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लघुकथा - ममता का तबादला - - ज्ञानदेव मुकेश


   
        उस औरत को जानवरों से बेहद प्यार था। निस्संदेह सभी इस बात की सभी सराहना करेंगे। इस प्रेम के वशीभूत होकर एक दिन वह बाजार गयी और कुत्ते का एक पिल्ला पसंद कर लायी। उस दिन वह इतना प्रसन्नचित्त हुयी, मानो उसने अपनी कोख से एक नए दुलारे का जन्म दिया हो। उसने उसे पूरे लाड़-दुलार से पालना शुरू कर दिया। वह उसपर खूब सारा प्यार और समय न्योछावर करती। उसे नहलाती, धोती, अच्छे कपड़े पहनाती और खाने की चटकदार चीजें देती। वह पिल्ला बड़ा चंचल था। वह घर से बाहर भाग जाता और आदतन धूल में लोटकर कपड़े खराब कर लेता। यह देख वह औरत बड़ा परेशान हो जाती। आखिर एक दिन वह बाजार से एक पालना खरीद लायी और अपने उस नन्हे-प्यारे पिल्ले को उस पालने में सहेज कर रखने लगी।


       मातृत्व प्रेम की यह नायाब परिघटना मोहल्ले में चर्चा का विषय बन गयी। एक दिन कुछ औरतें इस अद्भुत प्रेम को देखने आयीं। उन्होंने देखा, वह औरत उस पिल्ले को पालने में सुलाने का प्रयास कर रही है और कोई लोरी भी गा रही है। औरतों की हैरानी का पारावार न रहा। तभी मुहल्ले की एक औरत ने उस औरत से पूछा, ‘‘अरी, तेरा अपना छोटा बच्चा नहीं दिख रहा ? वो कहां है ?’’
       उस पिल्ला-प्रेमी औरत ने बड़े अन्यमनस्क भाव से कहा, ‘‘उसके लिए समय कहां निकाल पाती हूं। इसलिए उसे आया के साथ बाग में घुमाने के लिए भेज दिया है।’’
  
                                                  - ज्ञानदेव मुकेश

                                   पता-
                                                फ्लैट संख्या-301, साई हॉरमनी अपार्टमेन्ट,
                                                अल्पना मार्केट के पास,
                                                न्यू पाटलिपुत्र कॉलोनी, 
                                                पटना-800013 (बिहार)


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