त है तो वहीं वो उत्कृष्ट व परिपक्व नज्म कहने वाले भी है। इसी के साथ इन्होंने हम्द और नअत में भी लेखनी चलाई कुल मिलाकर सोज साहब किसी भी साहित्यिक विधा में कलम चलाते हो उनके काव्यशास्त्र में हल्केपन का अहसास नहीं होता है । जबान का रचाव मेंहदी रंग की तरह दिखाई देता है। जिसमें भावना का उफान जीवन का रहस्य और इस रहस्य तक जीवन का अर्थ निहित होता है। इनके यहां गदरी साहित्य चेतना व दृष्टिकोण पाया जाता है। काव्य की रंगीनी विभिन्न सुसज्जित महफिलों की सैर कराती है। पाठकों को आनन्द की अनुभूति होती है तो वहीं सोज साहब के काव्य में पाठक को ज्ञान विज्ञान की रोशनी से भी ओत प्रोत होता है। इन्होंने युक्त और मुक्त कविताएं और गजलें दोनों साहित्यिक ढांचों में अपनी लेखनी की कौशलता दिखाई। इनकी नज्मों का सबसे विशेष गुण यह है कि जहां वो करूणा की व दुख की बात करते है। तो इसमें केवल प्रीतम का दुख व करूणा शामिल नहीं होती बल्कि इनका दुख व करूणा समकालीन भावनाओं का चित्रण बन जाए तो समझिए के फनकार की चेतना परिपक्व और समृद्ध हो चुकी है इसका विजन सीमित नहीं है बल्कि इनकी कल्पना व चिन्तन ब्रह्मांड की सीमाओं से निकलकर असीमितता फनकार को पृथक अस्तित्व प्रदान करती है और प्रसिद्धि के उच्च शिखर पर ही है इस सन्दर्भ में कुछ शेर नमूने के तौर पर प्रस्तुत करता है।

कहां कबूल था शहरों का शोर-ओ-शर-मुझको,

शिकम की आग ने रखा है बांध कर मुझको

मेरे जमीर ने कोसा है इस कदर मुझको

कि अपने आप से लगने लगा है डर मुझको

वो जानता था सफर उसको रास कितना था

मगर वो घर से निकलकर उदास कितना था

शायद मुझे जीने का सलीका नहीं आता

हकगोई को इनाम समझता हूं अभी तक

सोज साहब छोटी और बडी दोनों बहरों में लिखते थे इनका अनोखापन यही है कि वो अपने काव्य में भर्ती की चीजें इस्तेमाल नहीं करते थे यह वजह है कि पाठक इनकी रचनाओं को पढ़कर मचल जाता है उछल जाता है। अचम्भित हो जाता है। रूक कर थोडी देर सोचता है। कि सोज साहब ने क्या बात कह दी यानी वो आदमी शायरी से लोगों को चौंकाने उछलने और सोचने पर मजबूर करते है।

सोज साहब का कलाम आजादी के रणबांकुरों को सच्ची श्रद्धांजलि देने वाला है सोज साहब आजादी के दोर में अव्वल दर्जे के गजलकार थे हीरानन्द सोज 20वीं सदी के उन महत्वपूर्ण कलमकारों में से एक थे जिन्होंने एक ओर उर्दू जबान का सेवक व दूसरी ओर गजल व नज्म दोनों तरह की शायरी में अपनी प्रतिभा उच्च अभिव्यक्ति के श्रेष्ठतम विचारों से अपने जौहर दिखाकर उर्दू जबान को बढावा दिया। उनकी नज्मों में राजनैतिक सामाजिक चेतना विद्यमान थी जिसमें धार्मिक सहिष्णुता है उसमें मुल्क और खास तौर पर दिल्ली-गंगा-जमुनी तहजीब की अमिट छाप है यह वह दौर था जब हिन्दुस्तान को आजाद कराने के लिए जंगे-ए-आजादी का जमाना पूरे उफान पर था।

