किवड़ीया - मूल लेखिका – डॉ॰ हिमांशी शेलत - अनुवादिका - डॉ॰ रानू मुखर्जी

SHARE:

किवड़ीया मूल लेखिका – डॉ॰ हिमांशी शेलत अनुवादिका - डॉ॰ रानू मुखर्जी “मूई, ऐसी की ऐसी ही मरने वाली है, आज चार दिन हो गए तेरे पेट में चुभ नहीं ...

किवड़ीया

मूल लेखिका – डॉ॰ हिमांशी शेलत


अनुवादिका - डॉ॰ रानू मुखर्जी

“मूई, ऐसी की ऐसी ही मरने वाली है, आज चार दिन हो गए तेरे पेट में चुभ नहीं रहा है क्या? ये सारे कितनी मज़े से जाती है दिखता नहीं, तू अकेली ही बड़ी शर्मवाली आई है.....

माँ को बडबडआती देख सावली बड़ी मुश्किल से उठ खड़ी हुई, दो दिन पहले ही उसे तेज बुखार था, नाले के उस पार जाने के नाम से ही उसके हाथ पाँव ठंडे हो जाते हैं। कीचड़ वाला फिसलन भरा रास्ता, गंदे पानी के गड्डों से बचते-बचाते दूर झाड़ियों के पीछे तक जाना पड़ता है। वहाँ फिर लोगों के पाँव तले मसली हुई कीचड़ से लिथड़ी घास, ऐसे में सही जगह ढूंढकर बैठना भी - - - । कभी पैरों में केंचुए लिपट जाते हैं और कहीं मेंढक फुदकता हुआ दिखता है तो चींख निकाल जाती है। आँख मूंदकर जान हथेली पर लेकर निपटना पड़ता है। पता नहीं कैसे सावंती और देवु को इसमें कुछ भी खराब नहीं लगता है। जगह देखी और फट से बैठ गई।

“जगह दिखते ही बैठ जाना, कीचड़, फांदकर दूर तक नहीं जाना समझी, यहाँ ताकने के लिए किसे फुर्सत है - - -“ फिर खीसें निपोरती हुई कहती है, “सब अपना-अपना कर रहे होते है किसके पास वक्त है जो ताक-झांक करेगा - - -।“ सेवन्ती तो है ही नफ़्फ़ट।

अंधेरे को चीरकर भोर का उजाला फूटते ही पगडंडियों में से सरकते हुए साये नज़र आने लगते हैं। ऐसे में मामला बड़ा रहस्यमय लगता तो है पर इसमें कोई दम नहीं होता हैं। नाले के आस-पास में रहने वाले लोग इस ऊबड़-खाबड़ ज़मीन का उपयोग केवल इस काम के लिए ही करते है। इससे किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ता है केवल शर्म की दम सवली को ही खुले खेतों में जाने से डर लगता है।

“सवली की माँ कहती कि इसे भी अपने साथ ले जाओ, पर बाप रे बाप सवली तो बहुत नखरे वाली है, यहाँ नहीं तो वहाँ भी नहीं, आगे और आगे बढ़ते जाओ तो फिर उसे कहीं एक कोना बैठने लायक लगता है”।

“अरी ओ री - - - इतना आगे कहाँ चली, जीव जन्तु चिपक जाएंगे पाँव में - - -।”

ऐसे में सवली को रोकना पड़ता था। झड़ियों के पीछे अपने को छुपाकर बैठी तो थी पर थोड़ी भी आहट हुई नहीं कि फट से उठ खड़ी होती थी। उसे सर पर खुला आसमान तांगा दिखता और नीचे एक छोटा सा गड्ढा खोह जैसा लगता। जब गाँव में रहती थी तो उसका बाबा उसको और बुधिया को बाहर खटिए पर सुला देता था। और रात को एकाएक जब चौंककर जग जाती तो बाबा आस पास कही होते ही नहीं थे। खोली का दरवाजा तो बंद होता। पर दूर से सियारों के रोने की आवाज, नीचे गिरती टहनियों से झरते पत्तों की तेज आवाज, नजदीक की बोडियों के घास में से कुछ सरकने का एहसास लगातार उसे होता रहता। ऐसे में अंधेरा उसे निगल लेगा ऐसा लगता, और सर्दी की ठंडी रात में भी वह पसीने से सराबोर हो जाती। एक बार तो वह डर के मारे दौड़कर दरवाजा पीटने लगी थी और बाबा ने जब निकालकर देखा कि कहीं कुछ भी तो नहीं है फिर उसे ज़ोर का एक थप्पड़ लगाया था। पर उसे उतनी ज़ोर से भी नहीं मारा क्योंकि तभी बाबा गहरी नींद में से उठे थे।

उसके बाद से उसे दरवाजा ठोककर माँ – बाबा को जगाने में देर लागने लगा था और वह ऐसी काली अंधेरी रात को अकेली खाट पर पड़े – पड़े खुली आँखों से ताकती पसीने से सराबोर होती रहती। बुद्धियो तो अभी छोटा है इन सबसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह तो आराम से सोता रहता है।

