संस्मरण - मेरी छात्राएं - डॉ. पद्मजा शर्मा

SHARE:

मेरी छात्राएं डॉ. पद्मजा शर्मा किसी शिक्षिका के लिये अपनी छात्राओं के साथ सहेलियों सा व्यवहार कितना सुखदायी होता है ? इसका अनुमान आप पद्मजा...

मेरी छात्राएं

image

डॉ. पद्मजा शर्मा

किसी शिक्षिका के लिये अपनी छात्राओं के साथ सहेलियों सा व्यवहार कितना सुखदायी होता है ? इसका अनुमान आप पद्मजा के इस आलेख से लगा सकते हैं। कक्षा में छात्राओं की मनः स्थिति के अनुसार अध्यापन में नये-नये रंग भरते हुए खासा लचीलापन रखने का काम कोई सधा हुआ अध्यापक ही कर सकता है।

अध्यापन साधना है और आनन्द भी। इसमें केवल डूबने, उतरने की आवश्यकता होती हैऔर तभी कोई अध्यापक अपने अध्यापन को एक सृजनात्मक क्रिया में बदल सकता है। वैसे भी अध्यापन अपने आप में एक सृजनात्मक क्रिया है। यह काम न नीरस है न बोझिल। आपसी रिश्तों में रस घोलने की सामर्थ्य रखने वाला अध्यापक इस काम को आनन्ददायी बना सकता है और अपने लिये एक अप्रतिम जीवनानुभव ।

--

आज आपसे एम.ए. की पत्रकारिता की क्लास व छात्राओं की बात करूंगी। मैं अपनी छात्राओं को पैंतालीस मिनट के पीरियड में कुल मिलाकर पैंतीस मिनट सिलेबस के अनुरूप पढ़ाई कराती थी और उन्हें पढ़ाने के लिए खुद भी पढ़ती थी। आप आश्चर्य करेंगे कि कब कक्षा का समय पूरा हो जाता पता ही नहीं चलता था न लड़कियों, को न मुझे। यह अलग बात है कि मैं घंटी बजते ही किताब बंद कर देती थी। मैं नहीं चाहती थी कि अगले पीरियड वाले टीचर को इंतजार करवाया जाये। मेरा वर्ष भर का निर्धारित सिलेबस समय से पहले ही पूरा हो जाता था और छात्राओं की उस विषय में कोई शिकायत कभी नहीं आयी और उन्हें कोई दिक्कत भी नहीं हुई। न नोट्स की न विषय को समझने की।

छात्राएं चाहती थीं कि उन्हें समझाने के साथ ही विषय के नोट्स भी मिलें। मैं थोड़ा समझाकर नोट्स देती और कभी कोई समस्या आती तो भी किसी एक दिन बैठ कर सारी समस्याओं का समाधान कर देती। छात्राओं को इस विषय में अंक भी आनुपातिक दृष्टि से अन्य विषयों से अधिक ही आते थे। पत्रकारिता में यूं तो विषय विशेष पर कई किताबें मिल जाती हैंपर अच्छी सामग्री कम ही मिलती है। अधिकतर किताबों में दोहराव ही होता है। मौलिक सामग्री की गुंजाइश बहुत कम होती है। मैं कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें खोज खोज कर पढ़ती और नोट्स बनाती थी। यह मेरी आदत है कि कोई काम करो तो मन-मस्तिष्क लगाकर करो। वरना हाथ जोड़ लो।

[post_ads]

मैं अपने लेक्चर के बीच-बीच में छात्राओं को उनके सपनों के बारे में, उनकी पसंद-नापसंद के बारे में, घर के बारे में, आर्थिक परिस्थितियों के बारे में, उनकी मुश्किलों-परेशानियों के बारे में पूछती रहतीथी। उनमें छिपी प्रतिभा को भी मैं टटोलती और तलाशती रहती थी। उनसे कुरेद-कुरेद कर बातचीत करती थी। यह बातचीत सर्वथा अनौपचारिक और आत्मीय होती थी। कक्षा से बाहर और खुले आसमान के नीचे; उनके साथ बैठकर। छात्राएं घुल मिल जाती थीं। संवाद यहां भी शुरु हो जाता था।

