वैश्विक धरोहर:-श्री काशी विश्वनाथ धाम - शैलेश त्रिपाठी

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भारत विविधताओं का देश है,यहां पर संस्कृति और संस्कार दोनों पनपते हैं।भारत का सबसे प्राचीन शहर बनारस जिसे काशी भी कहा जाता हैं। मूलरूप से इसक...

भारत विविधताओं का देश है,यहां पर संस्कृति और संस्कार दोनों पनपते हैं।भारत का सबसे प्राचीन शहर बनारस जिसे काशी भी कहा जाता हैं। मूलरूप से इसका सन्दर्भ आज से लगभग कई सौ वर्ष से है। काशी सोलह महाजनपदों में से एक है। जहां एक ज्योतिर्लिंग के साथ एक शक्तिपीठ भी है।काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ हैं। यहीं पर सन्त एकनाथजी ने वारकरी सम्प्रदायका महान ग्रन्थ श्री एकनाथ जी ने भागवत लिखकर पुरा किया और काशीनरेश तथा विद्वतजनों द्वारा उस ग्रन्थ कि हाथी पर से शोभायात्रा खूब धूम-धाम से निकाली गयी। महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में प्रमुख मंदिरों से भव्य शोभा यात्रा ढोल नगाड़े इत्यादि के साथ बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर तक जाती है।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की महिमा अवलोकन करना अत्यंत कठिन है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की भौगोलिक स्थिति अत्यंत कठिन और संकरी पथों से गुज़र कर मिलता है। बनारस में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर की भौगोलिक स्थित सतही स्थल पर व्यापक होने के साथ साथ साम्प्रदायिक सौहादर्य बने रहे इसके लिए भी चुनौती पूर्ण है।

मंदिर के उत्तर में लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर माँ गंगा विराजती है। अब बनारस पुरातन धरोहर के साथ साथ अब वैश्विक धरोहर भी बन चुका है, लगभग 239 वर्ष बाद इस अहेतुक सेवा का कार्य सम्पन्न हुआ है।अभी कुछ महीने पहले भारत मे विश्व धरोहर सप्ताह का आयोजन भी किया गया ऐसे कई भारतीय ऐतिहासिक धरोहर और भ्रमण स्थल हैं जो प्राचीन भारतीय लोगों की संस्कृति और परंपरा के प्रतीक है। भारतीय विरासत के महत्वपूर्ण स्मारकों और कलाकृतियों में से कुछ दिल्ली दरवाजा, अस्तोदीया गेट, दिल्ली का लाल किला, मानेक बुर्ज, सरदार पटेल की विरासत भवन, तीन दरवाजा, भादरा-गेट, सिद्दी सैय्यद, सारनाथ, काशी, वाराणसी के मन्दिर आदि हैं। भारत की ये विरासत और स्मारक प्राचीन सम्पति हैं इस संस्कृति और परंपरा की विरासत को आने वाली पीढ़ीयों को देने के लिये हमें सुरक्षित और संरक्षित करना चाहिये। भारत में लोग विश्व धरोहर सप्ताह के उत्सव के हिस्से के रूप में इन धरोहरों और स्मारकों के प्रतीकों द्वारा मनाते हैं। विश्व धरोहर सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की सांस्कृतिक धरोहरों और स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा के बारे में लोगों को प्रोत्साहित करना और जागरूकता बढ़ाना है। प्राचीन भारतीय संस्कृति और परंपरा को जानने के लिए ये बहुत आवश्यक है कि अमूल्य विविध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा की जाये और उन्हें संरक्षित किया जाये। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक), जिसका निर्माण इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने सन् 1777 में कराया था, के पत्थर की संरचना के मूल रुप को बचाने और संरक्षित करने के लिये लखनऊ की राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला के द्वारा एक महान प्रयास किया गया।

जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन के द्वारा शहर के 2,000 मंदिरों के आसपास की रक्षा के लिए योजना बनाई गयी है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर को भी एक धरोहर के रूप में यूनेस्को से अपील की जानी चाहिए हमारे देश में कई ऐसे स्थान हैं, जिन्हें यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के सूची में शामिल किया गया है। इन स्थानों का बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतहासिक महत्व है, इसके साथ ही यह स्थान काफी प्राचीन है। यहीं कारण है कि इनके संरक्षण का महत्व और भी बढ़ जाता है। इन्हीं में से कुछ महत्वपूर्ण भारतीय वैश्विक धरोहरों की सूची नीचे दी गयी है-

ताज महल (आगरा, उत्तर प्रदेश)

अजन्ता और एलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र)

आगरा का किला (आगरा, उत्तर प्रदेश)

सूर्य मंदिर (पुरी, उड़ीसा)

काजीरंगा (उत्तर प्रदेश)

खजुराहो के स्मारक समूह (मध्य प्रदेश)

फतेहपुर सीकरी (उत्तर प्रदेश)

सांची स्तूप (सांची, मध्य प्रदेश)

कुतुब मीनार (दिल्ली)

हुमायुं का मकबरा (दिल्ली)

लाल किला (दिल्ली)

जंतर मंतर (जयपुर, राजस्थान)।

वाराणसी भारत का एक ऐसा शहर जहां, अध्यात्म की अनूठी छटा देखने को मिलती है. कहते हैं कि यहां के लोगों के लिए यह शहर भर नहीं है, बल्कि धार्मिकता से परिपूर्ण एक सम्पूर्ण विरासत है।