सोज साहब के तीन अफसानों के संग्रह प्रकाशित होकर प्रसिद्ध हुए जिनका वर्णन पहले किया जा चुका है तीसरा अफसाना संग्रह ‘जंगल जंगल शहर‘ भी अनोखे अनुभव व अवलोकन का अहसास कराता है। जिस तरह उनकी शायरी में गहरी साहित्यिक चेतना पाई जाती है तो अफसाने भी पाठकों को चौंकाते हैं। उनकी अफसानवी जीवन का अर्थ और कशमकश दिखाई देता है। जब जीवन का अर्थ कशमकश काव्य अंश में घुलमिल जाए तो समझिये कि मनोवैज्ञानिक तकाजे स्वयं मिश्रित हो जाते हैं। इनके यहां विशेषतया सामाजिक मनोविज्ञान का बडा हस्तक्षेप पाया जाता है। कुछ अ फसानों में तो बिल्कुल ही अछूते विषय देखने को मिलते है। इसका अनुभव व अवलोकन तथा ध्यान अहसास व अनुभूति का त्रिकोण नई दिशा निश्चित करता है। ऐसी दिशा जहां फनकार की परिधि व्यापक से व्यापक होती चली जाती है। इसके अफसाने मन मस्तिष्क पर देर तक अपना प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखती है। इनके अफसाने में वही रचाव और जचाव नजर आता है। जो इनकी शायरी का विशेष गुण है हीरानन्द सोज का एक अलग अस्तित्व और अनोखा पहलू यह है कि वो किसी विचारधारा किसी आन्दोलन या कियार बात से प्रभावित नहीं हुए और न ही इन्होंने सीमा बंधनों में रहकर साहित्य की रचना की बल्कि वो अपने मनमौजी स्वभाव के अर्न्तगत सम्पूर्ण जीवन लेखनी चलाते रहे शायरी हो या उनका अफसाना लेखन इन्होंने किसी भी साहित्यिक विधा में पाबन्दियों या विचारधारा को सामने नहीं रखा जैसे कि बुनियादी तौर पर पंजाबी थे और ये पंजाबियत इनकी अफसानों में देखने को मिलती है। स्पष्ट सी बात है कि हर फनकार अपने वातावरण समाज सभ्यता और परिवेश का पोषित होता है अपने आस पास से ही वो वस्तुसामग्री प्राप्त करता है जिसे कृतित्व के रूप में पृष्ठ पटल पर उतार देता है। सोज साहब ने भी ऐसा ही किया और होता भी यही है कि शायद प्रकृति का तकाजा भी है मशहूर शायर सत्यपाल आनन्द सोज साहब के अफसाना लेखन के बारे में यूं लिखते हैं कि

बहरहाल हीरानन्द सोज जिन्दगी के बारे में एक स्पष्ट और सकारात्मक सोच रखते हुए भी प्रगतिशील जैसे किसी राजनैतिक जीवन दर्शन से जुडे नहीं। उसमें समकालीन चेतना तो है परन्तु इस चेतना की आंखों पर किसी राजनैतिक सोच की परत चढी हुई नहीं है। इससे यह तात्पर्य नहीं है कि इसका चैतनिक काफिला एक अनजानी दिशा पर यात्रा कर रहा है।

दिशा की निश्चितता इसकी उजली और सकारात्मक सोच की ऋणी है जो यथार्थ की उस परम्परा से उपजी है। जिसे आज से 70 साल पहले मुंशीचन्द और दूसरे सामाजिक यथार्थवादियों ने बढावा दिया था यह सोच हीरानन्द सोज के सभ्य स्वभाव और जीवित रवैये की धूप और हवा में पलकर जवान हुई यह सकारात्मक सोच पूंजी भी है। और अनुभव भी हर अनुभव परम्परा की उपजाऊ भूमि से फूटता है।

दर्द आशना दिल्ली जो एक शहर था पोस्टमार्टम फरिश्ते बीते लम्हों का आजाब फिर सलीब ऐसे अफसाने हैं जिनमें सोज साहब के अफसानियत को भली प्रकार देखा ओैर समझा जा सकता है। यूं तो इनकी और भी बहुत से अफसाने हैं। जो पाठकों को चौंकाते हैं। अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। इनके अफसानों की गिनती एक अच्छे अफसानो में की जाती है। जैसा कि उपर सत्यपाल आनन्द ने कहा कि हर अनुभव परम्परा की उपजाऊ मिटटी से फूटता है और यह अनुभव हमें इनके अफसानों में अच्छी प्रकार से दिखाई दे रहा है, जहां अफसानों में पंजाबीयत और सराईकी साहित्यिकता मिलकर एक दर्शन को जन्म देती है। ऐसा दर्शन जो फनकार और फनकार की जिन्दगी से जुडा भिन्न चिंतन व मनन पर आधारित होता है। जो व्यक्तित्व से ही सार्वभौमिकता के स्त्रोत फूटते हैं, जो अनुभव व अवलोकन की बुनियाद पर भी अर्थपूर्ण बन जाते हैं। सोज साहब का मामला ऐसा ही था।

