सुशी सक्सेना की कविताएँ

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काव्य श्री सीरीज-         जिस प्रकार लोगों के पास लक्ष्मी या श्री धन दौलत के रूप में होती है उसी प्रकार हम कवियों के पास हमारी कविताएं किसी...

काव्य श्री सीरीज-

        जिस प्रकार लोगों के पास लक्ष्मी या श्री धन दौलत के रूप में होती है उसी प्रकार हम कवियों के पास हमारी कविताएं किसी धन दौलत से कम नहीं। काव्य के रूप में जो हमारे पास अनमोल खजाना है, वह है काव्य श्री। जिसे हम जितना लुटाते हैं, वह उतना ही ज्यादा बढ़ता जाता है।

कविताएं

1.  कवि और कविता

कवि देह है तो उसके प्रान है, कविता।
कवियों के सपनों की जान है, कविता।

भोर की पहली किरण सा कवि,
तो उसका उजाला है, कविता,
मस्त मतवाला मयनशीं कवि,
उसकी मधुशाला है कविता।
कवि धरा गगन सा तो,
दोनों के मिलन का स्थान है, कविता।

चंचल चपल हिरन सा कवि,
कविता उसकी कस्तूरी है,
एक दूसरे के बिना दोनों
की जिंदगी अधूरी है।
कवि परिंदा है तो उसके,
परों की उड़ान है, कविता।

कल कल करती ध्वनि है कविता,
सरिता बन गया कवि,
शाखाएं हैं कविता जिसकी,
जड़ बन गया कवि।
गहन सागर सा कवि, उसके,
मन की लहरों की उफान है, कविता।
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2.  बड़ी बात..........

सहज और सरल रास्ते पर चल कर तो,
सभी मंजिल को पा सकते हैं।
बड़ी बात तो तब होगी.......
जब कांटों भरे कठिन मार्ग पर चल कर,
अपनी मंजिल को पा ले कोई।

प्यार मोहब्बत के नगमें तो इस दुनिया में,
गुनगुना लेते हैं सब आसानी से।
बड़ी बात तो तब होगी..........
जब अपने गीत राग से इस दुनिया में,
प्रेम का उजाला फैला दें कोई।

सूरज की किरणें तो हर रोज आकर जग के,
अंधियारे को मिटा देती हैं।
बड़ी बात तो तब होगी...........
जब भीतर के अंधेरे को मिटाने के लिए,
मन में भी एक दिया जला लें कोई।

बनी बनाई किस्मत पे तो इतराते हैं सब,
पा के खजाना खुश हो जाते हैं सब।
बड़ी बात तो तब होगी................
जब अपने ही हाथों से खुद अपनी,
तकदीर बना लें कोई।

सात रंग के मधुर सपने तो सब को भाते हैं,
जीवन की रंगीनियों में खो जाते हैं।
बड़ी बात तो तब होगी.......................
जीवन के उस काले रंग को भी,
हंस के गले लगा ले कोई।
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3.  कांटों के बीच

काँटों के बीच जैसे गुलाब, वह इंसान बन जाना चाहती हूँ|
वीरों के दिलों में है जो , वह ईमान बन जाना चाहती हूँ|

जान भी देनी पड़े गर कभी तो हिचकिचाहट न हो,
धड़कते हुये हर दिल में,  यही अरमान बन जाना चाहती हूँ|

जिन्दगी में साँसों का हिसाब रहे तो क्या बात है,
जीने का मजा बढ़ा दे जो, उस मौत की कदरदान बन जाना चाहती हूँ|

नफरत न बसे कभी भी मेरे इस दिल में,
गिले शिकवे भुला दे जो उस मोहब्बत का फरमान बन जाना चाहती हूँ|

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4.  मैं गीत हूं।

मैं गीत हूं, शब्दों में ढल कर जीवन पाता हूं।
मैं अनमोल श्री हूं उनकी, जिनकी कल्पना से रच जाता हूं।