शायद यही कारण है कि इसे भारत की सांस्कृतिक राजधानी तक कहा जाता है. इस शहर को जो सबसे खास बनाता है वह है गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित, काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के दिल में स्थित, इस मंदिर की महत्ता को इसी से समझा जा सकता है, एक बड़ी संख्या में न केवल देशी, बल्कि विदेशी लोग भी इसकी गंगा आरती को देखने के लिए आतुर दिखते हैं।कुल मिलाकर वाराणसी में मौजूद इस अनूठे मंदिर की जितनी चर्चा की जाये वह कम ही होगी. यह गौरवशाली भारत की महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है. हजारों सालों बाद भी इसकी प्रासंगिकता ज्यों की त्यों है. इसको नजदीक से देखने के लिए हर रोज एक बड़ी भीड़ उमड़ती है। अब देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी सदा से देश दुनिया के आकर्षण का केंद्र रही है। खुद बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ और उनकी दुलारी गंगा समेत 33 कोटि देवों की उपस्थिति के कारण इसे धर्म नगरी का रुतबा तो प्राप्त है ही सर्वधर्म सद्भाव भी सहज नजर आता है। धर्म-अध्यात्म, संगीत-कला और कण-कण धरोहरों के साथ सबसे खास बनारस का मन मिजाज, इन सबसे मिल कर तैयार हुए सांस्कृतिक गुलदस्ते की खुशबू देश-दुनिया को बार- बार अपनी ओर खींच ले आती है। धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र अब अपनी थाती को सहेजे हुए पर्यटन के आधुनिक केंद्र के रूप में आकार पा रहा है। जल-थल-नभ तक समान रूप से विस्तार पाते हुए यह इंद्रधनुषी रंग पा रहा है।

वाराणसी, अब देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी सदा से देश दुनिया के आकर्षण का केंद्र रही है। खुद बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ और उनकी दुलारी गंगा समेत 33 कोटि देवों की उपस्थिति के कारण इसे धर्म नगरी का रुतबा तो प्राप्त है ही सर्वधर्म सद्भाव भी सहज नजर आता है। धर्म-अध्यात्म, संगीत-कला और कण-कण धरोहरों के साथ सबसे खास बनारस का मन मिजाज, इन सबसे मिल कर तैयार हुए सांस्कृतिक गुलदस्ते की खुशबू देश-दुनिया को बार- बार अपनी ओर खींच ले आती है। धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र अब अपनी थाती को सहेजे हुए पर्यटन के आधुनिक केंद्र के रूप में आकार पा रहा है। जल-थल-नभ तक समान रूप से विस्तार पाते हुए यह इंद्रधनुषी रंग पा रहा है। पुराणों में उल्लेखित धर्म नगरी काशी ने हर दौर में देश-दुनिया को दिशा दी तो बदलते समय के हिसाब से खुद को तब्दील भी किया। इसमें साधन-संसाधन के लिहाज से बहुत कुछ बदला लेकिन नहीं बदली तो उसकी धार्मिकता, संस्कृति प्रियता, थातियों को सहेजे रखने का अंदाज, जिंदगी जीने का अपना खास रंग-ढंग और मन-मिजाज। केवल यह अंदाज देखने-समझने लाखों -लाख देसी-विदेशी हर साल खींचे चले आते हैं। गलियों-घाटों पर टहलते, अपनी मस्ती में मचलते विदेशियों पर कभी नजर दौड़ाइए तो इन घुमक्कड़ों में जिज्ञासु और ज्ञानपिपासु कहीं अधिक दिख जाएंगे। यह सब उनके लिए यहीं बस जाने या एक-दो दिन ठहर कर खिसक जाने की बात थी लेकिन अपनी पहचान को बरकरार रखते हुए धरोहरों का शहर हर पल बदल रहा है। काशी के गले में चंद्रहार सी सजी उत्तर वाहिनी गंगा की धार में नित उतरती सूरज की किरणों से सजी सुबह-ए-बनारस की झाकी के बीच क्रूज की सैर का सपना पूरा हो चुका है। इससे नित्य की सांध्य गंगा आरती की झांकी के साथ ही गंगा में राष्ट्रीय जलमार्ग व मल्टीमाडल टर्मिनल उद्घाटित होने के बाद अब रो-रो व फेरी सर्विस की घड़ी नजदीक आ रही है। देव दीपावली पर लेजर शो का नजारा नजर आ चुका है तो संगीत के शहर में घाटों पर विशेष पर्वो के बहाने ही सजी सजती विभिन्न प्रांतों की झांकी लघु भारत को निखारने के साथ इंद्रधनुषी रंग बिखरा रही है। अब तक श्रीकाशी विश्वनाथ, गंगा के घाट और सारनाथ तक सिमटा हाट स्पाट के विस्तार पाने से सालाना लगभग 60 लाख तक सिमटे सैलानियों की संख्या बढ़ाने के साथ ठहराव ट्रिप का दायरा भी बढ़ा रही है। उन्हें बाबतपुर से शहर की सड़कों की छटा रिझा रही है जो जल्द ही फुलवरिया होते बीएचयू तक विस्तार पाएगी। इस प्रकार यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम सनातन,पुरातन के वैश्विक धरोहर के रूप से अलग नहीं है।

लेखक परिचय-:

शैलेश त्रिपाठी

जन्म-6 अगस्त, 1992

सम्प्रति- सम्प्रेक्षक लिपिक

श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद , वाराणसी।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक 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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर 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रचनाकार: वैश्विक धरोहर:-श्री काशी विश्वनाथ धाम - शैलेश त्रिपाठी
वैश्विक धरोहर:-श्री काशी विश्वनाथ धाम - शैलेश त्रिपाठी
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