---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

चौपाल पर कबीर - तेजपाल सिंह ‘तेज’ -

साझा करें:

बचपन में हमने देखा था कि गांव के बच्चे, जवान और बूढ़े लोग अच्छी-खासी संख्या में रोजाना ही गांव की चौपाल पर एकत्र हो जाया करते थे जिनमें बच्चो...

image


बचपन में हमने देखा था कि गांव के बच्चे, जवान और बूढ़े लोग अच्छी-खासी संख्या में रोजाना ही गांव की चौपाल पर एकत्र हो जाया करते थे जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा होती थी......... बच्चे भी हर उम्र के। चौपाल पर एक बड़ा सा पीपल का छायादार पेड़ हुआ करता था। उसके नीचे कुछ चारपाइयां हर समय पड़ी रहती थीं। गांवभर के मेहमान इसी चौपाल पर आराम किया करते थे। चौपाल पर केवल एक कमरा हुआ करता था जिसमें बारिशों के दिनों में चारपाइयां आदि बिछा दी जाती थीं। सांझ होते ही गांव के एक बुजुर्ग जिन्हें सब काका कहकर पुकारते थे, रोजाना इकतारें पर कबीर दास के पद और भजन आदि सुनाया करते थे। चौपाल पर हाजिर सब जने बड़े ही ध्यान से काका का राग सुना करते थे। कहना गलत नहीं कि गांव में बिना पढ़े-लिखों की तादाद ज्यादा थी। कुछ की समझ में तो उनकी बात आ जाती थी, कुछ के नहीं। वे बस इकतारे की धुन का ही मजा लिया करते थे। मैं भी उनमें से एक था। आज भी काका इकतारे पर कुछ इस प्रकार गा रहे थे...... हमन है इश्क मस्ताना, हमन को होशियारी क्या ? रहें आजाद या जग से, हमन दुनिया से यारी क्या ? / जो बिछुड़े हैं पियारे से, भटकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या ? / न पल बिछुड़े पिया हमसे न हम बिछड़े पियारे से, उन्हीं से नेह लागी है, हमन को बेकरारी क्या ? / कबीरा इश्क का माता, दुई को दूर कर दिल से, जो चलना राह नाज़ुक है, हमन सिर बोझ भारी क्या ?........... काका इसे बड़े ही मजे लेकर गाने में लीन थे किंतु अपनी समझ में जैसे कुछ नहीं आ रहा था। आखिर मैंने काका से पूछ ही लिया, काका आप ये क्या गाते रहते हो? काका अनपढ़ कबीरपंथी थे। उन्होंने अपने अंदाज में शिर्फ इतना कहा कि भैया! ये कबीर दास की....बानी है। उनकी बानी में बड़े जतन की बातें होती हैं। भैया! ..... इससे ज्यादा और पता नाय मोकू। तभी काका की नजर पास में बैठे कन्हैया पर पड़ी। काका अनायास ही कन्हैया से कह बैठे, “ बेटा कन्हैया! तुम बताओं न सबको कबीर दास के बारे में। तुम्हें तो कबीर के बारे में सबकुछ पता होगा ना....”। कन्हैया लाल गांव के मेहमान थे, सोलहवीं तक पढ़े-लिखे थे। शहर में एक बड़े सरकारी ओहदे पर नौकरी करते थे। वे काका को अनदेखा न कर सके और चौपाल पर हाजिर सब जनों का अभिवादन करने के उपरांत अपनी बात इस तरह कहनी शुरु कर दी...........

बंधुओ! यूं तो कबीर दास के दोहे पांचवीं कक्षा से पहले ही पड़ाए जाने लगे थे किंतु उस समय कबीर दास के दोहे मेरे लिए जैसे केवल एक शब्द-श्रंखला भर ही थे। मैं शायद आठवीं कक्षा मैं था, जब मैंने पहली बार कबीर दास के दोहों के अर्थ को कुछ-कुछ समझना शुरु किया और कबीर के दोहों की शब्दावली और शब्दों के प्रयोग से मैं निरंतर प्रभावित होता चला गया। उनका ये दोहा कि .. ‘गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो मिलाय॥’ तो जैसे मेरे जीवन का नारा ही बन गया। जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ तो पाया कि शिक्षा का कोई ऐसा पड़ाव नहीं था कि जब इस दोहे का बार-बार जिक्र न हुआ हो। हां! आठवीं कक्षा में आने तक समाज की नई-पुरानी सोच से मेरा कुछ लेना-देना नहीं था। इससे पहले कि मैं आगे और कुछ कहूँ, कबीर दास का जीवन परिचय जानना जरूरी है।

