नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - लिहाज - प्रो. लता सुमंत

एक शाम मिसेज़ गोयल महिला मण्डल की मीटिंग में होटल सुरसागर पहुँची। मीटिंग ज़ोर-शोर में चली। चाय-पानी का दौर चला। आज के दौर में उभरनेवाली महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा – विचारणा हुई । युवा – युवतियों का खुले आम घूमना , विवाह पूर्व साथ रहना , डेटिंग , फ्री-सेक्स आदि विषयों पर खुलकर चर्चा हुई । हर किसी ने अपने मत रखे। मिसेज़ गोयल ने भी अपने विचार रखे – ‘ न जाने इन बच्चों की आँख का पानी कहाँ मर गया है? कोई शर्म लिहाज ही नहीं रहा। मैं तो कहती हूँ - इन बच्चों के माँ - बाप क्या आंखें मूँदे बैठे है ? क्या इन्हें कुछ दिखाई नहीं देता? उसी दौरान उनका ध्यान सामने बैठे युवक - युवती पर पड़ा। देखते ही वे पानी - पानी हो गईं। आंखें शर्म से झुक गई । सामने टेबल पर निशि इतनी बेखबर बैठी थी कि उन लोगों पर उसका ध्यान तक न गया। मिसेज़ गोयल ने जैसे - तैसे अपने आप को संभाला. मीटिंग खत्म की और महिलाओं से बिदा लेकर घर पहुँची।

निशि के घर लौटने पर माँ ने उससे कई सवाल किए ओर कहा – निशि ये क्या बेहूदापन है। कुछ नहीं माँ , सुमित मेरा अच्छा दोस्त है ओर अब मै उसे अपना जीवनसाथी बनाना चाहती हूँ। लेकिन इस तरह से। हाँ माँ । लेकिन जीवनसाथी का मतलब समझती हो? आप ही ने सिखाया है माँ , इंसान को जमाने की रफ्तार से चलना चाहिए वरना वह पीछे रह जाता है । मैं उसी रफ्तार में कदम मिलाने की कोशिश कर रही हूँ माँ। लेकिन आप चिंता न करें माँ। मैं सुमित की होकर रहूँगी। सुमित ही मेरा सबकुछ है। किसी ओर से मुझे कुछ लेना - देना नहीं है । मैं बिल्कुल आपके संस्कारों ओर पदचिन्हों पर चलने की कोशिश कर रही हूँ। फर्क सिर्फ इतना है जीवनसाथी चुनने का आपका स्टाइल अलग था, मेरा अलग है। मिसेज़ गोयल को खुद की तरह बेटी की बातों में दृढ़ निश्चय दिखाई दिया।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.