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"काव्यमंजरी"(साझा काव्य संकलन)–समीक्षा–डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु" "एक विहंगम दृष्टि"

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सम्पादक श्री सुरेश "सौरभ" जी की जीवटता, कार्यकुशलता एवं लेखनी की गतिशीलता से साहित्यिक महकमा चिर-परिचित है। श्री सुरेश "सौरभ" जी कई पुस्तकों का सम्पादन कार्य कर चुके हैं। इनकी लेखनी समाज के प्रत्येक वर्ग पर, प्रत्येक क्षेत्र की स्थितियों पर, समाज में फैले भ्रष्टाचार पर सतत चलती रही है। सत्य को निडरतापूर्वक उद्घाटित करती हुई अग्रसर रहती है इनकी लेखनी । चाहें चतुर्दिक फैली हुई रिश्वतखोरी हो, भ्रष्टाचार की धधकती हुई ज्वालाएँ हों, चाहें किसी वर्ग विशेष के प्रति उपेक्षा भरी दृष्टि हो। राजनीतिक घटनाएँ हों, चाहें सामाजिक कुरीतियाँ।

सुरेश "सौरभ" जी की कलम, कहानी, कविता, लेख, उपन्यास, सम्पादकीय कार्य, किसी न किसी माध्यम से बेबाक़ चलती हुई यथार्थता को उजागर करती रहती है।

       इस "काव्यमंजरी" में भी सम्पादक ने अनेक स्थितियों को उज़ागर किया है। होमगार्ड का 5, 5 रुपये में बिक जाना, बड़े-बड़े विद्यालयों में, संस्थानों में पहुँच, जान-पहचान, जुगाड़, पैसों की मारामारी, किसी कार्य के लिए कार्यालय में बार-बार चक्कर लगवाना, अपशब्दों का प्रयोग करना, सरकारी विद्यालयों की स्थिति एवं सरकारी शिक्षकों की लापरवाही, कामचोरी आदि का सफलतापूर्वक सटीक चित्रण किया है।

            सम्पादक ने जहाँ एक तरफ सरकारी स्कूलों में अधिकतर शिक्षकों के अपने कर्तव्यों के निर्वहन में कर्तव्यहीनता का चित्रण किया है, तो वहीं दूसरी तरफ कुछ शिक्षक अपनी कर्तव्यनिष्ठा, जीवटता, सत्यता, लगन, जी तोड़ मेहनत एवं ईमान का दामन दृढ़ता से थामकर अपना कार्य करने में लेशमात्र भी पीछे नहीं रहते।

         "काव्यमंजरी" में अनेक नामचीन ख्यातिप्राप्त एवं कुछ अल्प ख्याति प्राप्त कवियों की रचनाओं का समावेश है, जिसमें गीत, ग़ज़ल, कविता, छन्द, मुक्तक आदि विविध विधाओं का समागम है। इसमें समस्त रचनाएँ उच्चकोटि की स्तरीय रचनाएँ हैं, जो पाठकों को निरन्तर आह्लादित करती रहती हैं।

          अस्तु, मैं "काव्यमंजरी" के सम्पादक श्री सुरेश "सौरभ" जी को साधुवाद ज्ञापित करती हुई शुभकामनाएं प्रेषित करती हूँ।

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डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"

कवयित्री, लेखिका, समीक्षक, गीतकार, कहानीकार, साहित्यकार

   114, महराज-नगर

लखीमपुर-खीरी (उ0प्र0)


कॉपीराइट–लेखिका डॉ0 मृदुला शुक्ला "मृदु"

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