कागज के खेत पर, कलम का हल चलाकर, शब्दों के बीज उगाते हैं।
मैं उनकी अनमोल निधि हूं, जो मुझको इतने चाव से बनाते हैं।
बह जाती है जब मुझमें मधुर संगीत की धारा,
बेसुध हो कर उसके सुरों में रम जाता हूं।

विशाल पर्वतों का जब मुझसे जिक्र होता है, शान मेरी बढ़ जाती है।
नदियों की लहरों के आते ही मेरी भी चाल बहक जाती है।
छिड़ती है जब मुझमें बात फूलों की, तो उनकी खुशबू से खुद भी महक जाता हूं।

आंसुओं की झड़ी बन कभी, रोता हूं किसी कोने में जाकर,
कभी हंसी बन कर किसी के होंठों से झर जाता हूं।
जिंदगी के हर रंग को अपनी तरह से दर्शाता हूं, जब मौत आती है तो खामोश अफसाना बन जाता हूं।
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5.  मन की व्यथा

मेरे मन की व्यथा, क्या बताऊं सखियों तुम्हें।
मत बहाओ नीर, कितना समझाऊं अंखियों तुम्हें।

हमें तो हमारी आंखों में कैद ख्वाबों का हिसाब चाहिए।
हम भी पिरोना चाहते हैं, अरमानों की लड़ियों तुम्हें।

इक शब्दों के हमले से क्या क्या न बिखर जाता है।
हम हैं जो खामोशी से जोड़ कर रखते हैं रिश्तों की कड़ियों तुम्हें।

दोष तो उन नजरों का है जो पल में बहक जाती हैं।
अपनी इतनी सुंदरता पर क्यों न हो नाज परियों तुम्हें।

उसमें मुझमें फर्क क्या जो उसके जैसा रुप बनाऊं मैं भी।
वो बोए कांटे मेरी राहों में, मैं दूंगी उसे कलियों तुम्हें।

हां मैंने आसमां को भी झुकते देखा है ज़मीं के लिए।
मेरी हौसलों की उड़ान से कौन बचाएगा अब मंजिलों तुम्हें।
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6. बेहतर समाज

बड़ा सोचना अच्छी बात है |
अच्छा होगा धैर्य साथ है |
स्वतंत्र सोच का हो विकास |
औरतों को मिले पूरा सम्मान |
हो करूणामयी समाज की स्थापना |
भूत को छोड़कर, भविष्य की योजना |
दृढ़ इच्छाशक्ति और हो ईमानदारी |
पर एकरूपता लाना है बहुत जरूरी |
बेहतर पढ़ाई और स्वच्छता का हो ध्यान |
नियोजन से करें धर्म जाति का मान |
दया व परोपकारी की ही भावना न हो |
रोजगार के रूप में काम कोई बड़ा हो |
समाज की जरूरत को महसूस करना है |
मिलजुल कर सबको दुनिया बदलना है |
छोटे बदलाव हैं बड़े काम के |
लक्ष्यों को तय कर लगें काम पे |
परिवर्तन तो समाज का नियम है |
चाल में चाल मिलाना अपना करम है |

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7.  ये जो तुम्हारा शहर है।

ये जो तुम्हारा शहर है, दोस्तों,
वो कभी मेरा भी था।
मेरी विदाई कर दी गई और,
मुझे पराया बना दिया गया।
अब कभी यहां आती हूं
तो मेहमान बन कर।
और हर बार मेरा दिल
मुझसे ये सवाल करता है।
क्यों आती हो यहां पर,
क्या रखा है यहां पर तुम्हारा।
लब तो खामोश रहते हैं,
पर भीगी पलकें ज़वाब देती हैं।

मेरी बाईस वर्ष की जिंदगी की दौलत रखी है।
बिना कुछ किए ही मिली  वो शोहरत रखी है।
मेरी सुनहरी जिंदगी की सुनहरी यादें रखी है।
कभी न भूलने वाली अनमोल मुलाकातें रखीं हैं।

