चंद्रभान सिंह मौर्य की कविताएँ

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बैल राज की कथा एक समय में बैल राज का कथा बहुत गौरवशाली था हर कोई उनको पूजे और उनका है श्रृंगार करें खुरों से धरती की माटी मथ सबका है उ...

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बैल राज की कथा

एक समय में बैल राज का
कथा बहुत गौरवशाली था
हर कोई उनको पूजे
और उनका है श्रृंगार करें
खुरों से धरती की माटी मथ
सबका है उद्धार किया,
हल-नागर को खींचकर
धरती का उदर पसीजकर
अन्न का सौगात दिया
सबका है उद्धार किया,
सोचो अगर ना होते बैल राज
दाने-दाने को हम होते मोहताज।
पर देखो दस्तूर समय का
भूल गए हम बैल राज को
जिसने हमें है अन्न दिया
हमने उनको क्या दिया?
करवट समय का बदलते ही
भूल गए हम बैल राज को
छोड़ दिया गुमनाम रास्तों पर,
लड़ा दिया धर्म के नाम पर,
भिड़ा दिया प्रतिस्पर्धा के खेल में,
रंग दिया राजनीति के रंग से,
कितने बदल गए हैं हम
क्या यही है मानव धर्म?


गंध

गंध है हर जगह
कहीं अधिक
कहीं कम पर
गंध है सब जगह
आते जाते वक्त
परेशान करती है
आखिर क्यों?
उस गंध से
इतनी तकलीफ है,
किसी के लिए वही घर है
उसी में सुबह और शाम
पूरी दुनिया गंध से
भरी पड़ी है
किसी के लिए सुगंध है
किसी और के लिए दुर्गंध
सुबह होती है
उसी एहसास से
भले हर वक्त
जीने में गंध महसूस हो
हर नया आदमी
उस गंध से जुड़ा है
"सबकी गंध एक है"
आखिर कौन सी
वह गंध है?
माटी की गंध;
मानवता की गंध;
मनुष्यता की गंध;
जिसमें एक
जिजीविषा है
एक तड़प है
फूल बनकर
गंध देने की।।


चंद्रभान "भानु"


नागार्जुन
साधारण से प्रतिरूप में
असाधारण व्यक्तित्व लिए हुए
  हमारे बाबा नागार्जुन
जिन्हें देख कर कोई
सोच में पड़ जाए
इतनी खुरदरी और नुकीली
लेखनी है किसकी
  उनकी विचार धारा

बिल्कुल जनमानस के

ह्रदय कंठ से उमड़कर

फैल जाती है दूर-दूर तक
ऐसे थे हमारे बाबा।
बाबा को बहुत भाता
  जब कोई उन्हें बाबा
था कह कर पुकारता
  यह थी उनके बड़प्पन
की पहचान
  बहुत भाता था

72 चूल्हे का स्वाद

यायावर जिंदगी की कथा रही
जीवन से जिया और फिर

उसी को लिखकर विस्तार दिया
एक ऐसे यात्री की कथा
जो हर किसी को बार-बार जानने
को लालायित और मजबूर करदे
  उनका समय काफी डामाडोल

उतार-चढ़ाव भरा रहा पर
बाबा जूझते रहे संघर्ष करते रहे
बहुत कुछ अपने समय से 
और कुछ स्वयं से जूझते रहे
नए गगन के सूर्य को अपनी
आभा से आलोकित करते रहे
शासन की बंदूक से लड़ते रहे
मास्टर के दुख से जूझते रहे
अकाल की अकड़न से समझौते करते रहे
जीवन से पर हार नहीं माना अपने समय से
  कुछ ऐसे थे हमारे प्रगतिशील जन बाबा।।

सब अपने

अनुभव करता हूं मैं
यह खेत-खलिहान सब
हमारी वास्तविक जमीन है
जिसमें हमने स्वयं को खपाया है
जिस मिट्टी में स्वयं को साना है
कई जन्मों से हम इसमें गूंथे हैं
कई सूत्रों से हम इससे जुड़े हैं
इन चित्रों में तुम भी हो
इस समस्त गगन-अंबर में
वास है तुम्हारा
इन खेतों की हरियाली में
हिरण की भांति उछल- कूद रहे हैं

