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बंधन - विनोद सिल्ला की कविताएँ

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1.
बंधन

बंधा हुआ इंसान
अनेक बंधनों में
जिन बंधनों ने
खत्म कर दिया
इंसान का व्यक्तित्व
जाति-धर्म
भाषा-क्षेत्र
व अन्य बंधनों को ही
मान लिया इसने
समूचा व्‍यक्‍तित्व
ताउम्र नहीं तोड़ पाया
इन बंधनों को
अगर तोड़ पाता
तो हो जाता मुक्त
यही है
वास्‍तविक मुक्‍ति

-विनोद सिल्‍ला©

2.
इधर-उधर की मिट्टी

ऐ! हवा
ये मिट्टी जो तुम
साथ लाई हो
ये यहाँ की
प्रतीत नहीं होती
तुम चाहती हो मिलाना
उधर की मिट्टी
इधर की मिट्टी में
और इधर की मिट्टी
उधर की मिट्टी में
तभी तो लाती हो
ले जाती हो
सीमा पार मिट्टी
लेकिन कुछ ताकतें हैं
इधर भी
उधर भी
जो नहीं चाहती
इधर-उधर की मिट्टी
आपस में मिले

-विनोद सिल्‍ला©

3.
नशे में चित

मेरा शहर है विख्यात
नहरों की नगरी के नाम से
आज मैं घूमते-घूमते
पहुँचा नहर पर
पानी लड़खड़ाता-सा
तुतलाता-सा
होश गवांकर बह रहा था

बहते-बहते
पानी संग बह रहे थे
प्‍लास्‍टिक के खाली
डिस्‍पोजल गिलास-प्‍लेट
चिप्स-कुरकरे के खाली पैकेट
शराब व खारे की
प्‍लास्‍टिक की खाली बोतलें
जो फैंके गए हैं
प्रयोग के बाद

थोड़ा आगे बढा तो
सजी थी महफिलें
थोड़े-थोड़े फांसले से
नहरों के दोनों ओर

लेकिन हैरत ये है कि
शराब लोग पी रहे हैं
नशे में चित
प्रशासनिक अमला
और
कानून व्यवस्था है

-विनोद सिल्‍ला©

4.
मुसाफिर

मुसाफिर हूँ मैं
जन्‍म से लेकर
आज तक हूँ
सफर में
सफर आरंभ में था
बड़ा सुहाना
ज्यों-ज्यों बढ़ा आगे
आए अनेक
गति अवरोधक
लगे कितने हिचकोले
जैसे-तैसे
पूरा कर चुका हूँ
सफर का उत्तरार्ध
बाकी सफर
तय करने के लिए हूँ
कृत संकल्प
करूंगा सामना
बाकी के
गति अवरोधों का
मैं हूँ तैयार
बाकी के
हिचकोले खाने को
करूंगा सहर्ष पूरा
जीवन का सफर
मुसाफिर हूँ
पहुँचुंगा मंजिल पर
अवश्‍य

-विनोद सिल्‍ला@

5.
कविता

कम शब्दों में अधिक वर्णन
कविता है
ठेस लगी तो दुख का वर्णन
कविता है
भावनाओं का आकर्षक वर्णन
कविता है
शब्दों का तरंगित होना
कविता है
शब्दों का रौद्र हो जाना
कविता है
अनायास ही गुनगुनाना
कविता है
शब्दों का अनुशासित होना
कविता है
शब्दों का बहुआयामी होना
कविता है
शब्दों का दिल में उतरना
कविता है
गागर में सागर भरना
कविता है

-विनोद सिल्‍ला©

6.
भूमिका

तुम
बखूब निभा सकते हो
स्वयं की भूमिका
लेकिन अफसोस
तूने खो दिया
स्वयं का व्यक्तित्व
औरों की भूमिका
अदा करने में
कभी तुम पर
हावी रहा
धर्मगुरुओं का व्यक्तित्व
राजनेताओं का व्यक्तित्व
या किसी अन्य
प्रभावशाली का व्यक्तित्व
कर दी तूने हत्या
स्वयं के व्यक्तित्व की
निभाते-निभाते
औरों की भूमिका

-विनोद सिल्‍ला

7.
बहार

न बैठ
बहार आने के
इंतजार में
उठ और लग जा
इस प्रयास में
कि बहार लानी है
और हाँ निसंदेह
बहार आएगी
तेरे प्रयासों से
ही आएगी
उस बहार का मजा
आज तक की
तमाम बहारों से
अनूठा होगा
वह बहार होगी
अद्वितीय