यहीं शहर का माहौल ही कुछ अलग है। दिन-रात सारी बस्ती खदबदाती रहती हैं। ऐसे में खुल्ले में ही पानी से भरा डब्बा लटकाते हुए सब - - -। छोटी चाची एक बार उसे पक्के पाखाने में लेकर गई थी। वहाँ जानेवालों की लंबी लाइन होने पर भी एक बात की सहूलियत तो थी कि दरवाजा अंदर से बंद होता था। ये तो अंदर जाने के बाद पता चला कि दरवाजा तो केवल नाम के वास्ते ही था सांकल का तो नामों निशान ही नहीं था। उसने चोटी चाची और पनी से बार-बार यह ध्यान रखने के लिए कहा था कि कोई दरवाजा खोल न दे। पर दोनों तो हंसी ठट्टा में इतना खो गई कि उसकी बात को भूल ही गई और तब एक तगड़े से मुच्छड़ ने धड़ाक से दरवाजे को खोल दिया। वह तो अंदर जम सी गई, फिर उठकर खड़ी हुई तो उसके पैर कांप रहे थे। वो नालायक तो बाहर खड़ा हंस रहा था, आँख मारी हो ऐसा भी लगा। फिर रास्ते में उससे मिलते ही सवली इधर-उधर देखने लगती।

अष्टमी की रात को दयाजीनगर में सिनेमा दिखाया गया। आधी सिनेमा तो नींद के झोखे में बीत गई पर गुलाबी टाइल्सवाले बाथरूम और साबुन के बुलबुलों में लिपटी पारियों के जैसी लड़कियां याद रह गई। सेवन्ती ने कहा कि बंगलों पर के बाथरूम तो ऐसे ही होते हैं। शायद इसीलिए वो बंगलों में काम करने जाती है। यहाँ पर चार खूँटों पर तो इतना घिसा हुआ बोरे का टुकड़ा लटकता रहता है कि कपड़ा खोलकर नहाया ही नहीं जाता। हर वक्त डर लगा रहता है कि कोई देख ले तो या फिर कोई देख न रहा हो। पिछले भाग पर ही कारख़ाना जाने का रास्ता है। लगातार साईकल – स्कूटरों का आना जाना लगा रहता है। निठल्ले छोकरे सीटी बजाते हुए हैरान करते रहते हैं, मवालियों की तरह, इसलिए अंदर होने पर भी ऐसा लगता है कि जैसे खुले में ही लोगों के सामने नहा रहे हों। सेवन्ती और मुमताज़ तो पाँच-छ: महीने पर सर धोती हैं कहती कि इन दिनों में बाहर जाना बहुत झंझट का काम है। अपने को सब रोक कर रखना पड़ता है। फिर वो तो बंगले पर जाती हैं वहीं पर सब निपटा के आती होगी। पनी कहती थी कि उसको भी ऐसा हे होगा। ऐसा ही मतलब हर महीना गंदा-संदा - - फिर तो क्या पता कितना खराब होगा। अभी से ही तो - -।

“इस भोंदू को तो रोज-रोज साबुन चाहिए। कमाने की बात करो तो एक पैसा भी नहीं लाती। घर में भी सबसे ज्यादा नखरे तो इसके ही होते हैं। फिर साबुन भी घासती तो इतना है कि हफ्ते में ही घिसकर चिंदी सी हो जाती है।“

मैदान में मेला लगा है। बस्ती के सारे लोग उस ओर दौड़ रहे हैं। दो-चार दिन से पन्नी और सेवंती उसके पीछे पड़ गई हैं पर माँ की ना तो ना। उसने सोचा माँ सोचती होगी मेले जाएगी तो सवली पाँच रुपया खर्च करके ही आएगी उससे न ही जाए तो अच्छा - - सेवंती के तो उसकी अपनी कमाई के पैसे हैं किसी से पूछने – कहने की उसे जरूरत ही नहीं।

फिर तो माँ मान गई। उसने सुंदर से अपने बाल काढ़े, चेहरे पर पावडर चुपड़ा और सेवंती की उंगली थामकर मेले के भीड़ में घुल मिल गई। जान से पहले माँ ने दस बार कहा कि एक दूसरे का हाथ थामें रहना नहीं तो भीड़ में खो जाओगे। फिर एक दूसरे को ढूँढने में ही रात हो जाएगी। अंधेरा होने से पहले ही आ जाना, एक जगह पर ज्यादा देर तक खड़े मत रहना। चूड़ियों और बिंदियों की लरियों की कतार पर लोग उबाल पड़ रहें थे। ठसाठस भीड़ और शोर गुल से भरा माहौल। समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। भागमभाग और लोगों का चीखना भी सुनाई नहीं दे रहा था। खड़े-खड़े वह रोने-रोने को हो गई कि किसी भली औरत ने उसका हाथ थाम लिया। भीड़ में से उसे संभालकर बाहर खींच लाई और उसके बारे में पूछ-ताछ करने लगी।

“दयालजीनगर? चल छोड़ आऊँ, डर मत”। भीनी आँखों को कोरे फ्रॉक से पोंछकर वह उस औरत के साथ चलने लगी। रिक्शे में बैठने के बाद औरत ने कहा, “पहले जरा घर जा कर बता दे, बाद में तेरे घर चलेंगे, तुझे जल्दी नहीं है न”?

