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नौ काव्य : कवि : लखनलाल माहेश्वरी प्रस्तुति: हर्षद दवे.

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१. मोदी आयो देश न पायो  मोदी आयो देश न पायो रे सब पार्टियाँ ने धुल चटावण मोदी आयो रे देश की दिशा व दशा बदलवा न मोदी आयो रे सब का मन में...

१. मोदी आयो देश न पायो 

मोदी आयो देश न पायो रे
सब पार्टियाँ ने धुल चटावण मोदी आयो रे
देश की दिशा व दशा बदलवा न मोदी आयो रे
सब का मन में छायो मोदी आयो रे.             मोदी आयो रे...

सब सोच रह्या भारत में स्थायी सर्कार आवे रे
यहाँ गठबंधन से काम नहीं चाले रे
मोदी ने अपनी लहर से सब बदल दियो रे
भारत ने स्थिर सर्कार देकर भाग्य बदल दियो रे.         मोदी आयो रे

कांग्रेस, बसपा, सपा ने पछाड़ दियो रे
बिहार ने आजाद करा दियो रे
कई राज्यों में कांग्रेस को पत्तों साफ़ कर दियो रे
जो कभी हार्या नहीं वे भी हर को मुंह देख लियो रे.     मोदी आयो रे

चुनाव में जो बांता आई झूठो कर दियो रे
गुजरात को मोडल भारत में दिखे दियो रे
भाजपा नेताओं को भी ऐसी जित दिखे दियो रे
प्रधानमंत्री की दावेदारी ने सच्चो कर दियो रे.        मोदी आयो रे.

वाराणसी जाकर जनताने दिखा दियो रे
जनता के दिल में जगह बने लियो रे
वाराणसी में कमल खिलाय दियो रे
गंगा व विश्वनाथ को आसरो पा लियो रे.             मोदी आयो रे

मोदी को आयो देख पाकिस्तान घबरा रह्यो रे
पाकिस्तान कह रह्यो बाप रे बाप मोदी आयो रे
अमेरिका भी मोदी से हाथ मिलावण न आयो रे
सभी देश भारत से दोस्ती बढावण न आया रे.         मोदी आयो रे.

भारत ने ऊंचों उठावा न मोदी आयो रे
अब मोदी की परीक्षा की तयारी को समय आयो रे
प्रेम लखन इश से प्रार्थना करे मोदी न सफल बना दियो रे
आवता वर्षों में भारत को विश्व में चमके दियो रे.

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

२. मोदी आयो रे
 
मोदी आयो रे मोदी आयो रे विरोध्या को भी भाग्यो  रे
देश को आगे बढ़ावा न मोदी आयो रे.

भ्रष्टाचार कम करवा न, कालाधन लावा न
मोदी ने आगे लायो रे, लायो रे.

नाम सुन मोदी को भारत में खुशियाँ छाई रे
हर जन मानस के मन में आशा आई रे.

जो मोदी से दूर रहता वह भी पास में आया रे
मोदी की हिम्मत बढ़ावा न सब साथ आया रे.

सुवयोँ संभल गयो, बाजार संभल गयो
मोदी अच्छो आयो रे, सब के मन में भायो रे.

देश की लाज बचावण न मोदी न करनो पडसी काम
भारत को सपनों साँचो होसी देश की बचेगी लाज

धर्म-कर्म सब अलग रहसी मोदी को देसी साथ
भारत सोने क चिड़ियाँ बन जासी आवो सब साथ.

मोदी को काम देखकर दुनिया अंख्या फाड़ रही
जो मोदी को चाहतो नहीं वो भी आशलगां रही.
मोदीजी ने देश की खातिर गहरो कारणों पड़ती काम
देशवासियों की इच्छा पूरी करवा ने सबते लेटो है साथ

प्रेम लखन इश से करे बिनती मोदी को दे साथ
देश ने आगे बढ़ा कर रखे भारत माँ की लाज.

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

३. मोदी मतवालों

भारत भूमि को रखवालो ओ मोदी मतवालों
भारत को मान बढायो ऊँचो दर्जो दिल्वायो
बी.जे.पि. को रखवालो आगे बढानेवालो
नाम है नरेंद्र मोदी भारत भूमि को ऊँचो रखवालो...    ओ मोदी...

पाक हो या चीन किसी से न डराने वालो
देश की रक्षा करने वालो मोदी मतवालों...

