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हास्य-व्यंग्य आलेख - चौकीदार - डा. सुरेन्द्र वर्मा

शब्द, चौकीदार दो पदों से मिलकर बना है – चौकी + दार। मज़ेदार वह है जो मज़ा दे; असरदार वह है जो असर दे (करे)। लेकिन कोई चौकीदार चौकी नहीं देता। पता नहीं वह उसका क्या करता है ? उसके पास चौकी होती भी है या नहीं ? यह भी नहीं मालुम। जो भी हो, चौकीदारी करने वाला व्यक्ति चौकीदार कहलाता है। सीधी सरल सी बात हैं। किसी भी मोहल्ले में रात में पहरा देने वाले या दिन में देखभाल करने हेतु नियुक्त व्यक्ति को चौकीदार या पहरेदार कहते हैं। चौकीदार चौकी-पहरे का काम करता है। लेकिन चौकीदारी कोई सरल काम नहीं है। चौकीदारी करते समय बड़ा चौकन्ना रहना पड़ता है। चाक-चौबंद। हर तरफ निगाह रखने पड़ती है। पहरा लगाना पड़ता हैं। कहीं कोई गलत काम तो नहीं हो रहा है ? कोई चोरी-चपाटी तो नहीं हो रही है ? बहुत सतर्क रहना पड़ता है। उसे चारों तरफ निगाह रखने होती है। चौकीदार रखवाला होता है। वह “चौकी” पर तैनात रहता है। उसकी चौकी उसका वह क्षेत्र है जो चौकीदारी के लिए उसे सौंपा गया है। इस क्षेत्र की रक्षा करना उसका काम और कर्तव्य है। इतना सब होते हुए भी चौकीदार का पद कभी कोई बड़ा पद नहीं माना गया। चौकीदारी हमेशा एक अदना सी ज़िम्मेदारी समझी गई।

चौकीदार कई किस्म के होते हैं। कुछ को चौकीदारी के लिए वेतन मिलता है तो कुछ बिना वेतन लिए ही चौकीदारी करते हैं। कुछ लोग चौकीदारी को अपना धंधा बना लेते हैं और इसके लिए उन्हें वेतन मिलता है। कुछ लोग चौकीदारी प्रत्यक्षत: करते हैं तो कुछ ढंके-छिपे रूप में, चोरी से, चौकीदारी करते हैं। माँ बाप अपने बच्चों की पहरेदारी करते हैं कि वे कहीं बिगड़ न जाएं। इसके लिए वे कोई वेतन नहीं लेते। पत्नी, पति की और पति, पत्नी की चौकीदारी करते हैं और इसके लिए वे भी कोई वेतन नहीं लेते।

चौकीदार का काम सबपर निगाह रखने का है। लेकिन उसके हज़ार चौकस रहने के बावजूद भी चोर, चोरी से बाज़ भले ही आजाएं, हेरा-फेरी से बाज़ नहीं आते। अपने धत्काम के लिए अवसर की तलाश में रहते हैं। निगाह हटी और दुर्घटना घटी। और तब सारा दोष चौकीदार को ही दिया जाता है। उसके आँखों के नीचे काण्ड हो गया, और उसे पता ही नहीं चला ! ये कैसी चौकीदारी है ? ज़रूर इसमे चौकीदार की ही मिली-भगत रही होगी। बस, गली गली में शोर हो जाता है। चौकीदार चोर है। चौकीदार तो चौकीदार, चौकीदारी में उसका हाथ बंटाने वाला उसका कुता भी चोर है। ऐसे वक्त जो सचमुच चोर हैं वे साहूकार बन जाते हैं और ‘चौकीदार चौकीदार’ खेलने लगते हैं।

वैसे चौकीदार बनना किसी को पसंद नहीं होता। लेकिन लोग हैं कि चौकीदार बने बिना रहते नहीं। किसने कहा था कि तुम चौकीदार बनो। किसी ने नहीं कहा, लेकिन बन गए। तो भुगतो। मालुम था कि चौकीदारी बड़ा पहरेदारी का काम है। और पहरेदारी में कोई इज्ज़त नहीं है। फिर भी लोग बाज़ कहाँ आते हैं ? बन ही जाते हैं चौकीदार !

भारत में आजकल यह ‘चौकीदार चौकीदार’ खेल खूब खेला जा रहा है। “अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो / अस्सी नव्वे पूरे सौ / सौ में लागा तागा / चोर निकल के भागा !” चोर भागने न पाए सो जिसे देखो चौकीदार बना फिर रहा है और उसकी जो वास्तव में पहरेदारी कर रहा है, उसे चोर बता रहा है।

भारत के प्रधानमंत्री ने स्वयं को देश के चौकीदार के रूप में प्रस्तुत किया है। बड़ी बात है। आज देश के सारे चौकीदार बड़े मुदित हैं। मोद मना रहे हैं। लेकिन जो चौकीदारी को हेय दृष्टि से देखते हैं, वे मज़ाक उड़ा रहे हैं। देखो तो सही ! भारत का प्रधानमंत्री एक चौकीदार है ! लेकिन प्रधानमंत्री जी गर्व से अपने को चौकीदार बता रहे हैं और सभी को चौकीदारी करने की सलाह भी दे रहे हैं।

डा. सुरेन्द्र वर्मा

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड

प्रयागराज-२११००१

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