कई दृष्टांत और कई उद्धरण याद आते थे। आजादी की लड़ाई में किन हिन्दी पत्रों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आवाज उठायी ? हिन्दी का पहला समाचार पत्र कौन सा था आदि का उल्लेख यदि सिलेबस में था तो मैं छात्राओं से पूछती कि आप कौनसा पत्र या पत्रिकाएं पढ़ती हैं ? नहीं पढ़ती हैं तो ये पत्रिकाएं पढ़ना शुरू कीजिए, उनमें क्या अच्छा लगता है। फिर यह भी पूछती कि किस कॉलम में रुचि है। किस विधा में दिलचस्पी है जैसे कोई कहती हम कहानी पढ़ते हैं। कोई कहती कि मैं कविता पढ़ती हूं। फिर आगे यह सवाल होता कि पढ़ती हैं तो कुछ लिखती भी होंगी जैसे कि डायरी, कविता, कहानी, कोई अविस्मरणीय घटना वगैरह तो लड़कियां पहली बार संकोच करतीं बताने में, पर थोड़ा मोटिवेट करने पर बताती थीं कि, हां हम डायरी लिखते हैं; कि कविता लिखते हैं; कि कहानी लिखना चाहते हैं।

लिखना बहुत लड़कियां चाहती थीं पर उनके पास भावों के अनुरूप भाषा नहीं होती थी। इच्छा के होते हुए भी उनके विचार, भाव मन में ही दबे रह जाते थे। मैं उन्हें तब बताती कि आप साहित्य से अपनी रुचि की विधा से जुड़ी पत्रिकाएं पढ़ें, समाचार पत्र में यह कॉलम पढ़ें, फलां लेखक की फलां रचना पढ़ें कुछ समय बाद उनसे फिर पूछती किस- किस ने क्या पढ़ा, नहीं पढ़ा तो पढ़ें। अगर क्लास में पच्चीस लड़कियां हैं तो उनमें कम से कम पांच छः लड़कियां साल की आखिर तक अपनी प्रतिभा, अपनी कहानी, कविता के साथ जरूर सब के सामने आतीं। वे अपने सिलेबस के अनुरूप पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देती थीं। हम बारी-बारी उनसे वे रचनाएं क्लास में जरूर सुनते। इससे मुझे उनके रुझान और उनकी मनः स्थिति को जानने में भी मदद मिलती थी।

उन्हें भी यह लगता था कि वे औरों से थ़ोडी अलग हैं। उनकी सब के बीच में बोलने की झिझक भी कम होती। साल में संबंधित विधा पर प्रतियोगिता भी करवाती थी। इनाम मिलने से उनका उत्साह भी बढ़ता था। साल के खत्म होते होते तो वे लड़कियां खुलकर उस विषय पर बातचीत भी करती थीं। एक लड़की ने एक दिन कहा कि वह अपनी कविता नहीं सुना सकती। मैंने पूछा क्यों ? उसने झिझकते हुए बताया कि वह प्रेम को लेकर है तो मैंने उसे बताया कि बड़े से बड़ा कवि भी सबसे पहली रचना प्रेम पर ही लिखता है। प्रेम जीवन में है तो इसमें शर्म की कौनसी बात है। यह तो सामान्य क्रिया है जो बताती है कि हम एक सामान्य इंसान हैं। हमारे कवि तो कहते हैं कि वियोगी होगा पहला कवि। आह से उपजा होगा गान। कविता का हृदय से, हृदय का प्रेम से संबंध है जिसे कोई नहीं नकार सकता। बड़े बड़े कवि भी । तो प्रेम कविता लिखना अपराध नहीं है। यह बहुत ही सहज है।

कोई लड़की चाहती थी कि उसे स्कूल में टीचर बनना है तो किसी को कॉलेज में पढ़ाने की इच्छा थी। कोई बैंक के एग्जाम देना चाहती थी तो किसी को यह नहीं पता था कि स्लैट, क्लैट, नैट की एग्जाम कैसे दी जाती है? कहां उनकी तैयारी कराई जाती है ? किस किताब से पढ़ें? किस टीचर से गाइडेंस लें तो उन्हें इस तरह की बातें भी मैं अपनी क्लास में बताती रहती थी। क्लास के बाद कभी कभी फोन पर भी उनकी उलझनें सुलझाती थी।

