नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

हनुमान मुक्त का व्यंग्य - पेट में दर्द

पेट में दर्द

तहसीलदार जी यथा स्थान बैठे थे। मुझे देखा तो पूछा, क्यों नॉनसेंस इस समय यहां कैसे आया?

मैंने कहा ,"तहसीलदार जी, मैं तो वैसे ही घूमने आ गया था लेकिन यहां ऑफिस में इस समय इतनी

चहल-पहल देखी तो अंदर घुस आया।

क्यों चहल-पहल होने पर पाबंदी है क्या?

नहीं पाबंदी कैसी ?

ऑफिस तो ऑफिसर पर निर्भर करता है ,जहां खड़े हो जाओ वहीं ऑफिस शुरू हो जाता है।

'यही तो मैं कह रहा हूं ।लोग बाग परेशान ज्यादा है ।"काम इतना है कि ऑफिस टाइम में पूरा होता ही नहीं। लोगों की सहूलियत के लिए ऑफिस टाइम बाद काम करना ही पड़ता है।

इतनी ही देर में कॉमन सेंस कहीं से वहां आ टपके। देखते ही तहसीलदार जी की बांछें खिल गई । बोले , "कॉमन सेंस यह नॉनसेंस आज कुछ ज्यादा ही बक बक कर रहा है जरा इसको संभाल।"

कॉमन सेंस ने इधर-उधर देखा, सारे कार्मिक अपने-अपने स्थान पर बैठकर काम कर रहे थे ।तहसील में रजिस्ट्री कराने वाले लोगों का हुजूम था। सारा हुजूम एक कोने में इकट्ठा था।

उसने कोमनसेंस से कहा, आज तहसील में कैसे आया? नॉनसेंस के पास वही पहले वाला जवाब था।

घूमने

"मैं शाम को खाना खाकर कहीं भी घूमने निकल जाता हूं आज यहां आ गया ।

"ठीक है, घूम लिया ।अब तो घर जाओ इन्हें काम करने दो ।

"मैं कौन सा इन्हें काम करने से रोक रहा हूं ।खूब काम करो नॉनसेंस बोला।

तहसीलदार जी सहित कोने में खड़ा हुआ सारा हुजूम उसके खड़े रहने मात्र से अपना काम नहीं कर पा रहा था ।कॉमन सेंस इस बात को अच्छी तरह समझ रहा था ।उसने एक व्यक्ति को इशारा किया। वह व्यक्ति इशारों की भाषा पढ़ने में माहिर था ।तुरंत समझ गया। नॉनसेंस के पास जाकर बोला, भैया मेरे पेट में बहुत तेजी से दर्द हो रहा है मुझे किसी डॉक्टर के पास ले चलो।

नॉनसेंस उसकी बात सुनकर हड़बड़ा गया ।उसके समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या जवाब दें ,उसके चेहरे पर उसने ऐसा क्या देखा कि वह व्यक्ति सारे हुजूम को छोड़कर उससे डॉक्टर के पास ले जाने की बात कर रहा है। नॉनसेंस में कॉमन सेंस नहीं था वह दुनियादारी नहीं जानता था। उसे कौन बेवकूफ बना रहा है उसे नहीं पता लेकिन उसमें संवेदना थी वह उस व्यक्ति को लेकर तुरंत डॉक्टर के पास चल दिया।

रास्ते में नॉनसेंस ने उससे पूछा ,"भैया तुम्हारे पेट में इतना तेज दर्द क्यों हो रहा है ।वह बोला," तुम्हें देख कर।

मतलब?

मतलब कुछ नहीं। वैसे ही। अभी शाम को खाना खाकर चला था ,पता नहीं जाने क्या हुआ कि पेट में दर्द शुरू हो गया।

डॉक्टर नॉनसेंस के साथ आए व्यक्ति को अच्छी तरह पहचानता था। उसे देखते ही बोला," अरे खान साहब आज कैसे आना हुआ ?आज फिर पेट में दर्द शुरू हो गया।

खान साहब ने चुप्पी साध ली। डॉक्टर के पास बैठते हुए बोला।

भला हो इनका।जो मुझे आपके पास लेकर आ गए। मैं तो तहसील में खड़ा था ,अचानक इनको देखकर तेजी से पेट में दर्द हो उठा।

डॉक्टर सारा माजरा समझ गया। नॉनसेंस की ओर मुखातिब होकर बोला।" आप बैठो, मैं अभी इनका इलाज करता हूं।

1 घंटे में आराम मिल जाएगा।

डॉक्टर ने अपना काम शुरू कर दिया ।नॉनसेंस पूरे सेवा भाव से उस पेशेंट के अटेंडेंट का काम कर रहा था।

उधर तहसील में नॉनसेंस के जाते ही काम में तेजी आ गई । 10 बीघा जमीन के बीचो-बीच रास्ता दिखाकर भूखंडों को असिंचित भूमि दिखाते हुए करोड़ों की जमीन के विक्रय के कागजात क्रेताओं ने कुछेक लाख में दिखा दिए ।सभी काम के एक्सपर्ट बैठे थे। क्रेता को लाखों रुपए का फायदा हो रहा था ।नंबर दो की रकम नंबर 1 मे हो रही थी।तहसीलदार से लेकर स्टांप विक्रेता, पटवारी, रजिस्ट्री बाबू ,वकील सहित अन्य सभी कार्मिक तेजी से अपने अपने काम में लगे हुए थे ।

ऑफिस समय में होने वाली वास्तविक कीमत की साधारण रजिस्ट्री पर उनको 2 फ़ीसदी मिलता था। यह टाइम बाउंड वर्क था आज ही काम होने पर इस पर मिलने वाला मेहनताना भी पहले से बाउंड था । मुश्किल से डेढ़ घंटे में सारा काम हो गया । कॉमन सेंस ने खान साहब को फोन कर दिया। फोन आते ही उनके पेट का दर्द गायब हो गया । वे नोनसेंस से बोले ,"मैं ठीक हूं पेट दर्द खत्म हो गया है। तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद। तुम अगर चलना चाहोतो चलो वरना मैं तो जा रहा हूं ।

खान साहब तेजी से तहसील की ओर रवाना हो गए । नॉनसेंस खान साहब को जाते हुए पीछे से देखता रह गया ।डॉक्टर के चेहरे पर नॉनसेंस को देखकर मुस्कान आ गई।

‌हनुमान मुक्त

93, कांति नगर

मुख्य डाकघर के पास

गंगापुर सिटी(राज)

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.