कुल मिलाकर यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि हीरानन्द सोज जीवन भर सेवक की तरह उर्दू जबान व उर्दू साहित्य की निःस्वार्थ सेवा करते थे वो 20 वीं सदी के बेहतरीन कलमकार थे जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।

इनका पद विशेषत हरियाणा के हवाले से सम्पूर्ण सत्यता है कि इन्होंने उस परम्परा को संजोये रखा जिसने मूल्यों की सुनिश्चितता होती है। जिन लोगों ने सोज साहब को देखा है और जो उनसे मिले हैं, वो सब बताते हैं कि सोज साहब बहुत ही विनम्र स्वभाव और सदाचार की मूर्ति थे, जिस व्यक्ति से मिलते थे, प्रसन्नता से मिलते थे। या यूं कहिए कि इनका खमीर ऐसी मिटटी से उठा था, जहां मानवता जन्म लेती है। साथ ही इन्होंने उस परम्परा को भी कायम रखा जिसकी बुनियाद गंगा-जमुनी तहजीब पर खडी है यानी जहां वो एक श्रेष्ठ और अलग शैली के शायर व महान अफसाना निगार थे तो वहीं महान व्यक्ति भी थे लेकिन अफसोस की बात है कि जीते जी तो इसकी साहित्यिक सेवाओं को सब विद्वानों सराहा मगर न जाने क्यूं हिन्दुस्तान की मिटटी कैसी है कि समय गुजरने के साथ-साथ हम अपने बडों को क्यूं भुला देते है जरूरत है हमें ऐसे फनकारों पर काम करने की जिनके पीठ पीछे डाल दिया गया है या जान बूझकर उपेक्षित कर दिया गया नहीं वो दिन दूर नहीं जग हम अपनी विरासत सभ्यता और पूंजी को गंवा देंगे। सोज साहब परम्परागत शायरों की तरह इस जंग के मात्र दर्शन न होकर अपने कलम के जरिये इस जंग में शामिल हुए। हीरानन्द सोज के अफसाने को समझने के लिए उनके मिजाज और उनकी साहित्यिक पृष्ठ भूमि पर नजर डालना जरूरी होता है इनके अफसाने कौम के दिल में एक नया जोशो-खरोश पैदा करती है। सोज की अफसानवी साहित्यिक का एक हिस्सा रही है जिसने देश दुनिया के दिलों में मुहब्बत महजबी सहिष्णुता देशभक्ति की भावना कुर्बानी त्याग और जिन्दगी के अर्थ को अफसानों में ढाला है यहीं काम सोज साहब ने किया है और सोज साहब की नज्म और गजलों ने भी यही काम किया है कुल मिलाकर कहा जाए इसने जीने का सलीका अपनी नज्म गजल अफसानों में बेहतरीन तरीके से बताया है इनके अफसाने व नज्म का फैलाव बहुत दूर तक रहा है कौमी जिन्दगी का हर रंग इसमें निहित है सोज पे उस समाज में आंखें खोली जिसमें हिन्दू और मुसलमानों में सच्ची मुहब्बत थी नैतिक मूल्यों के प्रति सजग रहने वाले सोज का सम्पूर्ण जीवन अनुशासनमयी और व्यक्तित्व प्रभावशाली था वक्त के प्रति हमेशा पाबंद रहते थे उसने बाहरी दिखावे को कभी पास नहीं दिया। आज हम उसे याद करते है और कहते है कि चिडिया चुग गई खेत वाली कहावत सही बैठती है इस साहित्य पूंजी को हमने खो दिया आज हम उसे श्रद्धांजलि देते हुए नमन करते है।

मनजीत सिंह पुत्र श्री भूप सिंह

गांव भावड तह. गोहाना जिला सोनीपत

एम. ए. उर्दू पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: हीरानन्द सोज एक अफसाना निगार - मनजीत सिंह
हीरानन्द सोज एक अफसाना निगार - मनजीत सिंह
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/03/blog-post_11.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/03/blog-post_11.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content