पुस्तक समीक्षा : सर्जिकल स्ट्राइक ( उपन्यास)

SHARE:

पुस्तक समीक्षा : पुस्तक का नाम : सर्जिकल स्ट्राइक ( उपन्यास) लेखक : ईश कुमार गंगानिया प्रकाशक : नोशन प्रेस पृष्ठ : 158 मूल्य : रु.199/- उपन्...

पुस्तक समीक्षा :

पुस्तक का नाम : सर्जिकल स्ट्राइक ( उपन्यास)

लेखक : ईश कुमार गंगानिया

प्रकाशक : नोशन प्रेस

पृष्ठ : 158 मूल्य : रु.199/-

उपन्यासकार का परिचय :

भारतीय समाज में मौजूद विभिन्‍न प्रकार की कुरीतियों, विषमताओं और साम्‍प्रदायिकता ने ईश कुमार गंगानिया को इस हद तक उद्वेलित किया कि वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में इसके खिलाफ वैचारिक जंग के लिए वैचारिक रूप से मुखर हो गए। अलग-अलग मोर्चों पर, बीस वर्षों के संघर्ष ने गंगानिया को पन्‍द्रह पुस्तकों का लेखक बना दिया, जिनमें तीन कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, दो मूलनिवासी अस्मिता संघर्ष पर आधारित, एक अन्‍ना आंदोलन 2012 और शेष आठ पुस्‍तकें साहित्यिक आलोचना और समसामयिक मुद्दों पर निबंधों का संकलन हैं। लेखक ने आठ वर्षों से अधिक हिन्‍दी आलोचना की त्रैमासिक हिन्‍दी पत्रिका ‘अपेक्षा’ में सह-संपादक के रूप में कार्य किया और एक बाई-लिंग्‍वल मासिक पत्रिका ‘आजीवक विज़न’ का स्‍वतंत्र संपादन किया।

सर्जिकल स्ट्राइक (उपन्यास):समय के साथ सार्थक संवाद

समीक्षक : ‘तेजपाल सिंह तेज’

गंगानिया का सद्य प्रकाशित उपन्‍यास ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ मेरे सामने हैं। इसमें कुल तेरह अध्याय है। यह उपन्यास पुलवामा के आतंकवादी हमले पर आ‍धारित है। फलत: पुलवामा के शहीदों के बलिदान और उनके परिवारों को ही समर्पित है। इस उपन्यास में खास बात ये है कि उपन्‍यास का नायक आजीवक बाबू इस हमले को केन्द्र में रखकर समाज, राजनीति और देश पर पड़ने वाले दुष्‍प्रभावों को लेकर अलग-अलग मोर्चों पर जैसे सर्जिकल स्‍ट्राइक करता है और उपन्‍यास के कैनवास और जीवंत चित्रण को व्‍यापकता प्रदान करता है। गंगानिया जी सेवानिवृत्ति के बाद के समय को एक मिशन की तरह सामाजिक तानेबाने की सुदृड़ता और देश के गौरव के लिए आजीवन संघर्ष के लिए कृतसंकल्‍प हैं।

साहित्यिक दृष्टिकोण से माना जाता है कि कथा साहित्य का उदय संभवत: कहानी-लेखन से संभव हो सका है। यह भी माना जाता है कि उपन्यास का उदय लम्बी कहानियों के लेखन के प्रादुर्भाव के साथ-साथ हुआ है। किंतु कहानी और उपन्यास के बीच जो खास अंतर है, उसे समझने के लिए ज्यादा उलझन का सामना नहीं करना पड़ता। दरअसल, कहानी जीवन तथा समाज के किसी विशेष भाग को विश्‍लेषित करती है जबकि अर्नेस्ट ए. बेकर ने उपन्यास की परिभाषा देते हुए उसे गद्यबद्ध कथानक के माध्यम द्वारा जीवन तथा समाज की व्याख्या का सर्वोत्तम साधन बताया है। अर्थात विश्वसाहित्य का प्रारंभ ही संभवत: कहानियों से ही हुआ, इस मानने में कोई संदेह शायद नहीं रहता।