उसने सर हिलाया। गली कूँची और झिलमिलाती दुकानों के बीच में सड़सड़ाट रिक्शा चल रही थी। न जाने कितने दरवाजे बंद और न जाने कितनी खुली, सब अंजाने, पर उसे डर नहीं लगा। वह औरत अच्छी थी शायद इसलिए भी। एक जगह पर आकार रिक्शा रुक गई। बहुत बड़ा मकान, बड़ा बरामदा, विशालकाय मजबूत दरवाजा।

बीच में चौक था। ऊपर छोटी-छोटी खिड़कियों में से दो-चार चेहरे झलके फिर खिड़कियाँ बंद हो गई। इतनी बड़ी जगह है, इसमें में बहुत सारे लोग रहते होगे। इधर-उधर ताकती हुई वह खड़ी रही।

न जाने किधर से हंसने की, गाने-बजाने की दबी-दबी सी आवाजें आ रही थी। ऊपर तो कुछ दिख नहीं रहा था। खोलियों का दरवाजा बड़ी मजबूती से बंद था और जो खुला था वह लाल गुलाबी फूल वाले पर्दों से पूरा का पूरा ढंका हुआ था। अंदर का कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था।

“आती हूँ अभी, फिर चलेंगे तेरे घर छोड़ने के वास्ते। - - -” इधर-उधर जाते हुए औरत ने कहा।

ढूंढती होगी उसे सेवंती भीड़ में। अब तक तो सब घर पहुँच चुके होंगे, माँ की चीख-चिल्ला रही होगी। माना करती तो अच्छा था, भीड़ में कौन उसे ढूँढने जाएगा। इतनी बड़ी छोकरी भीड़ के इस भाग दौड़ में न जाने कहाँ - - - -। माँ उसे घोड़ी जैसी छोकरी कहती।

अचानक उसे पेट में मरोड़ जैसा उठा। थोड़ी भूख और प्यास तो लगी ही थे। अब यह पेट का झंझट, झंझट नहीं तो क्या? तीन दिन से टालती आ रही थी - - - जाना तो है। औरत बाहर आए तो उससे पूछकर जाएगी। इतने बड़े घर में होगा तो सही सब कुछ। यहीं सब कुछ निपटा लेती हूँ तो कल के फिर कोई खिट पिट नहीं।

पेट में अब कुछ गोल-गोल सा घूम रहा था। वह घबरा गई। अब बाई के बाहर आने भर की देर है कि तुरंत - - - इन सब बातों के लिए कोई ना कोई थोड़े ही करता है? बस उसे देखते ही पूछा।

“हाँ, हाँ अरे मौनी जरा उसे - - -”

चौक के एक तरफ दो बड़े-बड़े बाथरूम, सुंदर मखमली गुलाबी और आसमानी रंग वाले उस फिल्म में देखा हुआ बाथरूम याद आ गया। एकदम साफ सुथरा, दरवाजा ठीक से बंद होने वाला, पक्का मजबूत दीवालों वाला - - - इसमें निपटाना है? वो सब इसमें जाती होंगी?

आंखें फाड़-फाड़कर वो दरवाजा और उसके उसके सांकल को देख रही थी। दरवाजे के बंद होने पर बाहर के सब बाहर ही रह जाते हैं - - - फिर अपने को तो अंदर में कोई डर नहीं, किसी से वह खुलेगा भी नहीं, किसी को कुछ दिखेगा भी नहीं, कोई झंझट नहीं।

“जा अंदर - - -”

हरखाती, वह जमीन से थोड़ी ऊपर उठ गई, जैसे उड़ रही हो, जैसे सपने में चल रही हो वैसे अंदर दाखल हो गई और उसके पीछे दरवाजा बंद हो गया। खटाक से।

--


डॉ॰ रानू मुखर्जी


एच॰ टी॰ रोड, सुभानपुरा

बड़ौदा – 390 023


E-mail – ranumukharji@yahoo॰co॰in

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: किवड़ीया - मूल लेखिका – डॉ॰ हिमांशी शेलत - अनुवादिका - डॉ॰ रानू मुखर्जी
किवड़ीया - मूल लेखिका – डॉ॰ हिमांशी शेलत - अनुवादिका - डॉ॰ रानू मुखर्जी
https://4.bp.blogspot.com/-8cWC6wghm5c/XUu4PWi9KGI/AAAAAAABPuc/5h1unjE3UywAaKoSmZypIGbZy5s0e5WsgCK4BGAYYCw/s320/ranu%2Bmukharji%2Bphoto.-750054.jpg
https://4.bp.blogspot.com/-8cWC6wghm5c/XUu4PWi9KGI/AAAAAAABPuc/5h1unjE3UywAaKoSmZypIGbZy5s0e5WsgCK4BGAYYCw/s72-c/ranu%2Bmukharji%2Bphoto.-750054.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_14.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_14.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content