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हाथी का मोबाइल - खेमकरण 'सोमन' की आठ बाल कविताएँ

खेमकरण 'सोमन' की आठ बाल कविताएँ

1.
इस दीवानी गरमी से
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फिर तो बुरा हाल हुआ
इस दीवानी गरमी से,
जीना भी मुहाल हुआ
इस दीवानी गरमी से।

पहले मैंने सोचा शायद,
गरमी एक-दो पल की है,
अभी-अभी ना समझ
यह बालिका कल की है।

लेकिन भ्रम टूटा मेरा
देख इसकी हठधर्मी से,
फिर तो बुरा हाल हुआ
इस दीवानी गरमी से।

बरखा रानी बरस न पाई
लोग बेचारे त्रस्त हुए,
गरमी-गरमी, पानी-पानी
कहते-कहते पस्त हुए।

जीव-जन्तु पर कहर ढा
हँसती रही बेशर्मी से,
फिर तो बुरा हाल हुआ,
इस दीवानी गरमी से।

2.
मीठे बोल बनाना तुम
--
कोयल बोली गाँव में,
पेड़ के नीचे छाँव में।

मीठे बोल बनाना तुम,
रूठे को मनाना तुम।

होश न खोना ताव में,
कोयल बोली गाँव में।

कभी किसी से लड़ना मत,
लड़ना मत, झगड़ना मत।

सुंदर बन स्वभाव में,
कोयल बोली गाँव में।

3.
हाथी का मोबाइल
--
हाथी भइया हाथ में लेकर
दिखाए मोबाइल,
कभी यहाँ पर कभी वहाँ पर
झाड़े खूब स्टाइल।

बात करे घण्टों के घण्टे
बिल फिर तगड़ा आया,
तगड़ा बिल देखकर हाथी
तेजी से चकराया।

हथिनी बोली-समझ गई मैं
उठाई डंडे को,
हाथी ने मोबाइल बेचा अब
उसी दिन संडे को।

4.
कर रहे हो शादी क्या
-
एक दिन परी रानी बोली
कर रहे रहे हो शादी क्या ?

मैंने कहा- नहीं- नहीं जी
सबसे पहले बात होगी,
मैं नाचूँगा तुम नाचोगी
सुंदर सी बरात होगी।

लेकिन मुझे बताओ तुमने
देखी कोई शहजादी क्या ?

लड़की होगी रूप की रानी
फूलों की तरह हँसती होगी,
कोयल जैसी गाने वाली
दिल में सबके बसती होगी।

मैं उसी से करुँगा शादी
करोगी तुम मुनादी क्या ?

परी बोली-मजा आ जाएगा
मैं तुम दोनों को बुलाऊँगी,
परीलोक में तरह-तरह के
व्यंजन खूब खिलाऊँगी।

मम्मी बोली-पढ़-लिख ले कुछ
इतनी जल्दीबाजी क्या !

5.
ले लो जूस के पैसे तुम
--
मैंने सोचा चन्दा मामा जी
चमके अपनी रोशनी से,
जब घर आए/जूस पिलाया
तीन-चार गिलास मौसमी के।

जूस पीकर चाँद मामा बोले
सच-सच बात बताऊँ मैं,
मैंने कहा बिलकुल-बिलकुल
और क्या जूस पिलाऊँ मैँ।

मामा बोले नहीं-नहीं अब
गलत नहीं मैं बोलूँगा,
बात सुनकर मुझे मारोगे तो
झूठ-मूठ का रो लूँगा।

सभी समझते हैं मैं चमकूँ
अपने आप ही रोज मैं,
आसमान में घूम-घूमकर
करता हूँ खूब मौज मैं।

लेकिन प्यारे बात समझना
मैं भी एक इनसान हूँ,
मैं चमकूँ सूरज के कारण
तभी तो ज्योतिवान हूँ।

अब यदि तुम्हें बुरा लगा तो
ले लो जूस के पैसे तुम,
मैंने कहा- मेरे मामा होकर
अब सोचोगे ऐसे तुम !

6.
स्याही कलम दवात
--
कलम मेरी खूब चलती रही
जब तक स्याही पास रही,
लेकिन स्याही के खत्म होते ही
दुखित रही-उदास रही।

तभी दवात आकर बोली
स्याही का भंडार हूँ मैं,
जितना चाहिए उतना ले लो
कलम के बिन बेकार हूँ मैं।

मैंने कहा-धन्यवाद प्रिय
बात यही आज खास रही,
कलम मेरी खूब चलती रही
जब तक स्याही पास रही।

7.
एक अति उत्तम गुण है
--
राह में कभी चीज़ मिले
जिसका है पहुँचा दो,
काम ईमानदारी का है
अतः स्थान ऊँचा दो।

वही व्यक्ति सच्चा है
जिस पर ये धुन है,
ईमानदारी जीवन में
एक अति उत्तम गुण है।

8.
सबसे सुंदर बात कहो
--
दस को दस से भाग करो
जीवन में कुछ त्याग करो।

अरब-खरब को जोड़ों तुम
बुरे पथ सब छोड़ो तुम।

सौ को सौ से गुण करो,
मत झल्लाओ सुना करो।

पाँच को पाँच से घटा दो
सभी बुराईयाँ हटा दो।

फिर यहाँ अनुपात करो
सबसे सुंदर बात करो।
-
खेमकरण 'सोमन'
द्वारा श्री बुलकी साहनी,
प्रथम कुंज, अम्बिका विहार, ग्राम व पोस्ट-भूरारानी, रुद्रपुर, जिला- उधम सिंह नगर, उत्तराखंड-263153

ईमेल : khemkaransoman07@gmail.com

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