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मुशायरा और सम्मान समारोह - अहले नफ़रत को है यह खतरा फिर......

भोपाल। हिंदी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष में मुशायरा और सम्मान समारोह आयोजित किया गया। करवाने इल्म ओ फ़न की ओर से उर्दू अकादमी गज़ल कक्षा के बच्चों की ओर काजी मलिक नवेद द्वारा शायरा डॉ. नुसरत मेहंदी का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक साहित्यकारों, गज़लकारों, शायरों और कवियों ने शिरकत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर ज़फ़र नसीमी ने की, जबकि मुख्य अतिथि डॉ नुसरत मेहंदी और विशेष अतिथिं ज़फ़र सहबाई, इक़बाल मसूद और ज़िया फ़ारूक़ी रहे। मुशायरा और सम्मान समारोह का संचालन क़ाज़ी मलिक नवेद, और शोएब अली ने किया।

शायर काजी मलिक नवेद ने कहा :- ‘‘अहले नफ़रत का ेहै यह खतरा फिर, लिख न दूं मैं अलीफ़-लैला फिर’’ शायर रिज़वान अयाज़ ने पढ़ा-

‘‘थे यह जमीं हमारी ये आसमां हमारा, है आज भी यहां पर सिक्का खां हमारा’’ प्रद्युम्न शायर ने कहा :- ‘‘पास आते ही किनारा कर लिया, जाने क्या तुमने इरादा कर लिया।’’ इसी क्रम में शायर मयंक ने कहा ‘‘परख लेना परखने में कोई खतरा नहीं रहता, हमें जैसा नजर आता है सब वैसा नहीं रहता’’ मोहम्मद रईस ने पढ़ा ‘‘देखते ही नजर आशना हो गई, मिल गई वह बशर आशना हो गई,’’ कमलेश गुल ने कहा : ‘‘हिंदी और उर्दू की बेटी बनकर हरदम रहती नुसरत’’ प्रेमचंद प्रेम ने पढ़ा ‘‘कहां हम जहां के अलम देखते हैं, जहां देखते हैं शुभम देखते हैं,’’ शिवराज आजाद ने कहा :-

मुफलिसी रोशनी नहीं देगी, दूज की रात चांदनी नहीं देगी। परवीन खान परवीन ने पढ़ा :-

‘‘पहलू में आ गए मेरे सर व समन तमाम, मुट्ठी में जब से आए हैं गुल पैरहन तमाम’’ नवोदित शायरा खुशबू ए फातिमा ने कहा :-

‘‘शाकिए जुल्मकोर हैं हमदम, ताकि दिल पर रखे हुए है गम’’ अहमद अली ने पूछा कि :-

‘‘हर तरफ साजिशें और खंजर हैं क्यूं, आंखें वीरान हैं दिल भी पत्थर हैं क्यूं’’ मुबारक शाहीन ने कहा :- ‘‘बंद आंखों से अजब आज नजारे देखे, रात भर दोस्त फ़ख़त ख्वाब तुम्हारे देखे’’ अनवर मोहम्मद शान ने पढ़ा :-

सारी दुनिया से जुदा ये मेरा हिंदुस्तान है, खुशनुमा इसकी फजां ये मेरा हिंदुस्तान हैं। शायर असर ने पढ़ा :

- असलेहत कहती है तुम झूठ लिखो, झूठ लिखो, सच ही लिखना है के शायर हूं अजब उलझन है। नौमान गाजी ने पढ़ा : ‘‘है धुन की पक्की अटल इरादा, खुलूस दिल में मिजाज सादा, तलाशे जौहर से जश्ने उर्दू, कहा है कम और किया है ज्यादा’’ अशफाक मोहम्मद ने पढ़ा :-

‘‘दरमियां फासले गर अपने कभी, दूरियां पल में मिटायेंगे ये वादा कर लें’’ समीना कमर ने कहा :-

‘‘देखने से लगता है वो भी गमजदा शायर, हम भी लापता से हैं वो भी लापता शायर’’ फरहान मंजर ने पढ़ा ‘‘ढूंढा है इज्तेराब में हमने सुकूने दिल, इस आगाही का कुछ तो अब इनाम चाहिए।’’

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