नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

हनुमान मुक्त का व्यंग्य - ट्रांसफ़र पॉलिसी

मंत्री जी के पास ट्रांसफर करवाने और ट्रांसफर रुकवाने की बहुत सारी दरख्वास्त आई थी। किसी की मां बीमार थी, किसी का बाप। कोई दिल का मरीज था, कोई दिमाग का। किसी को बच्चों की परवरिश के कारण बच्चों के पास रहना था ।किसी को खुद की देखभाल के लिए बच्चों के पास रहना था। किसी को पत्नी के पोस्टिंग प्लेस पर रहना जरूरी था तो किसी को पति की पोस्टिंग प्लेस पर ट्रांसफर करवाना था ।किसी की आंख का ऑपरेशन हुआ था तो किसी के कान का।

सबकी अपनी अपनी वाजिब समस्याएं थी कोई भी गैर वाजिब काम नहीं करवाना चाहता था। सरकार का काम संकट मोचन का था सब अपने अपने संकटों से बचने के लिए सरकार से गुहार कर रहे थे।

मंत्री जी ने अपने पी ए से कहा ,"इन सब एप्लीकेशंस को रद्दी की टोकरी में डाल दो।" यह सब देखना हमारा काम नहीं है यह पता लगाओ ,इनमें से कौन कौन से ऐसे लोग हैं जिन्होंने हमें वोट दिया है।

" हम सिर्फ अपने लोगों की बातों को सुनेंगे। पराया पराया ही होता है और अपना अपना ही। जिन्होंने हमारा साथ दिया है उनका ही हम साथ देंगे आलतू फालतू बातों को पढ़ सुनकर समय जाया नहीं करो।"

पीए ने मंत्री जी के आदेशों की पालना की। फालतू दरख्वास्तो को एक कोने में डाल दिया ।मंत्री जी के आदेशानुसार जो काम के आवेदक थे उनके साथ लगे सिफारशी पत्रों को उन्होंने पढ़ना शुरू किया। एक पत्र के साथ लगे सिफारशी पत्र में लिखा था" इनके बाप दादा हमारी पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता रहे हैं। पार्टी द्वारा किए गए विभिन्न आंदोलनों में उन्होंने भाग लिया था रेल रोकी थी धरने प्रदर्शन किए थे और तत्कालीन सरकार ने उन्हें जेल में भी भिजवाया था"

पीए अन्य पत्रों को भी पढ़ता जा रहा था इनमें से कुछ आवेदक सरकार की जाति के थे तो कुछ ने सरकार बनाने के लिए अपना तन ,मन ,धन समर्पण किया था और अब भी आवश्यकता अनुसार समर्पित करने को तैयार थे ।पीए ने सारगर्भित शब्दों में एक संक्षिप्त नोट बनाकर मंत्री जी के सामने रख दिया। मंत्री जी ने संक्षिप्त से नोट पर संक्षिप्त सी नजर डाली और पीए को कहा हम जो कहते हैं उसे नोट करो और इस ट्रांसफर पॉलिसी का अच्छा खासा प्रचार करो।

सरकार को बदस्तूर चलाने के लिए ट्रांसफर किया जाना और नहीं किया जाना अत्यंत आवश्यक है ट्रांसफर किए जाने के और नहीं किए जाने के अलग-अलग कारण है जिन कारणों को आवेदकों ने अपनी दरखास्त में बताया है वे इस पॉलिसी के अंतर्गत नहीं आते हैं । ट्रांसफर पॉलिसी में निम्न कारण समाहित है।

1जब भी सरकार चाहे ट्रांसफर किया जाना है ट्रांसफर किया जा सकेगा।

2 जब भी ट्रांसफर कराने वाली चाय या ना चाहे ट्रांसफर किया जा सकेगा या नहीं किया जा सकेगा।

3 जब भी कार्मिक बीमार हो या उसकी माताजी पिताजी या बच्चा बीमार हो या कोई भी बीमार ना हो तो भी ट्रांसफर किया जा सकेगा या नहीं किया जा सकेगा।

4 किसी को एक स्थान पर अधिक समय हो गया हो या नहीं हुआ हो तो भी ट्रांसफर किया जा सकेगा या नहीं किया जा सकेगा।

5 ट्रांसफर किसी कारण या अकारण के किया जा सकेगा या नहीं किया जा सकेगा।

6 सरकार बिना किसी लिंग भेद , जाती प्रजाति, के ट्रांसफर कर सकेगी या नहीं कर सकेगी।

7 ट्रांसफर होने या नहीं होने के लिए आप की उपलब्धि काबालियत या प्रतिभा का होना या नहीं होना आवश्यक नहीं है।

पीए ने मंत्री जी की बनाई ट्रांसफर पॉलिसी की प्रेस मे विज्ञप्ति जारी कर दी है अब इसी पॉलिसी के तहत ट्रांसफर किए जाएंगे सरकार कोई भी बने पॉलिसी हमेशा यही रहेगी।

हनुमान मुक्त

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.