हम इस खेत की भूमि से हटकर
  खुद से उचट जायेंगे हम
हमें जीना है घास की ढेरों में
हमें खेलना है उन पशुओं के पगहे से

हमें खोजना है स्वयं की जमीन को

जिसके बिना अस्तित्व नहीं किसी का

हम बीज हैं इस जमीन के
अंकुरित होने का प्रयास कर रहे
ताकि फल-फूल सके,
छांव दे सके,
शीतलता दे सकें
यही तो ध्येय है जीवन का।

पहले और अब
कितना बदल गया है जमाना
पहले आने पहले पाने की अंधी दौड़ में

बहुत आगे होकर भी क्यों

लगता है कहीं छूटते जा रहे हैं

पीछे स्वयं से
भूल गए हैं रिश्तो के मर्म को
संवेदनाएं कुंठित होने लगी है
अब वह पुराना वाला लगाव

देखने को आँखें तरस जाती है
दादी ठीक ही कहती है
पहले तो ऐसा होता था
हमारे समय में तो ऐसे होता था
और अब सब घालमेल है
  सब मिलावट है सब दिखावटी

और बनावटी है
आखिर क्यों ? यह सवाल है

खुद से कैसे सब कुछ इतना

तेजी से बदल गया
  पहले सी सुबह अब कहां गई
पहले सा  निर्मल जल

किधर चला गया

पहले सी शीतल ठंडी हवाएं

कहां खो गयी
क्यों इतना प्रचंड आग उगल रहे हैं हम?

आखिर क्यों हमारी संवेदनाएं

अपने अतीत से सबक नहीं लेती

संतोष ,त्याग ,परोपकार

इन शब्दों का असर

आज क्यों नहीं दिख रहा
क्या इतना बेअसर बेरहम हो गए हैं हम

आओ बूढ़ी दादी की

गूढ़ बातें पर थोड़ा ठहर कर

सोचने का प्रयास करते हैं
  पहले पहले सी कहानियां कहां खो गई
पहले सी लो रिया कहां सो गए
अब बहुत तेज चलने लगे हैं हम
आगे ही आगे निकलने लगे हैं हम
कहीं भीड़ के कुंभ में बिछड़ने लगे हैं हम
अब स्वयं से दूर निकलने लगे है हम।

आओ बैठकर विचार कर ले हम
कहीं समय निकल ना जाए और
तब सोचते ही सोचते रह जाएंगे हम।


संसाधन के नैतिकमूल्य
हम बदल रहे हैं
हमें चिंता नहीं है
हम भूल गए हैं
हमें याद नहीं है
अब याद करना होगा
सबको दिलाना होगा
याद कि हम बहुत दोहन
कर रहे हैं धरती की
अमूल्य निधियों का
जिनका अस्तित्व हमारी
वजह से संकट की ओर
बढ़े जा रहा हमारी जरूरत
चाहत बनती जा रही
जिसका बदला चुका रही
प्रकृति का सौंदर्य,
यह संसाधन, सोखने का
हक हमें किसने दिया
आखिर कौन है? वह
जो इसके प्रति नैतिक हो
संवेदनशील हो और सबको
मंथन करने की ओर अग्रसर करें
यह धरती करोड़ों वर्षों की
संघर्ष का प्रतिरूप है
जिसकी कोख में
अपार निधियां समाहित है
जिसे सभी को एक
नैतिक दृष्टिकोण से देखने
समझने की जरूरत है
आखिर इतिहास गवाह है
संसाधन के महत्त्व का
यह सबकी जिम्मेदारी है
हम धरती को फलित
और पोषित करके
समृद्ध बनाएं चलो
संसाधन की जरूरत को
जरूरत ही समझें
चाहत ना बनाएं।

"भानु "