मेरी नानी और दादी के किस्से रखें हैं।
मेरी आत्मा के कुछ हिस्से रखें हैं।
इस घर की दीवारों से मेरा पुराना नाता है।
मेरे दिल का एक टुकड़ा हर बार यहीं छूट जाता है।

मेरी मां का ममता भरा आंचल रखा है।
थाम के बड़े हुए जिसे पिता का वो दामन रखा है।
मेरे भाई की सूनी कलाई रखी है।
बहनों से हुई बचपन की लड़ाई रखी है।

मेरे स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई रखी है।
मेरे बचपन के खेल और नादानियां रखी है।
और मेरी आधी अधूरी जवानी रखी है।
पहले प्यार की प्यारी सी कहानी रखी है।

दोस्तों के साथ गुजरा हुआ वक्त रखा है।
गलियों और चौराहों से गुजरना रखा है।
बाजारों में घूमने का दीवानापन रखा है।
मेरे अपनों का अपनापन रखा है।

मेरा मुंह का स्वाद रखा है जो यहां नहीं मिला।
मेरे सच्चा लिबास रखा है जिसकी यहां कोई कद्र नहीं।
पहले सावन की अहसास वाली बरसातें रखी है।
गर्मियों की छुट्टियां और सर्दी की मस्तियां रखी है।

मेरा हंसना रोना रूठना मनाना
सब कुछ तो रखा है यहां पर।
आज भी लगता है कि मुझे कोई बुलाता है।
जिसे मैं कभी भूलना नहीं चाहती हूं।
इसलिए
इनसे मिलने चली आती हूं।
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8.  प्यार की सरहद

न कम जरा सा इधर पे, न उधर पे ज्यादा।
गुलाबों की खुशबू को कौन बांट सकता है आधा आधा।
चांद सूरज और सितारे एक साथ चमकते हैं सब जगह।
प्यार का पैगाम लेकर आ ही जाती है बैरन हवा।
ज़मीं बंट गई है मगर आसमान तो एक है।
उड़ान भरते प्यार के परिंदों की कोई सरहद नहीं होती।

हुश्न पाया जाता है और आशिक भी बनते हैं।
दुनिया में इसी तरह तो प्यार के अफसाने बनते हैं।
धड़कने एक सी होती है यहां पर सबके दिलों की।
हर राह मुश्किल होती है प्यार की मंजिलों की।
बांध कर रख सकते नहीं किसी भी सीमा में।
अरे यार, प्यार बांटने की कोई हद नहीं होती।
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9.  मृत्यु के बाद

मृत्यु के बाद, तुम मेरे घर आओगे शोक मनाने,
आज क्यों नहीं आ जाते दो पल साथ बिताने।
मृत्यु के बाद, तुम मुझे कांधे पर उठाओगे,
आज क्यों नहीं आ जाते थोड़ा सा प्यार जताने।

मृत्यु के बाद, तुम मेरे लिए आंसू बहाओगे,
मेरे सामने आज दो आंसू क्यों नहीं बहा लेते।
मृत्यु के बाद, तुम मेरी अच्छी बुरी याद करोगे,
आज ही सारे गिले-शिकवे क्यों नहीं मिटा देते।

मृत्यु के बाद, तुम लोगों से मेरी बातें कहोगे,
तो आज ही कह दो न दिल की सारी बातें।
मृत्यु के बाद, तुम लोगों से मेरी तारीफ करोगे,
तो आज ही बोल दो न चंद लफ्ज़ मेरे सामने।

मृत्यु के बाद, तुम मेरी बरसी पे आओगे खाने,
क्यों न हम आज साथ में दो निवाले खा लें।
मृत्यु के बाद, तुम मेरे लिखे गीत गाओगे,
क्यों न हम आज साथ में ही गुनगुना लें।

