"भक्तयांजलि"(मुक्तक काव्य-संग्रह)–समीक्षा–कु0 विमला शुक्ला

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"भक्तयांजलि में अवगाहन" "वाक्यम रसात्मकम काव्यम" अर्थात आचार्य विश्वनाथ ने रसात्मक वाक्य को ही "काव्य"कहा है। ...

"भक्तयांजलि में अवगाहन"

"वाक्यम रसात्मकम काव्यम" अर्थात आचार्य विश्वनाथ ने रसात्मक वाक्य को ही "काव्य"कहा है। कविता ही रसानुभूति कराती है। चाहे दुख का क्षण हो, चाहे सुख का। प्रत्येक क्षण में स्वत: ही कविता का जन्म हो जाता है, जब भाव, लय, छन्द,ताल आदि के द्वारा सुरमय हो जाता है, तभी कविता बन जाती है और जब हृदय स्थल पर रसवाण द्वारा कविता का प्रहार होता है, तब वह हमें रोमांचित कर देती है। अलौकिक आनन्द से आप्लावित कर देती है।

       छन्द-विधा के समान  भाव-सम्प्रेषणता अन्य विधाओं में यदि दुर्लभ नहीं होती, तो अतिशय रूप में भी नहीं होती। छन्द-शासित काव्य युगों-युगों तक अपने महत्त्वपूर्ण स्थान पर प्रतिष्ठा बनाये रखता है, क्योंकि छन्द-शासित काव्य कालजयी होता है।

        केवल रस, ध्वनि, रीति, अलंकार, गुण आदि के द्वारा निर्मित शब्द-योजना ही कविता बनकर हृदय को आन्दोलित नहीं करती, अपितु कविता में विद्यमान सरलता एवं सहजता का भाव भी हृदय को आन्दोलित कर देता है।

        आज समाज शिथिलता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहा है। ऐसे समय में कुछ साहित्य-सर्जक अपनी रस-माधुरी से जन-जन को आप्लावित कर रहे हैं, इसी श्रृंखला में डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" का नाम बड़े ही सम्मान एवं सहृदयता से लिया जाता है। डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" ने पुरानी परिपाटी को नूतन परिवेश प्रदान किया है।

        माँ भारती की वरद पुत्री डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" की ये "भक्तयांजलि" भक्ति में डूबी अनुपम कृति है। मैंने इनका मुक्तक काव्य-संग्रह "भक्तयांजलि" का गहन अवलोकन किया। इसमें कुल 60 रचनाएँ हैं, जो भक्ति-भावना से ओत-प्रोत हैं, जिसमें घनाक्षरी, सवैया, गीत एवं लोकगीत आदि विधाओं पर रचनाएँ की गयीं हैं।

      इसमें कवयित्री की, देवी-देवताओं के विविध रूपों के प्रति श्रद्धा, भक्ति एवं विश्वास के पूर्णरूपेण दर्शन होते हैं। इनकी प्रत्येक रचना को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि मानों हम भक्ति के अथाह सागर में गोते लगा रहे हैं। डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" की रचनाओं को पढ़कर ऐसा लगता है कि इन्होंने अत्यन्त मनन-चिन्तन किया है और यह उचित भी है, क्योंकि एक महान मनीषी के लिए मननशीलता अतिशय अनिवार्य गुण होता है।

          नख-शिख-सौन्दर्य-वर्णन में सूक्ष्मतिसूक्ष्म वर्णन भी कवयित्री की दृष्टि से बच नहीं पाया है। भावों की सम्प्रेषणता को मानवीकरण के रूप में प्रस्तुत करना डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" की विशिष्ट विशेषता रही है। कवयित्री के काव्य में भक्तिरस की सहज धारा अवतरित होकर प्रवाहित हो रही है। इन्होंने खड़ी बोली में ब्रजभाषा के कवियों के समान छन्दों का प्रयोग करने का महत्त्वपूर्ण कार्य किया है, जो अत्यन्त श्लाघनीय है। कवयित्री ने अपने काव्य को सहजता एवं सुष्ठता से परिपोषित किया है। इनकी रचनाओं में भाषा एवं अलंकारों का सहज आकर्षण है, सभी रचनाएं स्वाभाविक,  लयात्मक, यथा स्थान पर प्रसाद, माधुर्य एवं ओज इन तीनों गुणों से परिपूर्ण हैं।

