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जो पल पल का रंग कुछ बदल रहा - संजय कर्णवाल की कविताएँ

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जो अँधेरे है, राहों में तुम मशाल जलाओ।
सबके मन में एक नई उम्मीद जगाओ।।
चलता रहा वक़्त का सिलसिला हमेशा
वक़्त की हर जरूरत खुद बन जाओ।।
सोचता हूँ मैं हर बात को इस तरह ।
सारी बातों को ढंग से अच्छे समझाओ।।
आती रही जो राहों पर दिक्कतें अपनी
सारी दिक्कतों को सोच समझकर सुलझाओ।।

2
वक़्त की हर बात को समझो।
बदलते हुए हालात को समझो।।
चलते हैं जो हमेशा सोच समझकर
उनके तुम जज़्बात को समझो।।
देखा करते हैं जो दूर तलक
उनकी तुम हर बात को समझो।।
सोचा जो जिसने हरदम अच्छा
तुम उस अच्छी शुरुआत को समझो।।

3

जो दिल की तमन्ना है,उसे कैसे बताएं।
दिल के अरमानों को कोई कैसे छिपाएं
  कही रुक जाती है, दिल की बातें यूँ ही
दिल की सारी बातों को कैसे बताएं।।
दुनिया के रंगों में रंग जाने दो खुद को
दिल की दुनिया में घर कैसे बनाएं।।
जो कहना चाहता है दिल सुनो ज़रा
दिल की आवाजों को कैसे सुनाएं।।

4

किसी मुश्किल के डर से नहीं कहीं ठहरना है
कर जाय कुछ कर जाय, जो भी करना है।।
बाते जो मन की अधूरी,उन्हें पूरी करें
ठान लिया है हमने मन में जो पूरा करना है।।
जहाँ में आए हम कुछ उम्मीदें लेकर
सारी उम्मीदों में अपनी मेहनत का रंग भरना है।।
हद से गुजर जायेंगे हम एक दिन
अपना इरादा इन राहों से होकर  गुजरना है।।

5
जो कुछ कर सको तो करो तुम जहाँ में
मेहनत से अपनी तुम रंग भरो ज़मीं आसमां में।।
नहीं डर जाना तुम मुश्किल सोचकर
अगर हो इरादा मजबूत नहीं मुश्किलें यहाँ में।।
चलो कदम दो कदम तो मिलेगा कोई
साथ तुम्हारा भी देगा कोई न कोई तो जहाँ में।।
सच कर जायेंगे सपने एक दिन मन में ठाना
यकीं की ही ताकत छिपी रहती है हर दास्ताँ में।।

6

निकला है मन से विचार कोई नया
जीवन का बने जिससे आधार कोई नया
हम समझे ढंग से सबको भी समझाय
हर पल अपना बेहतर सँवर जाय
जो भी रखा है कदम हमने किसी राह पर
चलते रहे हम करके इरादा उसी राह पर

7

जब सब जग अपना बन जाता है
मधुर गीत बनके लबों पर आता है
बन्धन जब प्यार के मन से जुड़ जाते हैं
मन के पंछी मिलकर आसमान में उड़ जाते हैं
बढ़ते ही रहे कदम अपने जीने की चाह में
कोई भी आय जो मुश्किल अपनी राह में


8

बहने लगी है हवाओं में सरगम
कुछ नया होने लगा है हरदम
जो रुत लायी ये हवाएं
पंछी गीत गुनगुनाने लगे नये
मन्द मन्द हर फूल मुस्काय,
जो अरमां जगाने लगे नये
दूर तलक फैली खुशबू
मन मस्त हुए डोले
झूम झुमके,घूम घूमके
मतवाली कोयल बोले

9

मन घूमे आसमान में पंछियों सा
और झूमे आसमान में परियों सा
मौजो के साये में रहता है
ख़ामोशी से जो कुछ कहता है
ये रास्ते कट जाते हैं,
मंजिल मिल जाती है
हवाओं से कुछ फरमाते हैं
धड़कनें गुनगुनाती है


10

जो पल पल का रंग कुछ बदल रहा
एक एक पल आगे    ऐसे निकल रहा।।
क्यूं बेचैनी बढ़ती जाती है
क्यूं मन को राग सुनाती है
कुछ ऐसा ही सोचे मन
नये नये सपने देखे मन
जब तक मुकाम नहीं मिलता
  न मन का कोई अरमां खिलता

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