यह भी कि साहित्य में गद्य का प्रयोग जीवन के यथार्थ चित्रण का द्योतक रहा है। उपन्यास के जरिए साधारण बोलचाल की भाषा द्वारा लेखक के लिए अपने पात्रों, उनकी समस्याओं, विचारों तथा उनके जीवन की व्यापक पृष्ठभूमि से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करना आसान होता है। इस संबंध में एक सत्य उजागर कर दूं कि ईश कुमार गंगानिया जी के प्रस्तुत उपन्यास ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ से पूर्व उनका ‘इंट्यूशन’ शीर्षांकित एक कहानी संग्रह, तीन काव्‍य संग्रह तथा आलोचना की दर्जनभर पुस्‍तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। अत: उपन्यास लिखने की उनकी कोशिश अनायास नहीं है। गंगानिया जी ने अपने इस उपन्यास में जीवन की विसंगतियों के व्‍यापक चित्रण प्रस्तुत करने में ही उपन्यास-लेखन की कला को प्राथमिकता प्रदान करते हुए समय के साथ एक सार्थक संवाद करने का साहस किया है।

लेखक का मानना है कि मैं लोकतंत्र और लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था का मुरीद हूं। मुझे देश के लोकतांत्रिक तानेबाने से खिलवाड़ कतई पसंद नहीं है...और किसी भी जिम्‍मेदार शहरी को ऐसा खिलवाड़ पसंद नहीं होना चाहिए। इसलिए राष्‍ट्रहित में प्रत्‍येक जिम्‍मेदार नागरिक को इसके विरुद्ध खड़ा होना चाहिए। मेरा उपन्‍यास ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्‍यों के समर्थन में एक ज़़ज्‍बाती जंग है। मेरा मानना है कि यह जंग किसी भी लेखक के मनोरंजन का साधन नहीं हो सकती। जाहिर है, किसी पाठक के मनोरंजन का भी साधन नहीं। मेरे लिए इस जंग का हिस्‍सा होना मेरी मजबूरी है...एक जिम्‍मेदारी है। मैंने यह उपन्‍यास इसलिए नहीं लिखा कि मेरे पास उपन्‍यास लेखन की कोई विशेष कला है...या उपन्‍यास की दुनिया में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना मेरा मकसद है। मुझे यह माध्‍यम अपनी बात कहने के लिए उपयुक्त लगा। इसलिए मैंने उपन्‍यास को अपनी बात कहने का माध्‍यम बनाया है।

उपन्‍यास लिखने के पीछे समाज में कुछ ऐसी हिंसक घटनाओं का बढ़ जाना है जो लोकतंत्र को सीधे चुनौती देती नजर आती हैं...शासन-प्रशासन और सरकार की नीयत को संदिग्‍ध बनाती हैं। इसलिए अराजक तत्‍वों में न किसी कानून का खोफ रह गया है...न किसी पुलिस प्रशासन का और न ही किसी न्‍याय प्रक्रिया का। देश की लगभग सभी संवैधानिक संस्‍थाएं जैसे वैंटिलेटर पर आ गई हैं और कृत्रिम ऑक्‍सीजन पर जिंदा हैं। यह गंभीर चिंता की बात है...इलैक्‍ट्रानिक मीडिया ने इस चिंता को और अधिक बचैनी में परिवर्तित कर छोड़ा है। मीडिया मुझे क्रिकेट की आईपीएल की टीम की तर्ज पर ‘इंडियन मीडिया परिमियर लीग’ यानी आई.एम.पी.एल. जैसी भूमिका में नजर आता है जो बराबर मीडिया-मीडिया खेले जा रहा है। या तो यह अपने लिए बैटिंग कर रहा है या अपने आका के लिए...देश और इसकी जनता के लिए इसकी बैटिंग सिरे से नदारद नजर आती है। देश के एक साधारण नागरिक द्वारा ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ की बहुआयामी तस्‍वीर उपन्‍यास के माध्‍यम से पेपर पर उतारने की एक साधारण-सी कोशिश है...इसके अतिरिक्‍त कुछ ओर नहीं।

