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न्यायाधीश (लघुकथा) - देवी नागरानी

(देवी नागरानी के लघुकथा संग्रह - और गंगा बहती रही से लघुकथाएँ)


. न्यायाधीश (लघुकथा)

हर रोज़ इक नया सितारा रौशन होता है जब-जब भी ज्ञान-अज्ञान में जंग छिड़ती है. आज भी ऐसा ही कुछ हुआ. पिकनिक का माहौल पूरे उरूज़ पर था. यह जानते हुए कि उसमें शहर के जाने-माने लोग शामिल होंगे, हमारी कंपनी के स्टाफ ने हर तरह से बेहतरीन व्यवस्था की थी.

एक नामी वकील भी अपनी पत्नि सहित जैसे वहाँ पहुँचा तो सभी का ध्यान उसकी पहनी हुई टी-शर्ट की ओर गया जिस पर लिख था....

A good lawyer must know law…

A lawful lawyer must know many judges…

"तो आप बहुत सारे Judges को जानते हैं?" एक साथी ने मुस्कराते हुए कटाक्ष किया

" बहुत तो नहीं, पर उनमें से कुछ को जानता हूँ" वकील साहब ने ठहाका मारते हुए कहा और अपनी पत्नी की ओर देखकर सवाली नज़रों से कहा "तुम तो मुझे जानती हो, तुम्हारा क्या कहना है?"

पत्नी सवाल को नज़र-अंदाज़ न कर पाई और तर्क से बचने के लिए कहा - "उन सब Judges के ऊपर एक Judge और है जो हम सब को जानता है"

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