        कवयित्री ने अपने काव्य-संग्रह में सर्वप्रथम गौरीसुत गणपति जी का वन्दन करके भारतीय साहित्य-परम्परा का श्रेष्ठतापूर्ण निर्वाह किया है।

   "नाटे, मोटे, छोटे हैं ये गजराज आनन के,

सुन्दर, चपल, लम्बोदर को नमन है"

देवों के देव महादेव शिव जी को कवयित्री कैसे विस्मृत कर सकती है ? वह भगवान शिव को नमन करती है, जो आशुतोष अवढरदानी हैं। जिनकी आराधना से सहज ही इच्छित फल की प्राप्ति हो जाती है, जिनके तन पर भस्म शोभायमान है, जिनकी जटा-पाश में सुरसरि भगवती गंगा क्रीड़ा करती रहती हैं, जिनके वक्षस्थल को सर्पों एवं मुण्डमालाओं के आभूषण सुशोभित करते हैं, जो तीन नेत्रों वाले हैं, भाँग एवं धतूरा जिन्हें अत्यन्त प्रिय हैं, ऐसे पंचमुखी भगवान शिव को नमन है–

"आदिदेव महादेव भंग को चढ़ाने वाले,

  पञ्चमुख महादेव शिव को नमन है"

      कवयित्री डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" ने राम, कृष्ण, हनुमान, सूर्य, समस्त देवी-देवताओं की, सभी माता स्वरूपा नदियों की स्तुति,वन्दना करके स्वयं को धन्य किया है।

       कवयित्री का शब्द-जगत एवं भाव-जगत अत्यन्त व्यापक है। डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" कारयित्री प्रतिभा की अत्यन्त धनी है। इनकी रचनाओं की भाषा प्रांजल, शब्द-योजना ध्वन्यात्मक, बिम्बविधान सुरुचिपूर्ण है। भक्तिरस का प्राधान्य होने के साथ-साथ श्रृंगार एवं शान्त रस का प्रयोग औचित्यपूर्ण ढंग से किया गया है।

       शब्दालंकार एवं अर्थालंकार का प्रयोग अतिशय शोभनीय है। मुख्य रूप से उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, अनुप्रास, पुनरुक्त एवं मानवीकरण अलंकारों के द्वारा कवयित्री की रचनाएँ श्रेष्ठता के उच्चतम शिखर पर पहुँच कर ब्रह्मानन्द की अनुभूति कराती हैं। इनका यह काव्य-संग्रह पठनीय एवं जीवनोपयोगी है।

         अध्यात्म हमारे जीवन के लिए अत्यन्त आवश्यक है, जो पल-पल हमारे जीवन को सुवासित करता है। नव जीवनी शक्ति का संचार करता है और जीवन जीने की ललक पैदा करता है।

      अस्तु, कवयित्री डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" का यह मुक्तक काव्य-संग्रह "भक्तयांजलि" अपनी सुगन्ध से दसों दिशाओं को सुगन्धित करता हुआ, जन-जन को आह्लादित करता हुआ, परमानन्द की अनुभूति कराता हुआ, भक्ति के अथाह सागर में सभी को डुबकी लगवा रहा है और लोगों के कण्ठों का हार बन कर साहित्य-जगत में सहर्ष स्वागत, सम्मान एवं प्रतिष्ठा के शिखर का चुम्बन करता हुआ नज़र आ रहा है।

        कवयित्री डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" अपनी यशस्वी लेखनी के साथ प्रगति के मार्ग पर सतत अग्रसर रहकर चतुर्दिक यश, वैभव प्राप्त करती रहें।इन्हीं शुभ कामनाओं के साथ–

समीक्षक, लेखिका एवं साहित्यकार


    कु0 विमला शुक्ला

लखीमपुर-खीरी (उ0प्र0)

कॉपीराइट–लेखिका कु0 विमला शुक्ला

नाम

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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: "भक्तयांजलि"(मुक्तक काव्य-संग्रह)–समीक्षा–कु0 विमला शुक्ला
"भक्तयांजलि"(मुक्तक काव्य-संग्रह)–समीक्षा–कु0 विमला शुक्ला
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