उनके यथोक्त कथन से स्पष्ट हो जाता है कि लेखक का यथार्थ के प्रति उनका आग्रह बिल्कुल नया है, ऐसा नहीं है...यह उनकी कविताओं और निबंधों में बेबाक तेवर के साथ बराबर अभिव्‍यक्‍त होता रहा है। उपन्‍यास का प्‍लाट ऊपरी तौर पर राजनीतिक नजर आता है लेकिन इसमें आम आदमी के जीवन से जुड़ा ऐसा कोई पहलू नही है जो इसकी विषयवस्‍तु से अछूता रह गया हो। कहने की आवश्‍यकता नहीं कि उन्होंने अपने आस-पास के परिदृष्य को ही अपने उपन्यास का विषय बनाया है। कल्पना की दुनिया से परे, उनका यह उपन्यास हवाबाजी की दुनिया से परे जीवन जीने वाले पाठकों को जरूर आकर्षित करेगा, ऐसा मेरा विश्‍वास है। इस उपन्‍यास में पात्रों की संख्‍या सीमित है लेकिन वैचारिक धरातल का कैनवास काफी व्‍यापक है। रोजमर्रा की घटनाओं को अपने उपन्यास का हिस्सा बनाकर उसे यथार्थवादी संवाद के रूप में प्रस्तुत किया है।

माना कि लेखक ने प्रस्तुत उपन्यास ‘सर्जिकल स्‍ट्राइक’ का प्‍लॉट यानी पृष्‍टभूमि यद्यपि पुलवामा के आतंकी हमले की बुनियाद पर खड़ा किया है लेकिन उपन्‍यास में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्‍यों को चुनौ‍ती देने वाले हर मुद्दे की सर्जरी को तरजीह दी गई है। इस सर्जरी में प्रयोग होने वाले औजारों को विशुद्ध रूप से स्‍टेरिलाइज़ यानी कीटाणु-रहित बनाने का भरसक प्रयास किया गया है। यह भी प्रयास किया गया है कि सिर्फ बीमार अंग का उपचार हो...उसी के साथ छेड़-छाड़ हो...काट-छांट हो...अन्‍य अंगों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इस सर्जरी के भावी सकारात्‍मक परिणाम के मद्देनजर पोस्‍ट-ऑप्रेटिव उपचार व इम्‍यूनिटी बरकरार रखने के भी खासे प्रयास किए गए हैं। इम्‍यूनिटी बरकरार रखने के लिए सिंधु-घाटी सभ्‍यता से लेकर बुद्ध-कालीन सोशियो-पॉलिटिकल उपचार पद्धति तक और बुद्ध कालीन सोशियो-पॉलिटिकल उपचार पद्धति से वर्तमान सोशियो-पॉलिटिकल उपचार पद्धति का सहारा लिया गया है। शेष पाठक वर्ग को तय करना है कि ये सर्जरी कितनी सार्थक है और कितनी नहीं...इ‍सलिए इस बिंदू और अधिक बात करना उपयुक्‍त नहीं होगा।

उपन्यास की विषयवस्तु से जान पड़ता है कि उपन्यास के पात्र आपस में समाज के प्रत्येक पहलू पर, फिर चाहे वह राजनीतिक मसले हों, सामाजिक विसंगतियों की कुरूपता हो, धार्मिक उठा-पटक की बात हो, सामाजिक अनेकता की बात हो, मूलधारा के साहित्य अथवा दलित लेखक संघों व साहित्‍यकारों की कारगुजारियां हों, बाबा साहेब अम्बेडकर की विचारधारा और उनकी विचारधारा की मान्यता को लेकर उठने वाले सवालों की बात हो, उपन्‍यास में सभी मुद्दों पर गर्मजोशीपूर्ण से चर्चा है...संवाद हैं। उपन्‍यास में पात्रों के स्‍वाभाविक विकास के लिए स्‍पेश की कोई कमी नजर नहीं आती। उपन्‍यासकार पात्रों के स्वाभाविक विकास और उनके चित्रण में कहीं भी हस्‍तक्षेप करता नजर नहीं आता। इसके चलते उपन्‍यासिक परिस्थितियों के साथ भी न्‍याय होता नजर आता है और पात्रों के साथ भी। कहा जा सकता है कि कई परिस्थितियों में उपन्‍यासकार का अलग तरह से सोचने का आग्रह जरूर नजर आता है लेकिन इसके पीछे पूर्वाग्रह न होना, लेखकीय ईमानदारी को रेखांकित करता है।