तो बन्धुओ! कबीरदास का जन्म काशी में सन् 1398 में ज्येष्ठ पूर्णिमा को हुआ था। "नीमा' और "नीरु' कबीर के माता - पिता थे। "नीमा' और "नीरु' पेशे से जुलाहे थे, ऐसा कहा जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि नीमा और नीरु ने केवल कबीर का पालन- पोषण ही किया था । कबीर दास संत रामानंद के शिष्य बने और शिक्षा प्राप्‍त की । कबीर का विवाह 'लोई' के साथ हुआ था । कबीर को कमाल और कमाली नाम की दो संतान भी थी । कबीर सधुक्कड़ी भाषा में किसी भी सम्प्रदाय और रूढ़ियों की परवाह किये बिना खरी-खरी बात कहते थे । उन्होंने हिंदू-मुसलमान यानी समाज में व्याप्त रूढ़िवाद तथा कट्टरवाद् का खुलकर विरोध किया । कहा जाता है कि कबीर ने हिंदू-मुसलमान का भेद मिटा कर हिंदू-भक्तों तथा मुसलमान फकीरों दोनों की अच्छी बातों का अनुसरण किया था। कबीर की वाणी, उनके उपदेश, उनकी साखी, रमैनी, बीजक, बावन-अक्षरी, उलटबासी में देखें जा सकते हैं । बाद में कबीर काशी छोड़कर मगहर चले गये और वहीं सन 1518 में देह त्याग किया। मगहर में कबीर की समाधि है जिसे हिन्दू मुसलमान दोनों पूजते हैं। हिंदी साहित्य में कबीर का नाम बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। मज़हब , समाज , दुनियादारी जैसे विषयों पर उनकी सोच और उसे पेश करने का अंदाज़ बहुत अनोखा था।

दरअसल, कबीर से मेरा असली परिचय बड़ी कक्षा में इतिहास की कक्षा मैं हुआ। हमें भक्ति आन्दोलन के बारे मैं पढाया गया। एक ऐसा आन्दोलन जिसने कट्ट धार्मिक सोच को एक करारा जवाब दिया था। कबीर कठिन धारणाओं को साधारण भाषा मैं कह जाने की कला मैं माहिर थे। उनकी सोच पर समय का कोई प्रतिबन्ध नहीं था, उनकी सोच आज भी उतनी ही मान्यता रखती थी जितनी उस युग में।

साथियो! कबीर सन्त कवि और समाज सुधारक थे। उनकी कविता का एक-एक शब्द असत्य व अन्याय की पोल खोल धज्जियाँ उडाता चला गया। कबीर ने अंधविश्वासों पर बहुत प्रहार किया था। आइए! इस महान संत के कुछ अविस्मरणीय दोहो का आनंद लेते हैं। मेरा प्रयास है कि कबीर के दोहों के साथ-साथ उनके अर्थ का बखान भी किया जाय ताकि कबीर की बाणी को ठीक से समझा जा सके। तो कबीर कहते हैं – “ बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।” इस दोहे में कबीर कहते हैं कि जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई भी बुरा नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने मन में झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा कोई और है ही नहीं।

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। कबीर कहते हैं कि बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुँच गए अर्थात मर गए किंतु सभी विद्वान न हो सके। कबीर मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले, अर्थात प्यार का वास्तविक अर्थ पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा।

अगला दोहा – साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।यानी इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप(छाज) होता है जो अच्छे-अच्छे( सार्थक) को बचा लेता है और खराब-खराब (निरर्थक) को उड़ा देता है।

मुसलमानों की अंधभक्ति पर कबीर कुछ इस प्रकार प्रहार करते हैं- काँकर पाथर जोरि कै, मस्जिद लई बनाय। ता चढ़ मुल्‍ला बांग दे, बहिरा हुआ खुदाए इसका अर्थ तो अपने आप ही साफ है। इतना ही नहीं, हिन्दुओं की अंधभक्ति पर भी कबीर चुप नहीं रहते – पाहन पूजे हरि मिले, तो मैं पूजूँ पहाड़। ताते तो चाकी भली, पीस खाए संसार॥ कबीर कहते हैं कि यदि पत्थर की पूजा करने से हरि मिलते हों तो मैं पहाड़ ही पूजने को तैयार हूँ अर्थात पत्थर पूजने से कोई हरि नहीं मिलते। इससे तो घर की चक्की भली है जिससे अनाज पीस कर जो आटा बनता है उसे खाकर संसारभर जिन्दा तो रहता है। ऐसे थे कबीर जिनके दिल में साफ बात करने का खासा जज़बा था। वास्तव में संत कबीरदास "हिंदी"साहित्य" "भक्ति काल"" के इकलौते ऐसे कवि हैं, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ़ झलकती है। - बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि। हिये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि॥, अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥, काल्‍ह करै सो आज कर, आज करै सो अब्‍ब। पल में परलै होयगी, बहुरि करैगो कब्‍ब॥", निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।तथा जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ग्‍यान। मोल करो तलवार के, पड़ा रहन दो म्‍यान।।
बच्चो! लोक कल्याण हेतु ही मानो उनका समस्त जीवन था। कबीर को वास्तव में एक सच्चे विश्व - प्रेमी का अनुभव था। कबीर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनकी प्रतिभा में अबाध गति और अदम्य प्रखरता थी। समाज में कबीर को जागरण युग का अग्रदूत कहा जाता है। कबीर साहेब ने दोहों के अलावा पद और साखियों आदि की भी रचना की थी जिनका गान आज भी गांव-गांव कबीरपंथी बड़े ही मन से करते हैं। इकतारा उनके इस गान और रंग भर देता है। उनके गान को सुनने गांव भर के बालक-बच्चे और बड़े बड़ी संख्या में चौपाल पर जमा हो जाते हैं। उनका यह् पद दुनियादारी की खासी व्याख्या करता है -

