नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - "कली किसलय की प्रेम कहानी" - शोभा गोस्वामी

"कली किसलय की प्रेम कहानी"


एक कली तरु कि ऊंची शाखा पर इठलाती थी। जिस दिन उस को यह एहसास हुआ कि वह कितनी आकर्षक है, उसी दिन से प्रफुल्लित रहती थी कभी इतलाती, कभी लहराती झूम झूम कर आन्दित होती थी। हुस्न पर गुमां करना तो शायद उसने समय से पहले सीख लिया था। नव यौवन पर गुरूर था उसको ,भंवरे उसके आसपास मंडराते थे।

एक किसलय कली के समीप उसके सानिध्य को महसूस करता था। खामोशी से उसको निहारा करता था। दोनों एक ही समय अंकुरित हुए थे दोनों नव यौवन को स्पर्श कर रहे थे किसलय मन ही मन उस कली से मोहब्बत करता था इसलिए कली को निहार कर मन ही मन गुनगुनाता था-

मोहब्बत होती है क्या

      यह मुझको मालूम न था ,

आपको देखकर महसूस 

                       सा होने लगा।                                                                                    

कली को भी एहसास था कि किसलय उसको एक टक निहारा करता है पर वह तो अपनी हुस्न की अदा से मदमस्त रहती थी। जब कोई भंवरा उस कली के पास मंडराता था किसलय का दिल कहता-

शिरकत करा है दिल ने

            सिर्फ आपके लिए,

उल्फत कि नजर डालिए

               सिर्फ हमारे लिए।

एक दिन कली को एहसास हुआ कि यह

भंवरे तो मुझसे सच्ची मोहब्बत नहीं करते यह सिर्फ मेरे खिलने का इंतजार कर रहे हैं और यह किसलय मेरे समीप होकर भी मुझको स्पर्श नहीं करता बस एक टक निहारा करता है कली किसलय की प्रेम भरी नजरों को महसूस करने लगी थी और वह भी मन ही मन उसे प्रेम करने लगी। अब प्रियतम किसलय प्रेयसी कली थी। दोनों एक दूसरे को प्यार भरी नजरों से निहारा करते थे। किसलय गुनगुनाता था-

रुसवा न करना दिल से तसव्वुर हमारा,

       दिल है नादां यह मजबूर हमारा।

समय व्यतीत हो रहा था दोनों मोंह-मुग्ध हो रहे थे। कली खिल कर फूल बन रही थी और किसलय पल्लव दोनों एक दूसरे से सच्ची मोहब्बत करते थे ।कली गुनगुनाया करती थी-

दीवानी तेरे प्यार में हो गई रे पिया ,

छूकर मेरे मन को पारस कर दिया।

किसलय तो जैसे कली से बात करने का बहाना ढूंढा करता था। उसकी खुशबू से मदहोश रहता था और गुनगुनाता था-

कयामत आपके नूर ने ऐसा ढाया,

हम चैन खो बैठे दिल अपना गंवाया।

कली पर भी प्यार का सुरुर था और वह जवाब देती थी-

जो कदम उठा रही हूं

       वह कदम बहक रहा है,

मिली तुमसे क्या निगाहें

         मेरा दिल धड़क रहा है।

पर क्या मिलन है तो विरह तो जरूर होगा सच्चा प्यार किसी को मिलता नहीं दोनों के बिछुड़ने का समय आ गया। एक भंवरे ने उस का रस्वादन कल लिया। कली फूल बन गई ,एक दिन एक माली आया और फूल को तोड़ कर ले गया दो प्रेमी बिछड़ गए किसलय का दिल टूट गया उसके दिल से आवाज आई-

खुदा तूने यह कहर क्यों ढाया,

इश्क था मेरा क्यों मुझ से गंवाया।

पल्लव बन गया किसलय नि:शब्द सब देखता रहा उस की मोहब्बत फनां हो गई। उसने जीने की आस छोड़ दी। एक दिन एक पवन का झोंका आया उसको अपने साथ उड़ाकर ले गया और एक पवित्र प्यार का अंत हो गया।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.