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व्यंग्य - डूबते बैंक को दद्दू का सहारा - दीपक गिरकर


 

दद्दू की जीवटता को देखते हुए राज्य के वित्त मंत्रालय ने उन्हें बैंक का अध्यक्ष बना दिया था। जब से दद्दू इस बैंक के अध्यक्ष बने है बैंक ने काफी प्रगति की है। दद्दू की पदस्थापना के पूर्व इस बैंक की माली हालत बहुत अधिक खस्ता थी, यह बैंक डूबने की कगार पर थी। लेकिन दद्दू ने अपनी मेहनत व लगन से तीन माह में ही बैंक के ग्राहकों और बैंककर्मियों का विश्वास जीत लिया था। दद्दू की कीर्ति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। अब इस बैंक को दद्दू की बैंक के नाम से जाना जाता है। बैंक को घाटा तो हुआ लेकिन तिमाही आधार पर देखा जाए तो बैंक के घाटे में कमी आई है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बैंक ने बताया है कि बीती तिमाही में उसकी आय में तो इजाफा हुआ परन्तु एनपीए में अपेक्षित वसूली नहीं होने के कारण बैंक को घाटा उठाना पड़ा। जब से दद्दू ने इस बैंक का कार्यभार संभाला है तब से बैंक कर्मचारियों-अधिकारियों को वेतन समय पर मिलने लग गया है।

दद्दू राज्य सरकार की कसौटी पर खरे उतरे। गुड़ गवर्नेंस के नाम पर राज्य की केंद्रीय बैंक द्वारा दद्दू का सम्मान किया गया। बैंक को गुड़ गवर्नेंस का प्रमाणपत्र मिलने से इस बैंक की सभी शाखाओं में मिठाई बांटी गई। इस बैंक को ऋण वितरण के लिए और बैंक चलाने के लिए पूँजी की आवश्यकता थी। कुछ पूँजी तो राज्य सरकार द्वारा इस बैंक को प्रदान की गई लेकिन इस कम पूँजी से कुछ होने वाला नहीं था। अत: दद्दू ने अपने बैंक की निदेशक मंडल की बोर्ड मीटिंग में बाजार से पूँजी जुटाने का प्रस्ताव पारित करवाया और राज्य के वित्त मंत्रालय एवं राज्य के केंद्रीय बैंक से एक आईपीओ जारी करके पूँजी जुटाने की अनुमति मांगी। वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक ने आसानी से अनुमति दे दी क्योंकि एक ओर तो दद्दू की पहुँच ऊपर तक थी और दूसरी ओर बैंक के निदेशक मंडल में एक स्वतंत्र निदेशक था जो कि केंद्रीय बैंक का प्रतिनिधि था। स्टॉक एक्सचेंज और संबंधित बाजार नियंत्रक नियामक बोर्ड में कागजी कार्यवाही करने के पश्चात बैंक का आईपीओ जारी हुआ।

लेकिन इस आईपीओ जारी होने के पूर्व बैंक के अध्यक्ष दद्दू ने हर तरह से तैयारी कर रखी थी। दद्दू जमीन से जुड़े हुए एक जीवट प्राणी है। उनके पास स्टॉक एक्सचेंज में काम करने का एक लंबा अनुभव है। उन्हें हर्षद मेहता के नाटक भी शॉक नहीं दे पाए थे। उन्होंने बैंक के ग्राहकों का तो विश्वास जीत लिया था लेकिन वे बाजार के निवेशकों से परिचित थे। इसलिए दद्दू ने आईपीओ जारी होने के पूर्व अपनी बैंक के कर्मचारियों-अधिकारियों के मुफ्त डीमैट खाते खुलवा दिए थे और बैंक की सभी शाखाओं में अपनी बैंक के कर्मचारियों- अधिकारियों को इस आईपीओ के बारे में, डिस्काउंट ऑफर के बारे में, आईपीओ में निवेश के लिए लोन की सुविधा इत्यादि जानकारी हेतु एक विशेष टीम द्वारा प्रस्तुतीकरण करवाया।

दद्दू द्वारा मौखिक रूप से एक फरमान जारी किया गया कि आईपीओ जारी होने की तारीख को ही हर बैंककर्मी ने इतना तो निवेश करना ही है। बैंक का आईपीओ जारी होने के दिन ही सभी बैंककर्मियों ने इसमें निवेश किया। कुछ उत्साही बैंककर्मियों ने अपनी औकात से अधिक बैंक के आईपीओ में निवेश किया। बैंक के कर्मचारियों-अधिकारियों द्वारा इस आईपीओ में निवेश करने से ग्राहकों और निवेशकों की बैंक के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ गई जिससे इस बैंक का आईपीओ कई गुना सब्सक्राइब हुआ। अब बैंक के पास पूँजी पर्याप्त हो गयी थी। अब दद्दू ने बैंक की शाखाओं को मौखिक रूप से फरमान जारी किया कि शीघ्र लोन मेले आयोजित करके लोन स्वीकृत करके लोन का वितरण किया जाए। शाखा प्रबंधकों द्वारा मौखिक आदेश का पालन किया गया जिससे बैंक के लोन के आंकड़ों में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई। लोन के आंकड़ों में वृद्धि होने से बैंक का नेट एनपीए अनुपात 12 फीसदी से घटकर 4 फीसदी रह गया। इस बैंक के शेयर के भाव आसमान की ऊंचाई को छु रहे थे। आंकड़ों और शेयर बाजार की जादूगरी से इस बैंक की गणना मजबूत बैंकों में होने लगी। एक बार फिर से राज्य की केंद्रीय बैंक द्वारा बैंक के अध्यक्ष दद्दू का सम्मान किया गया। उस दिन फिर से इस बैंक के कर्मचारियों-अधिकारियों का मुंह मीठा करवाया गया। अब इस मजबूत बैंक में तीन कमजोर बैंकों बी बैंक, सी बैंक और डी बैंक के विलय पर राज्य सरकार विचार कर रही है।

दीपक गिरकर

व्यंग्यकार

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संप्रति : भारतीय स्टेट बैंक से सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत

उपलब्धियाँ : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सामाजिक, राजनैतिक, कृषि, बैंकिंग, आर्थिक आदि विषयों पर आलेख एवं सामयिक विषयों पर व्यंग रचनाओं का निरंतर प्रकाशन

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28-सी, वैभव नगर, कनाडिया रोड,

इंदौर- 452016


मेल आईडी : deepakgirkar2016@gmail.com

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