रहना नहीं देस बिराना है।/ यह संसार कागद की पुड़िया, बूँद पड़े घुल जाना है। / यह संसार काँटे की बाड़ी, उलझ-पुलझ मरि जाना है।/ यह संसार झाड़ और झाँखर, आग लगे बरि जाना है।/ कहत कबीर सुनो भाई साधो, सतगुरू नाम ठिकाना है।”

आपको यह जानकर हैरत होगी कि कबीर ने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में रचना की थी। उनके भजन, पद, साखियां आदि आज भी जनता की जुबान पर राज करती हैं। कबीर भक्तिकाल के एक ऐसे कवि हैं जिनको जनकवि कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा। यूं आजकल चौपालों पर पहले जैसा जमावड़ा नहीं होता किंतु उनका ये भजन यदाकदा गली-कूचों में भिक्षा मांगने वालों की जबानी सुनने को मिल ही जाता है। कन्हैया ने काका से मुखातिब होते हुए काका सुनाओ नो - झीनी झीनी बीनी चदरिया.... आपको तो पूरा याद होगा। काका को तो मौका चाहिए था..... हो गए शुरु........ झीनी झीनी बीनी चदरिया / झीनी झीनी बीनी चदरिया॥ टेक॥/ काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया॥ १॥/ इडा पिङ्गला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया॥ २॥/ आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त्व गुन तीनी चदरिया॥ ३॥/ साँ को सियत मास दस लागे, ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया॥ ४॥/ सो चादर सुर नर मुनि ओढी, ओढि कै मैली कीनी चदरिया॥ ५॥/ दास कबीर जतन करि ओढी, ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया॥ ६॥

बच्चो! सारांश

में कह सकते हैं कि कबीर के काल में जब आम जनमानस नाना प्रकार की प्रचलित धर्म साधनाओं के फेर में पड़ अंधविश्वासों के जाल में फंसा था, तब कबीर ने अपनी भक्ति का ऐसा आधार जनता को दिया कि वह निर्गुण निराकार राम के रस में भावविभोर हो उठी। कबीर कहते हैं -'' कस्तूरी कुण्डल बसै, मृग ढूंढे बन माहिं।/ ऐसे घट घट राम हैं, दुनिया देखे नाहिं।।'', “' जल में कुम्भ, कुम्भ में जल है, बाहर भीतर पानी।/ फूटा कुम्भ जल जलहि समाना, इहिं तथ कथ्यौ ज्ञानी।।'' कबीर हर धर्म की अच्छाईयों से प्रभावित हुए और हर धर्म की बुराइयों पर उन्होंने प्रहार किये और उन्हें जनचेतना के द्वारा दूर करने का प्रयास किया। आगे फिर कभी ......... हाँ! ये सब पढ़ने वाले बच्चों आगे चलकर अपने पाठ्यक्रम में भी मिलेगा।

<><><>

तेजपाल सिंह तेज’ (जन्म 1949) की गजल, कविता, और विचार-विमर्श की लगभग दो दर्जन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं - दृष्टिकोण, ट्रैफिक जाम है, गुजरा हूँ जिधर से, हादसो के शहर में, तूंफ़ाँ की ज़द में ( गजल संग्रह), बेताल दृष्टि, पुश्तैनी पीड़ा आदि (कविता संग्रह), रुन - झुन, खेल - खेल में, धमाचौकड़ी आदि ( बालगीत), कहाँ गई वो दिल्ली वाली ( शब्द चित्र), पांच निबन्ध संग्रह और अन्य। तेजपाल सिंह साप्ताहिक पत्र ग्रीन सत्ता का साहित्य संपादक, चर्चित पत्रिका अपेक्षा का उपसंपादक, आजीवक विजन का प्रधान संपादक तथा अधिकार दर्पण नामक त्रैमासिक का संपादक भी रहे हैं। स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त होकर आप इन दिनों स्वतंत्र लेखन के रत हैं। हिन्दी अकादमी (दिल्ली) द्वारा बाल साहित्य पुरस्कार ( 1995-96) तथा साहित्यकार सम्मान (2006-2007) से भी आप सम्मानित किए जा चुके हैं।

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4039,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3001,कहानी,2254,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,541,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1248,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,793,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,83,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,204,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: चौपाल पर कबीर - तेजपाल सिंह ‘तेज’ -
चौपाल पर कबीर - तेजपाल सिंह ‘तेज’ -
https://drive.google.com/uc?id=17kl88PxKnjYElfbJ0B6EPgJG1bZgIKuK
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_31.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/08/blog-post_31.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