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पुस्तक समीक्षा: मॉरीशसीय हिंदी नाट्य साहित्य और सोमदत्त बखोरी

हिंदी साहित्य का संसार विपुल एवं व्यापक है। वैश्विक स्तर पर हिंदी में सृजनात्मकता का बोलबाला है और साहित्य की विविध विधाओं में रचनाएँ प्रकाशित होकर साहित्य भंडार में वृद्धि कर रही हैं। भारत से बाहर अनेक देशों में प्रवासी भारतीय अपने देश की सांस्कृतिक पहचान भाषा और संस्कृति को आत्मसात कर उसमें रम कर गौरवान्वित महसूस करते हैं, इसके साथ-साथ विदेशों के अनेक शैक्षणिक संस्थाओं में हिंदी एवं भारतीय कला एवं संस्कृति का अध्ययन-अध्यापन किया जा रहा है। भारतीयों के विदेश-प्रवास के अनेक कारण हैं जैसे-व्यापार/शिक्षा/ उपार्जन । हम यहाँ पर भारतीयों के उपार्जन के संदर्भ में प्रवास पर विचार करें तो पाते हैं कि 18 वें सदी के आरंभिक वर्षों में ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अंतर्गत भारत के विभिन्न क्षेत्रों ( जिनमें प्रमुख रूप से उत्तरप्रदेश/बिहार/ पश्चिम बंगाल/ तमिलनाडु/आन्ध्रप्रदेश ) से भारतीय मजदूर गन्ना/कोको/कॉफी/नारियल आदि के ब्रिटिश, फ्रांसीसी और डच सरकारों द्वारा चलाए जा रहे बागानों/ कृषि उत्पादन उपक्रमों में काम करने के लिए शर्तबंदी मजदूर अथवा गिरमिटिया मजदूर के रूप में विश्व के अनेक देशों (मॉरीशस/फ़िजी/त्रिनिदाद एवं टोबेगो/गयाना/सूरीनाम/दक्षिण अफ्रीका आदि देशों ) में भेजे गए। इन मजदूरों ने विषम परिस्थियों में शोषण और उत्पीड़न को झेलते हुए कठिन परिश्रम किया और अपनी भाषा और संस्कृति का वैश्विक स्तर पर रोपण किया। आज इन्हीं मज़दूरों की पीढ़ी अपने अपने देश में हिंदी एवं भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा के साथ भारतीय जीवन-मूल्यों को जी रहे हैं।

आज प्रवासी भारतीय, हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में सृजनात्मक कार्य कर हिंदी के भंडार को समृद्ध कर रहे हैं। भारत के बाहर मॉरीशस में हिंदी लेखन की परंपरा समृद्ध एवं बहुमुखी है। आज हिंदी के लिए मॉरीशस के हिंदी साहित्यकार हिंदी गौरव के प्रतीक हैं जिनमें अभिमन्यु अनत, प्रह्लाद रामशरन, ब्रजेन्द्र कुमार भगत ‘मधुकर’, मुकेश जीबोध,लोचन विदेशी, पूजानन्द नेमा, भानुमती नागदान, मुनीश्वर लाल चिंतामणी,उदयनरायन गंगू, सोमदत्त बखोरी, रामदेव धुरंधर,वीरसेन जगा सिंह, राज हीरामन,सूर्यदेव सिबोरत, हेमराज सुंदर,राजेन्द्र अरुण, बिनोदबाला अरुण जैसे अनेक नाम शामिल हैं।

‘मॉरीशसीय हिंदी नाट्य साहित्य और सोमदत्त बखोरी’ डॉ.नूतन पाण्डेय द्वारा संपादित एवं स्टार पब्लिकेशन प्रा.लि. दिल्ली से प्रकाशित है। इस पुस्तक में डॉ.नूतन ने मॉरीशस के हिंदी नाट्य साहित्य के उद्भव और विकास की शोधपरख रूप में जानकारी दी है । मॉरीशस के हिंदी लेखक और ‘पोर्ट लुई हिंदी परिषद’ के संस्थापक श्री सोमदत्त बखोरी के नाट्यकर्म का परिचय विस्तार से दिया है और इस पुस्तक में आपने सोमदत्त बखोरी के अप्रकाशित 11 नाटकों (बहू ,सीता स्व्यंबर,बहाना,घर और घरनी,निराश प्रेमी,वसंत बहार, कुर्बानी की राह पर, बिसुनी की सगाई,गुमान की गोली,जंग में रंग,गांधी बलिदान) को संकलित कर स्तुत्य कार्य किया है। मुझे विश्वास है कि यह पुस्तक मॉरीशस हिंदी साहित्य और प्रवासी हिंदी साहित्य के अनुसंधानकर्ताओं के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी और संदर्भ के रूप में प्रयुक्त होगी।

डॉ.दीपक पाण्डेय

केंद्रीय हिंदी निदेशालय

पश्चिमी खंड -7,रामकृष्ण पुरम

नई दिल्ली 110066


Email – dkp410@gmail.com

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