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व्यंग्य - अलविदा कसरत मैडम! - हरीश कुमार ‘अमित’

पिछले दिनों एक समाचार पढ़ा कि दस लाख लोगों पर किए गए अध्ययन के अनुसार बहुत ज़्यादा व्यायाम करने वाले लोग अधिक तनावग्रस्त और अवसादग्रस्त रहते हैं, जबकि बिल्कुल कसरत न करनेवाले लोग मानसिक तौर पर ज़्यादा शांत रहते हैं.

यह ख़बर पढ़ते ही हमारी तो बाँछें ही खिल गईं जनाब! दिल-ओ-दिमाग़ पर न जाने कब से पड़ा बड़ा भारी बोझ एक झटके में उड़न-छू हो गया.

हमें तो याद नहीं पड़ता कि बचपन से लेकर इस अधेड़ उम्र तक हम कभी कसरत के ‘क’ तक भी पहुँचे हों. यह बात अलग है कि पत्र-पत्रिकाओं और रेडियो-टी.वी. से कसरत करने के फ़ायदों के बारे में ख़ूब बातें पता चलती रहती थीं. इस ज्ञान के आधार पर हम भी गाहे-बगाहे दूसरों को कसरत करने के फ़ायदों के बारे में उपदेश देने से चूकते नहीं थे, मगर ख़ुद कसरत करने की गुस्ताखी करने की ज़ुर्रत हमने कभी नहीं की.

ऐसा भी नहीं कि कसरत करने के लिए हमें किसी ने अब तक कहा ही न हो. सच पूछिए तो ख़ासकर पिताजी और श्रीमती जी ने तो कसरत करने के फ़ायदों के बारे में हमें इतनी ज़्यादा नसीहतें दी हैं कि उन लोगों में से किसी एक को भी देखने पर हमें बाकी सब बातें भूलकर बस कसरत की ही याद आ जाया करती है. इसी मारे हम हमेशा बड़े अपराधबोध से ग्रस्त रहा करते थे कि कसरत करने के नाम पर एक बड़ा शून्य (बिग ज़ीरो) हैं हम.

दूसरों की सलाहों को सुनते-सुनते हम भी बीच-बीच में कसरत करने का शेड्यूल बनाने की सोचने लगते, मगर हर बार बात न षेड्यूल बनाने से आगे सरकती और न कसरत करने के लिए हम एक इंच भी इधर-उधर सरकते.

मगर जब से कसरत न करने के फ़ायदों के बारे में छपा समाचार हमारी नज़रों के सामने से गुज़रा है, हमारे ज्ञानचक्षु पूरी तरह खुल गए हैं. हम तो आसमान में उड़ने लगे हैं जैसे. अब तक मन-ही-मन सोचा करते थे कि कम-से-कम शनिवार-इतवार की छुट्टी वाले दिन ही कसरत करना शुरू कर दें. उस सोच को इस समाचाररूपी क्लोरोफॉर्म ने बहुत गहरी नींद सुला दिया है. साथ ही

अब हम भी गहरी नींद सोने लगे हैं - सुबह उठकर कसरत न करने की ग्लानि जो अर्न्तध्यान हो गई है.

आप भी, जनाब, कसरत मैडम को कहिए अलविदा और ठाठ से ज़िन्दगी गुज़ारिए. इससे मानसिक स्वास्थ्य ज़्यादा बढ़िया रहेगा. कसरत न करने से बचे हुए समय को हमारे लिखे ‘उच्चस्तरीय’ लेख पढ़ने में लगाइए. इससे हमारे मानसिक स्वास्थ्य में और श्रीवृद्धि होगी. और अगर हमारे ‘उच्चस्तरीय’ लेख आपके सिर के ऊपर से निकल जाने लगें, तो ‘आराम बड़ी षै है मुँह ढक के सोइए’ वाली बात पर अमल कीजिए. है न आइडिया कमाल का! अब इस कमाल के आइडिये को जानकर ख़ुशी के मारे उछलना-कूदना शुरू मत कर दीजिएगा क्योंकि ऐसी उछल-कूद भी कसरत की ही श्रेणी में आती है. इसलिए... समझ गए न!

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संक्षिप्त परिचय

नाम हरीश कुमार ‘अमित’

जन्म मार्च, 1958 को दिल्ली में

शिक्षा बी.कॉम.; एम.ए.(हिन्दी); पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

प्रकाशन 800 से अधिक रचनाएँ (कहानियाँ, कविताएँ/ग़ज़लें, व्यंग्य, लघुकथाएँ, बाल कहानियाँ/कविताएँ आदि) विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित

एक कविता संग्रह ‘अहसासों की परछाइयाँ’, एक कहानी संग्रह ‘खौलते पानी का भंवर’, एक ग़ज़ल संग्रह ‘ज़ख़्म दिल के’, एक लघुकथा संग्रह ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’, एक बाल कथा संग्रह ‘ईमानदारी का स्वाद’, एक विज्ञान उपन्यास ‘दिल्ली से प्लूटो’ तथा तीन बाल कविता संग्रह ‘गुब्बारे जी’, ‘चाबी वाला बन्दर’ व ‘मम्मी-पापा की लड़ाई’ प्र‍काशित

एक कहानी संकलन, चार बाल कथा व दस बाल कविता संकलनों में रचनाएँ संकलित

प्रसारण लगभग 200 रचनाओं का आकाशवाणी से प्रसारण. इनमें स्वयं के लिखे दो नाटक तथा विभिन्न उपन्यासों से रुपान्तरित पाँच नाटक भी शामिल.

पुरस्कार (क) चिल्ड्रन्स बुक ट्रस्ट की बाल-साहित्य लेखक प्रतियोगिता 1994,

2001, 2009 व 2016 में कहानियाँ पुरस्कृत

(ख) ‘जाह्नवी-टी.टी.’ कहानी प्रतियोगिता, 1996 में कहानी पुरस्कृत

(ग) ‘किरचें’ नाटक पर साहित्य कला परिष्‍द (दिल्ली) का मोहन राकेश सम्मान 1997 में प्राप्त

(घ) ‘केक’ कहानी पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान दिसम्बर 2002 में प्राप्त

(ड.) दिल्ली प्रेस की कहानी प्रतियोगिता 2002 में कहानी पुरस्कृत

(च) ‘गुब्बारे जी’ बाल कविता संग्रह भारतीय बाल व युवा कल्याण संस्थान, खण्डवा (म.प्र.) द्वारा पुरस्कृत

(छ) ‘ईमानदारी का स्वाद’ बाल कथा संग्रह की पांडुलिपि पर भारत सरकार का भारतेन्दु हरिश्‍चन्द्र पुरस्कार, 2006 प्राप्त

(ज) ‘कथादेश’ लघुकथा प्रतियोगिता, 2015 में लघुकथा पुरस्कृत

(झ) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी-व्यंग्य प्रतियोगिता, 2017 में व्यंग्य पुरस्कृत

(ञ) ‘राष्‍ट्रधर्म’ की कहानी प्रतियोगिता, 2018 में कहानी पुरस्कृत

(ट) ‘ज़िंदगी ज़िंदगी’लघुकथा संग्रह की पांडुलिपि पर किताबघर प्रकाशन का आर्य स्मृति साहित्य सम्मान, 2018 प्राप्त

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सम्प्रति भारत सरकार में निदेशक के पद से सेवानिवृत्त

पता 304, एम.एस.4 केन्द्रीय विहार, सेक्टर 56, गुरूग्राम-122011 (हरियाणा)

ई-मेल harishkumaramit@yahoo.co.in

व्यंग्य 8038769674459013335

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