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रिश्ता (लघुकथा) -देवी नागरानी

(देवी नागरानी के लघुकथा संग्रह - और गंगा बहती रही से लघुकथाएँ)


१९. रिश्ता (लघुकथा)

अमर अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाकर पढ़ने की इच्छा प्रकट की, साथ में वादे भी किये कि वह पढ़ाई पूरी करते ही वापस आकर दोनों की देखभाल भी करेगा। दोनों बहुत खुश हुए, उन्होंने तमाम उम्र की जमा पूँजी लगाकर उसे विदेश रवाना कर दिया था. वहाँ जाकर अमर जल्दी-जल्दी ख़त लिखा करता था पर जल्द ही खतों की रफ़्तार ढीली पड़ गयी। एक दिन डाकिया एक बडा-सा लिफाफा उन्हें दे गया । ख़त में कुछ फोटो भी थे। ये अमर की शादी के फोटो थे । उसने अंग्रेज़ लड़की के साथ शादी कर ली थी । ख़त में लिखा था - ” पिताजी, हम दोनों आशीर्वाद लेने आ रहे हैं । फ़क़त पाँच दिन के लिए, फिर घूमते हुए वापस लौटेंगे। एक निवेदन भी है कि अगर हमारे रहने का बंदोबस्त किसी होटल में हो जाये तो बेहतर होगा। और हाँ, पैसों की ज़रा भी चिंता न कीजियेगा……!”

दोनों को पहली बार महसूस हो रहा था कि उनकी उम्मीदें और अरमान तो कब के बिखर चुकें हैं । दूसरे दिन तार के ज़रिये बेटे को जवाब में लिखा - ” तुम्हारे खत से हमें कितना धक्का लगा है कह नहीं सकते, उसी को कम करने के लिए हम कल ही तीर्थ के लिए रवाना हो रहे हैं, लौटेंगे या नहीं कह नहीं सकते, अब हमें किसी का इंतज़ार भी तो नहीं । और हाँ, तुम पुराने रिश्तों को तो नहीं निभा पाये, आशा है, नये रिश्तों को जीवन-भर निभाने की कोशिश करोगे"….वासुदेव

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