आज की जो समस्‍याएं हैं...चाहे भ्रष्‍टाचार है, साम्‍प्रदायिकता है, जातीय या धार्मिक अंहकार है, किसी प्रकार की मारपीट या कत्लेआम है या मौजूदा लोकतंत्र को चुनौती देने वाली जो कोई भी समस्‍याएं हैं, उनके कारणों की तलाश लेखक द्वारा इतिहास में बहुत पीछे तक जाकर की गई है। इस उपन्‍यास में उपलब्‍ध जानकारी के आधार पर निकाले गए निष्‍कर्ष किसी वर्ग-विशेष, जाति विशेष, सम्‍प्रदाय विशेष को अपटपटे लग सकते हैं...आहत करने वाले लग सकते हैं...लेकिन जैसे जिस्‍म से किसी कांटे को निकालने के लिए सुई या उससे बड़े व मजबूत कांटे का प्रयोग करना पड़ता है...उसी सुई व मजबूत कांटे का उपयोग मैंने भी उपन्‍यास में किया है।

कुल मिलाकर कथाकार कल्पना की दुनिया से दूर...यथार्थ की दुनिया का उल्लेख करता है इसलिए प्रस्तुत उपन्यास की ग्राह्यता और बढ़ जाती है। यथार्थ की परिधि के बाहर जाकर अनावश्‍यक मनचाही उड़ान न कथानक की मांग नजर आती है और न ही कथाकार इसके लिए कोई फालतू प्रयास की करता नजर आता है। उपन्‍यास की विषयवस्‍तु की विश्‍वसनीयता पाठकों को उपन्‍यास से जोड़े रखने में सहायक प्रतीत होती है। उनके इस उपन्यास का आविर्भाव और विकास उनके कहानी-लेखन के बाद का उपक्रम है जो व्यक्ति तथा समाज को व्‍यापक धरातल प्रदान करता है। यह जीवन की समस्याओं के प्रति एक नए दृष्टिकोण का तर्कयुक्‍त व व्‍यवहारिक दस्‍तावेज है। अंत में यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि कथाकार का दृष्टिकोण केवल बौद्धिक ही नहीं है। उपन्यासकार की कला-साधना समाज की समस्याओं को बारीकी से उकेरती है और व्यापक सामाजिक जागरूकता का मार्ग प्रशस्‍त करने की प्रबल क्षमता रखती है। प्रस्तुत उपन्यास में सामाजिक व राजनीतिक चेतना के क्रमिक विकास की कलात्मक प्रस्तुति है...अभिव्यक्ति है।

अधिकतर साहित्यकारों की मान्यता है कि जीवन का जितना व्यापक एवं सर्वांगीण चित्र उपन्यास में मिलता है उतना साहित्य के अन्य किसी भी रूप में उपलब्ध नहीं।...प्रस्तुत उपन्यास इस उक्ति पर खरा उतरता है, यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं। दरअसल, उपन्यासकार के लिए कहानी साधन मात्र है, साध्य नहीं। उसका ध्येय पाठकों का मनोरंजन मात्र भी नहीं...यह पाठक को समाज की समस्याओं की अनेक परतों से रूबरू कराते हुए उनके समाधान हेतु ठहर कर विचार करने को बाध्‍य करता है...व्‍यक्ति को मौजूदा परिस्थितियों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारियों के निर्वहन के लिए उकसाता है...झकझोरता है। कथाकार की यही कला लेखन के प्रति ईमानदारी की ओर संकेत करती है।

*****

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: पुस्तक समीक्षा : सर्जिकल स्ट्राइक ( उपन्यास)
पुस्तक समीक्षा : सर्जिकल स्ट्राइक ( उपन्यास)
https://2.bp.blogspot.com/-vf2ZDKdEf0c/XTKVT7_2_SI/AAAAAAABPnY/-1Kxn47_j5oPloa1B7uDawH_24dENa43ACK4BGAYYCw/s320/Phot%2BIsh%2BKumar-707689.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-vf2ZDKdEf0c/XTKVT7_2_SI/AAAAAAABPnY/-1Kxn47_j5oPloa1B7uDawH_24dENa43ACK4BGAYYCw/s72-c/Phot%2BIsh%2BKumar-707689.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/07/blog-post_17.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/07/blog-post_17.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content