मृत्यु के बाद, तुम सब कुछ करोगे मेरे लिए,
पर मुझको तो पता भी न चल पाएगा।
आज ही पूरी कर लो न अपनी हर हसरत,
जो हर दिन हर पल मुझको याद आएगा।
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10.  मैं कौन हूं।

मैं कौन हूं, मैं एक आत्मा हूं।
मैं अपने घर में रहती हूं।
मेरा घर मेरा ये शरीर है, और
मैं अपने घर के हर कोने से बहुत प्यार करती हूं।

मेरे घर के सबसे अहम हिस्से मेरे पैर हैं,
क्योंकि, वे मेरे बोझ को उठाते हैं, और
मेरी मंजिल की तरफ चलने में मेरी मदद करते हैं।
इसलिए, मैं इनकी खूब सेवा करना चाहती हूं,
ताकि ये कभी न थके, और मुझे,
सफलता की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचाएं।

मेरे ये दोनों हाथ जिनकी मदद के बिना,
मैं कुछ भी नहीं कर सकती,
ये सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि परिवार के,
सभी सदस्यों के पेट भरने का इंतजाम करते हैं।
जो दुनिया में सबसे बड़ा पुण्य का काम है,
मैं इनसे खूब प्यार करना चाहती हूं, ताकि
ये इसी तरह हर वक्त मेरा साथ देते रहें।

मेरा पेट हर अच्छी बुरी चीज को हजम कर,
मुझे सब कुछ सहने की ताकत देता है।
साथ ही मुझे मां बना कर मां का पद देता है,
जिसका नाम दुनिया में सबसे ऊपर है।

मेरे वक्ष मेरे पुत्र को पोषण देते हैं,
ये गुण दुनिया की किसी भी शक्ति में नहीं होता,
इसलिए, मुझे अपने स्त्री होने पर,
गर्व महसूस होता है।

मेरे कान सिर्फ अपनी प्रशंसा ही नहीं बल्कि
अपनी आलोचना सुनना भी पसंद करते हैं।
ताकि, मैं अपने अंदर की कमियों को सुधार सकूं।

मेरी खूबसूरत आंखें मुझे ये खूबसूरत दुनिया दिखाती हैं।
मेरे होंठ मुझे हंसना रोना और मेरी जीभ मुझे बोलना सिखाती है।
मेरी नाक मुझे इस बात का अहसास दिलाती है,
कि दुनिया में सबसे जो सुगंधित चीज है वो मैं हूं।
ये सब मिलकर मेरे एक खूबसूरत चेहरे का निर्माण करते हैं।
जिस पर कोई भी कवि कविता किये बिना नहीं रह पाता।
मेरे बालों ने अपनी तुलना घटाओं से करवा के मुझे आसमान में जगह दिलाई है।

मेरा ये दिमाग जिसने मुझे शिक्षित, संस्कारी और चरित्रवान बनाया।
जिसके बिना मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं है।
इन सबको मैं इसके लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।

सबसे प्यारा कोना मेरे घर का मेरा दिल है।
जो मेरी जान है, मेरी जिंदगी है।
जिसके बिना मैं कुछ भी नहीं,
मैं अपने घर के इस कोने में सबके लिए,
प्यार और अच्छी भावनाएं रखना चाहती हूं।
ताकि, मुझे हर रिश्ते को निभाये रखने
की मजबूती मिलती रहे और
खुदा से दुआ करती हूं कि भूले से भी
मेरे दिल में गंदे विचारों रूपी गंदगी कभी न फैले।

क्योंकि ऊपरी शरीर की गंदगी तो सबको दिखाई दे जाती है।
मगर दिल की गंदगी किसी को भी दिखाई नहीं देती।
जो खुद को तकलीफ़ देने भर के लिए बहुत है।
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सुशी सक्सेना इंदौर

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. 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श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड 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रचनाकार: सुशी सक्सेना की कविताएँ
सुशी सक्सेना की कविताएँ
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