नाका - विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका. 

विविध विधाओं में से चुनकर पढ़ें -

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---

यहाँ की विशाल ऑनलाइन लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोज कर पढ़ें -

 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com  रचनाकार के वाट्सएप्प नंबर 8989162192 (कृपया कॉल नहीं करें, कॉल रिसीव नहीं होगी, तथा इसका उपयोग केवल प्रकाशनार्थ रचना भेजने के लिए ही करें) पर भी वाट्सएप्प से रचनाएँ अथवा रचना पाठ के वीडियो प्रकाशनार्थ भेजे जा सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए यह पृष्ठ [लिंक] देखें.

--

लघुकथा - स्टैण्डर्ड - सुधा शर्मा

शुभी की सारी रात बेचैनी में कट गई। नींद थी कि रूठे माशूक की भाँति आँखों के पास भी आने को तैयार नहीं थी। आती भी कैसे ; दिल- दिमाग पर तो चिन्ता हावी थी। सुरसा के मुँह की तरह बढती मँहगाई, दो बच्चे, और पति बेरोजगार। इस जमाने में बारहवीं पास होना शिक्षित होने का प्रतीकमात्र था। न कोई  प्रशिक्षण न कोई अन्य हुनर। न अपने पास पैसा जो अपना बिजनेस खडा कर लें। इस मँहगाई में तो दुकान किराये पर लेना ही महाभारत थी। उसका दिमाग सोच- सोचकर फटा जा रहा था। विचार तूफान की भाँति जल्दी- जल्दी आ- जा रहे थे। लेकिन कोई भी विचार अपनी स्थाई छाप नहीं छोड रहा था। तभी उसके मानसपटल पर अपनी प्यारी सहेलियों का कथन छा गया' शुभी! तेरे हाथों में तो सचमुच जादू है,मन करता है कि खाने के साथ - साथ प्लेट भी चबा जाएँ। ' इस कमेंट ने शुभी को आत्मबल प्रदान किया। लेकिन सोचकर फिर मन उदास हो गया'घर में खाने के लाले पडे है, रेस्टोरेंट  के ख्वाब क्या अलादीन के चिराग से पूरी करेगी।' तभी मन ने प्रेरित किया- ' ठेला तो लग सकता है न।

      सोचकर उसका मन मयूर उड चला। उसने तुरन्त अपने पति से अपने मन की बात बताई और उसे चाट का ठेला लगाने के लिए प्रेरित कर तैयार भी कर लिया। धन की समस्या को भी उसने मन ही मन सुलझा लिया। उसके पास गहनों के नाम पर बस एक जोडी पाजेब, नाक की लौंग, और एक जोडी बिछिया थी। उसने नाक की लौंग और पाजेब बेचकर अपने ख्वाब में रंग भरने की ठान ली। एक दिन पहले ही उसने सारा सामान एकत्रित कर लिया। अत: सारा दिन भागादौडी में बीत गया। पति ने भी ठेला किराये पर ले लिया। उत्साह के कारण रात को ठीक से नींद भी नहीं आई ।सुबह चार बजे से ही उसने चाट का सामान बनाना प्रारम्भ कर दिया।

      सामान तैयार होते ही उसने सबसे पहले प्रत्येक खाद्य पदार्थ से भगवान को भोग लगाया फिर स्वयं चखा और ग्राहको को संतुष्ट करने का मनोयोग से स्वयं को तैयार कर लिया। चलते समय भी उसने भगवान से हाथ जोड़कर प्रार्थना की और स्वयं भी पति के साथ गई।

घर से निकलते ही संघर्ष शुरू थे। अपने मन की कल्पनाओं को साकार रूप देने में कितनी बाधाएँ आती हैं उसका आभास उसे हो रहा था। ठेला खडा करने के लिए जगह तलाश करना अपने आप में महाभारत था। पहले से स्थापित ठेलेवाले उसे स्थान देने के लिए तैयार नहीं थे। चलो इसका भी समाधान

   निकल आया। महानगर पालिका के कर्मचारी ने ले देकर इसका भी जुगाड कर दिया।मनमानी रकम ली ऊपर से डाँट पिलाकर रौब भी पूरा जमा दिया।

    अक्सर लोग पहले से स्थापित ठेलो पर ही चाट का आनन्द ले रहे थे। शायद कुछ अनजाने में  और कुछ यह सोचकर आ गए होंगे कि चलें आज कुछ टेस्ट चेंज करके देखा जाए। लेकिन खाकर चेहरे खिल गए थे।"वास्तव में स्वाद में कुछ नयापन तो है ।" सुनकर शुभी का रोम- रोम खिल गया । मन में सुनहरे भविष्य के कुछ सपने जगे। शुभी मन ही मन खुश हो रही थी कि एक छोटे से बच्चे के हाथ से दोना छूट गया और उसके कपडे खराब हो गए। उसकी माँ ने शुभी से कहा-" जरा टिशू पेपर देना बच्चे के हाथ साफ करने हैं। " सुनकर शुभी घबरी गई उसने दस्ताने(  ग्लव्ज)तक का प्रबन्ध किया था ताकि बाजार प्रतियोगिता में जम सके। लेकिन टिशू पेपर उसके पास नहीं थे। अत: उसने धीरे से कहा-" मैडम टिशू पेपर तो नहीं हैं। "

    सुनते ही मैडम का पारा सातवें आसमान पर चढ गया। झुँझलाकर बोली-"अरे कैसे दुकानदार हो ? टिशू पेपर तक नहीं रखते।" फिर अपने पति से गुस्से से बोली-" पंकज! मैंने पहले ही कहा था स्ट्रीट वैंडर का कोई स्टैण्डर्ड नहीं होता। देखो न टिशू पेपर तक नहीं हैं इनके पास। स्टैण्डर्ड की शॉप पर टेबिल पर ही टिशू पेपर रखे होते हैं। चलो यहाँ से, सारा मूड खराब हो गया। स्त्री तुनककर चल दी शुभी जाती हुई स्त्री को ठगी सी खडी देखती रही।

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.