चिड़िया की आंखें
  देखी है नजदीक से
  चिड़िया की आंखें
रंग बिरंगी प्यारी-प्यारी
  चिड़िया की आंखें
किसी की बड़ी
किसी की छोटी
किसी की गोल
बिंदी सी सुरमई आंखें
देखी है नजदीक से
  टिकुली सी आंखें
देखत है टुकुर टुकुर
कभी इधर तो कभी उधर
  फुर फुर करके
तैरती है आकाश में
डुबकिया लगाती आकाश में
गोते लगाती आकाश  जल में
आंगन में आती
हमें नई सुबह की
आगाज सुनाती
  देखी है नजदीक से
चिड़िया की आंखें।।


छत्तीसगढ़ में
अभी शुरू हुआ था
एक नए प्रवास का सफर
बहुत प्रफुल्लित था मन
एक नई जमीन पर जमने को
शुरुआत कुछ कठिन सी रही
थोड़ा समय लगा वहां की
आबो हवा को महसूस करने में
समय बीतता गया ,
दिन गुजरते गए 
भाने लगी छत्तीसगढ़ की धरती
रास आने लगे  वहां के लोग
सुकून मिलने लगा सांस लेकर
मन की चिंताएं दूर होने लगी
सोचने का समय अब शुरू होता है
कुछ बेहतर करने का दौर
अब शुरू होता है
कुछ नवाचार प्रयोग कर दिखाने का दौर
अब शुरू होता है
बच्चे मन के सच्चे
खेलने लगे थे मुझमें
और मैं उन सब में
प्यार सा हो गया
कविताओं की महक से
नित कुछ लिखने की जिज्ञासा
सोने नहीं देती
सोचता हूं सोए तो कुछ लिखकर
जागता हूं रातों को
रात के सच की गहराई में उतर कर
कुछ सवालों के जवाब ढूंढता हूं
न जाने कब मिलेगी मंजिल
न जाने कब आएगा वह दौर
जब मेरी यात्रा पूरी तरह सार्थक होगी
मुझे बहुत रास आ रहा है प्रवास
दक्षिण कोसल का
मुझे रास आ रहा है प्रवास
छत्तीसगढ़ का।


परिचय- चंद्रभान सिंह मौर्य का साहित्यिक उपनाम "भानु" है| 18 सितंबर 1994 को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में जन्मे है| वर्तमान में छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद ब्लाक में रहते हैं | जबकि स्थाई पता - दीनदयालपुर जिला वाराणसी है | आपको हिन्दी, भोजपुरी, संस्कृत, अँग्रेजी, छत्तीसगढ़ी, सहित अवधी, ब्रज, खड़ी बोली, भाषा का ज्ञान है| उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाले चंद्रभान की पूर्व शिक्षा- बी. ए.( हिन्दी प्रतिष्ठा ) और एम. ए. ( हिन्दी ) है| वर्तमान में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन (छत्तीसगढ़) में एसोसिएट के पद पर कार्यरत है| सामाजिक गतिविधि में शिक्षा में नवाचार, बाल साहित्य और छत्तीसगढ़ी स्थानीय शब्दकोश को लेकर क्रियाशील है| लेखन विधा में कविता, कहानी, नाटक, शिक्षा और सामाजिक सरोकार से जुड़े लेख और पुस्तक समीक्षा तथा स्वतंत्र समीक्षा करते है| आपकी विशेष उपलब्धि शिक्षक प्रशिक्षक और समाज सेवक के रूप में है| आपकी लेखनी का उद्देश्य साहित्य के विकास को आगे बढ़ाने के साथ - साथ शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार व प्रयोग तथा सामाजिक समस्याओं से सभी को रूबरू कराना है| आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक- नागार्जुन, निराला, प्रेमचंद, दुष्यंत कुमार और रामधारी सिंह दिनकर है| आपके लिए प्रेरणा पुंज- नागार्जुन है| अपने राष्ट्र और हिन्दी भाषा के प्रति मेरे विचार- "हिन्दी नहीं है केवल एक भाषा, यह तो है बड़े सपने की भाषा, हिन्दी ही वह द्वार है जो अभिव्यक्ति के खतरों को उठाने से पीछे नहीं हटती||


चंद्रभान सिंह मौर्य

एसोसिएट, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ 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रचनाकार: चंद्रभान सिंह मौर्य की कविताएँ
चंद्रभान सिंह मौर्य की कविताएँ
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