तब एक ही सोच रहती थी कि इस तरह से पढ़ाया जाए कि छात्राओं को बोरियत न हो। विषय के ज्ञान के साथ ही जीवन में आगे बढ़ने की राह खोजना भी आसान हो। इस तरह की कोशिश भी मैं करती थी। मैं सदा चाहती थी कि छात्राएं मुझे कहें कि आप क्लास कब ले रही हैं कि हमारा फलां फलां पीरियड खाली है क्या आप यह पीरियड भी इंगेज कर सकती हैं ? मैं हमेशा यह चाहती और सोचती थी कि मैं कुछ इस तरह क्लास में खुद को प्रेजेंट करूं कि छात्राओं को लगे कि मैं उनकी दोस्त जैसी हूं । वे बहुत ज्यादा दूरी महसूस ना करें। लेकिन एक निश्चित दूरी भी बनाए रखें जिसके तहत वे मेरी कही जरूरी बातों का खयाल रखें ।

[post_ads_2]

समय-समय पर अचानक लिए गए टेस्ट भी दें, कभी-कभी तैयारी के साथ भी दें। इसके लिए उनकी मानसिकता को समझना जितना जरूरी होता है उतना ही यह भी जरूरी होता है कि वे आप में यकीन करें और आप उन्हें खुद में यकीन करवाएं और यह भी उन्हें लगना चाहिए कि आप कुछ कुछ उन जैसी ही हैं। अगर मैं आज कॉलेज में टीचिंग कर रही हूं तो ये भी कल यह काम कर सकती हैं। बस थोड़े जुनून की, मेहनत की, ईमानदारी की, जरूरत है। जरूरत है विषय के ज्ञान की । रटना जरूरी नहीं, समझना ज्यादा जरूरी है।

वे क्लास में आपके आदेशों की, निर्देशों की पालना करेंगी पर पहले आपको विश्वास जगाना होता है । इसके लिए एक बार मैंने उन्हें अपनी एक कमजोरी भी उनके साथ बांटी कि मुझे सन् याद नहीं रहते। एक दिन सारे पत्रों के नाम सन् सहित बताए फिर लिखवाए।

उस दिन एक लड़की बड़ी मायूस होकर लेक्चर समाप्त होने के बाद मेरे पास आयी और बोली मैम हम भी आपके जैसे लेक्चरर बनना चाहते हैं पर यह संभव नहीं हो सकता। हम बन नहीं सकते। कम से कम आपके जैसे तो नहीं। मैंने पूछा ऐसा क्यों कहा और क्यों सोचा आपने ? उस लड़की ने बड़ी मासूमियत से कहा मैम आपको इतने नाम और सन् याद रह जाते हैं। हमें तो ये सन् याद ही नहीं रहते हैं। आज याद किये भूल गये इस डर से तो हमने इतिहास विषय नहीं लिया वरना उसमें हमारी रुचि कम न थी। तब मैंने उसे समझाया कि मैं तो जब क्लास में आती हूं तब आप लोगों के लिए याद कर के आती हूं वरना सन् तो मुझे भी कहां याद रहते हैं। चार दिन बाद पूछोगे तो मेरी भी हालत आपके जैसी ही होगी। तब मैंने उसे कहा कि आप एक दिन मुझसे अच्छी टीचर साबित होंगी यह मैं अपने अनुभव से कहती हूं क्योंकि आपको अपनी कमजोरी का अहसास है। तब उसने यह निश्चय किया कि वह लेक्चरर ही बनेगी। उसका खोया उत्साह लौट आया वह पहले से ज्यादा रुचि से पढ़ने लगी।

असल में तब मेरे पास समय की कमी रहती थी। मैं छात्राओं को जिस समय क्लास के लिए बुलाती वे आती थीं। पीरियड लगातार पढ़ाती तो भी शौक से पढ़ लेती। मैं उन्हें यह अहसास कराती कि वे मेरे लिए खास हैं । मैं जानती थी कि उन्हें मेरी क्लास में पढ़ने में आनंद आता था। उन्हें पढ़ने में आनंद इसलिए आता था कि मुझे पढ़ाने में आता था। मुझे इसलिए आता था कि मैं उन्हें पढ़ाने के लिए पढ़ती थी। वे बहुत अच्छी, प्यारी न्यारी छात्राएं थीं। उनकी यादें जुगनुओं- सी मेरे जीवन में चमकती रहती हैं।

---

जोधपुर

--

image

(अनौपचारिका - फरवरी 2012 से साभार प्रकाशित)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: संस्मरण - मेरी छात्राएं - डॉ. पद्मजा शर्मा
संस्मरण - मेरी छात्राएं - डॉ. पद्मजा शर्मा
https://drive.google.com/uc?id=1S-Bprrcsp4VN1JTm54r62ZQLgbUID01A
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_0.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_0.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content