-विनोद सिल्‍ला©

8.
अनिश्‍वरवादी

ईश्‍वर की
शपथ लेकर
करते हो ऐलान
संविधान की
अनुपालना का
विधी अनुसार
कार्य करने का
अगले रोज से ही
रख देते हो ताख पर
संविधान को
पूरे पाँच साल तक
करते हो अवमानना
संविधान की
तुम्हारी करतूतों से
होता है प्रतीत
या तो ईश्‍वर
है ही नहीं
या फिर तुम हो
सबसे बड़े
अनिश्‍वरवादी

-विनोद सिल्‍ला©

9.
कुसूरवार कौन है

मेरा गांव जो बहुत ही
प्यारा होता था
चौपाल जो बच्चों की
किलकारियों से गूंजती थी
शामलात में कबड्डी-कुश्ती के
पहलवानों की
ललकार गूंजती थी
गांव के तालाब पर
सुबह-शाम
पूरा गांव घूमने जाता था
खेतों के रास्ते
आने-जाने वाले
बैलों के गले की घंटी से
संगीतमय होते थे
फाल्गुन, सावन व
अन्य अवसरों पर
महिला संगीत
सुनाई दे जाता था
पर आज सब मौन है
कुसूरवार कौन है

-विनोद सिल्ला

10.
असली आनंद


मुझे है
पूरा विश्वास
नहीं है
असली आनंद
मठों में
आश्रमों में
व अन्य
धर्मस्‍थलों में
इन सबके प्रभारी
लालायित हैं
लोकसभा व राज्यसभा में
या फिर विधानसभा में
जाने को
मुझे है
पूरा विश्वास
असली आनंद
राज्यसभा, लोकसभा
या फिर विधानसभा
में ही है
इसलिए ही
योगी, साध्‍वी
सब मठाधीश
टिकटार्थी हैं
संसद में
कीर्तन होने के
प्रबल आसार हैं

-विनोद सिल्‍ला©

परिचय

नाम - विनोद सिल्ला
शिक्षा - एम. ए. (इतिहास) , बी. एड.
जन्मतिथि -  24/05/1977
संप्रति - अध्यापन

प्रकाशित पुस्तकें-

1. जाने कब होएगी भोर (काव्यसंग्रह)
2. खो गया है आदमी (काव्यसंग्रह)
3. मैं पीड़ा हूँ (काव्यसंग्रह)
4. यह कैसा सूर्योदय (काव्यसंग्रह)
5. जिंदा होने का प्रमाण(लघुकथा संग्रह)

संपादित पुस्तकें

1. प्रकृति के शब्द शिल्पी : रूप देवगुण (काव्यसंग्रह)
2. मीलों जाना है (काव्यसंग्रह)
3. दुखिया का दुख (काव्यसंग्रह)

सम्मान

1. डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2011
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
2. लॉर्ड बुद्धा राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2012
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
3. उपमंडल अधिकारी (ना) द्वारा
26 जनवरी 2012 को
4. दैनिक सांध्य समाचार-पत्र "टोहाना मेल" द्वारा
17 जून 2012 को 'टोहाना सम्मान" से नवाजा
5. ज्योति बा फुले राष्ट्रीय फैलोशिप अवार्ड 2013
(भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा)
6. ऑल इंडिया समता सैनिक दल द्वारा
14-15 जून 2014 को ऊना (हिमाचल प्रदेश में)
7. अम्बेडकरवादी लेखक संघ द्वारा
कैथल  में (14 जुलाई 2014)
8. लाला कली राम स्मृति साहित्य सम्मान 2015
(साहित्य सभा, कैथल द्वारा)
9. दिव्यतूलिका साहित्य सम्मान-2017
10. प्रजातंत्र का स्तंभ गौरव सम्मान 2018
(प्रजातंत्र का स्तंभ पत्रिका द्वारा) 15 जुलाई 2018 को राजस्थान दौसा में
11. अमर उजाला समाचार-पत्र द्वारा
'रक्तदान के क्षेत्र में' जून 2018 को
12. डॉ. अम्बेडकर स्टुडैंट फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा
साहब कांसीराम राष्ट्रीय सम्मान-2018
13. एच. डी. एफ. सी. बैंक ने रक्तदान के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र दिया, 28, नवंबर 2018

पता :-

विनोद सिल्ला
गीता कॉलोनी, नजदीक धर्मशाला
डांगरा रोड़, टोहाना
जिला फतेहाबाद (हरियाणा)
पिन कोड-125120

ई-मेल vkshilla@gmail.com

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