अमेरिका में धूम मचाई देशको मान बढ़ावन वालो
सब देशों में भरा की धूम मचावन वालो...        ओ मोदी

सब विपक्षी डाल एक हो गया नहीं डराने वालो
इन सब को पानी पिलाने वालो             ओ मोदी

सेना ने ऊंचा उठावान सब काम करने वालो
सेना को रेफाल दे मान बढ़ावन वालो ...        ओ मोदी

भारत की सच्चाई से अवगत कराने वालो
भारत की लाज बचवान मरमिटने वालो...        ओ मोदी

मोदी का कामा न देख मुलायम हो गयो मतवालों
भरी सभा में कह दियो ओ मोदी है मतवालों     ओ मोदी

प्रेमलखन कहे मोदी को जनता फिर लानेवाली
मोदी को राज सब ने अच्छो लागन वालो         ओ मोदी

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

४. दोहे ...

१). दुनियां सब मतलब की हो गई नहीं आवे विचार
    दुःख में साथ कोई देवे नहीं करे अपनो विचार.

२). जो सुख चाहे जिव को भज ले हरी को नाम
    बडो पर थारो हो जावे गो मत कर इतनो विचार
    मत कर इतनो विचार आगे बढ़ने को रख विचार
    प्रेम लखन कहे हरी थारो साथ देसी सब आने को तैयार.
३).  मन में दुःख मत ले इश न भजले
     थारा सब दुःख मिट जासी सुख आ जासी
     सुख आ जासी इस पर कर तू विचार
     कहे प्रेमलखन सब थारो हो जासी.
४).  तू अकेलो नहीं रह्यो थारे दो दो हाथ
     हाथों में ताकत पैदा कर सब आसी थोर साथ
     सब आसी थारे साथ काम बन जासी
     प्रेमलखन कहावे मन में किया विचार पूरो हो जसी
५).   सब चिंता छोड़कर कर ले अपनो काम
      कहे प्रेम्लाखन सब अपने हो जायेंगे मत कर अभिमान.
६).   थोडा दिन को जिणा है सबने ले ले साथ
      कहे प्रेम्लाखन अपना विचार त्यारकर हो जावो सब के साथ

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

५. नारी है बलशाली है

नारी है बलशाली है धीरज धारण करनेवाली है
मत समझो इसे कमजोर ये ज्ञान देनेवाली है
नारी आरक्षण की मत समझो वह आरक्षण देनेवाली है
उसके ही आरक्षण से हम बने बलशाली हैं.

नारी ममता की महारानी है ऊंचा उठानेवाली है
हमें उस पर गर्व है लाज उसकी बचानी है
नारी शक्तिशाली है झाँसी की महारानी है
अंग्रेजों के छक्के छुदानेवाली वह भारत की नारी है.

जिस माँ ने हमें जन्म दिया उसकी सेवा करनी है
यदि हमें ऊंचा उठाना है तो नारी को माँ समझनी है
नारी को अब माँ कह दिया वह पीछे हटनेवाली नहीं है
कर परिवार की सेवा उसकी लाज बचानी है.

करो उसका सम्मान तो परिवार को सम्मान मिलेगा
जो नहीं करे नारी का सम्मान उसे निचे गिरना है
हम फिर क्यों नहीं करे सम्मान जब वह शक्ति हो जाती है
करें हम नारी का सम्मान हमें सम्मान मिल जाता है.



नारी के बल पर ही हम आगे बढ़ते जाते हैं
उसका करो विश्वास हमें सब कुछ मिल जाता है
प्रेम्लाखन का कहना है नारी ही शक्ति की खान है
जो चाहो कल्याण तो नारी का सम्मान बढ़ाना है.
                     लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.
    
६. चार रोटी खाता हूँ हरि के गुण गाता हूँ

चार रोटी खाता हूँ हरि के गुण गाता हूँ
कोई मिल जावे तो राम राम करता हूँ
कोई मुझे कुछ भी समझे दास कहलाता हूँ
मुझे कुछ आता नहीं हरि के गुण गाता हूँ... चार रोटी

जब कोई दुनियां में आता कुछ समझ नहीं पाता है,
बड़ा होने पर वादा भूल जाता है दुनिया में रम जाता है.
मैं मुझसे ही पूछता हूँ ऐसा क्यों होता है?
सब मैं भूल जाता हूँ हरि के गुण गाता हूँ... चार रोटी

कोई कुछ भी समझे बीते समय को याद करता हूँ
उन बैटन को बार बार याद कर रोता हूँ
मन को समझाना चाहता हों पर मन समझता नहीं है
इसलिए मुझे सबसे दूर रहना पसंद आता है... चार रोटी

मैं किसी को कुछ कहना चाहता नहीं हूँ
पर भूल में बातें बाहर निकल आती है
प्रेम्लाखन कहे किसी का भला करना चाहता हूँ
पर भलाई का बदला बुराई से मिल जाता है... चार रोटी
                     लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

७. म्हारो संकट काटो रे हनुमान थारो ध्यान धरू

म्हारो संकट काटो रे हनुमान थारो ध्यान धरु
थे आवो झटपट म्हारे धाम थाणे याद करू.
     मेरी मझधार में है नैया आ कर पार लगाओ
     थाकी करू जय जयकार टे जल्दी से आवो ... म्हारो संकट...
जो हनुमंत को ध्यावे वाको दुःख सारो मिट जावे
जो गावे मंगलाचार उनकी जय जयकार करावे...म्हारो संकट ...
     यो अनजानी को लालो जाड करे जब आवे
     सबका संकट टेल थे बोलो जय जयकार. ... म्हारो संकट...
सीता को पतों लगायो रामजी को संकट मिटायो
जार लंका के माय रक्षसा न मार भगायो. ... म्हारो संकट...
     सोने की लंका जलाई पूंछ समुद्र में जा बुझाई
     कर आयो रामजी को काम सीता की निशानी लाइ ... म्हारो संकट ...
सीता को संकट काट्यो उको जीवन लियो बचे
प्रेमलखन थांसू करे विनती सब को संकट से बचे...म्हारो संकट...

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

८. ओ माता रानी ओ शेरा वाली

ओ माता रानी ओ शेरावाली कर दो न बेडा पार
आया हूँ तेरे द्वार सुन लो मेरी पुकार.         ओ माता रानी...

तुम हो सब की सुनाने वाली, बात समझने वाली
आवो न मेरे द्वार, सुन लो अब तो मेरी पुकार.   ओ माता रानी...

रोज रोज जो तुमको ध्यावे, रोज रोज मनावे
अब तो कर दो न, उसका बेडा पार.         ओ माता रानी...

तेरे द्वारे जो भी आता आपसे करे पुकार
उसका कर दो न पूरा काम                 ओ माता रानी...

तेरे द्वारे जो भी आवे, हाथ जोड़ विनती करे
उसका हो जावे पूरण काम.                 ओ माता रानी...

तेरे द्वारे सब कोई आवे दर्शन पावे अपार
ख़ुशी ख़ुशी लौट जावे, दर्शन है तेरे महँ.         ओ माता रानी...

मैं भी आवू तेरे दर्शन पावू, बिनती करू बारम्बार
दुःख-दारिद्र मिटाने वाली, करा दो न बेडा पार     ओ माता रानी...

प्रेमलखन थासू करे विनती सब का कर दो न बेडा पार
हाथ जोड़कर शीश नवावे आवे बारम्बार.         ओ माता रानी...

                    लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.
    
९. ओ त्रिकूट पर्वत वाली माता

थाको सांचो है दरबार थाकी महिमा अपरम्पार
ओ त्रिकूट पर्वत वाली माता म्हारे घर आवो जी.
त्रिकूट ऊपर बनो देवरों महिमा अति भरी
तेरे दर्शन करने दूर दूर से आवे नर और नारी
जय माताजी जय माता जी गता भक्त दौडया आवे
उनकी सुन ओ पुकार दर्श दिखाओ जी.             ओ त्रिकूट...

हर दिन है थारो मेलो भीड़ लगे अति भरी
थारा दर्शन करवा खातिर जयकारा अतिभारी
थाका गावे मंगलाचार करियो उनका बेडापार
उनको बुलाओ अपने पास सुनलो पुकार जी         ओ त्रिकूट ...
इन्द्रासन जब हिल गयो इन्दर भाग्यो आयो
महिषासूर न मार इन्द्रासन वापस दिलायो
इन्द्रपुरी में छाई खुशियाँ अपार गुण गावे जी
माता सुनलो पुकार जल्दी जल्दी आवो जी             ओ त्रिकूट ...

प्रेमलखन थासू करे विनती भक्ति देवो अपार
थारा गुण गवा दिनरात म्हारे घर आवो जी
त्रिकूट पर्वत वाली माता म्हाने बुलावो जी
थे दर्शन देवा न म्हारे घर आवो जी             ओ त्रिकूट ...    
    
                     लखनलाल माहेश्वरी,     पूर्व व्याख्याता
                     ६०७/३ प्रेमनगर, फाईसागर रोड, अजमेर.

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रचनाकार: नौ काव्य : कवि : लखनलाल माहेश्वरी प्रस्तुति: हर्षद दवे.
नौ काव्य : कवि : लखनलाल माहेश्वरी प्रस्तुति: हर्षद दवे.
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