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पाँच नवगीत - अवनीश सिंह चौहान

Abnish

पाँच नवगीत


1.  देवी धरती की


दूब देख लगता यह

सच्ची कामगार

धरती की


मेड़ों को साध रही है

खेतों को बाँध रही है

कटी-फटी भू को अपनी-

ही जड़ से नाथ रही है


कोख हरी करती है

सूनी पड़ी हुई

परती की


दबकर खुद तलवों से यह

तलवों को गुदगुदा रही

ग्रास दुधरू गैया का

परस रहा है दूध-दही


बीज बिना उगती है

देवी है देवी

धरती की


2. चिड़िया और चिरौटे


घर-मकान में

क्या बदला है,

गौरेया रूठ गई


भाँप रहे बदले मौसम को

चिड़िया और चिरौटे

झाँक रहे रोशनदानों से

कभी गेट पर बैठे


सोच रहे अपने सपनों की

पैंजनिया टूट गई


शायद पेट से भारी चिड़िया

नीड़ बुने, पर कैसे

ओट नहीं कोई छोड़ी है

घर पत्थर के ऐसे


चुआ डाल से होगा अण्डा

किस्मत ही फूट गई

3. हिरनी-सी है क्यों


छुटकी बिटिया अपनी माँ से

करती कई सवाल


चूड़ी-कंगन नहीं हाथ में

ना माथे पर बैना है

मुख-मटमैला-सा है तेरा

बौराए-से नैना हैं


इन नैनों का नीर कहाँ-

वो लम्बे-लम्बे बाल


देर-सबेर लौटती घर को

जंगल-जंगल पिफरती है

लगती गुमसुम-गुमसुम-सी तू

भीतर-भीतर तिरती है


डरी हुई हिरनी-सी है क्यों

बदली-बदली चाल


नई व्यवस्था में क्या, ऐ माँ

भय ऐसा भी होता है

छत-मुडेर पर उल्लू असगुन

बैठा-बैठा बोता है


पार करेंगे कैसे सागर

जर्जर-से हैं पाल


4. कविता


हम जीते हैं

सीधा-सीधा
कविता काट-छाँट करती है

कहना सरल कि
जो हम जीते
वो लिखते हैं
कविता-जीवन
एक-दूसरे में
ढलते हैं

हम भूले
जिन खास क्षणों को
कविता याद उन्हें रखती है

कविता
याद कराती रहती है
वे सपने
बहुत चाहने पर जो
हो न सके
हैं अपने

पिछड़ गए हम
शायद - हमसे
कविता कुछ आगे चलती है


5. पगडंडी


सब चलते चौड़े रस्ते पर
पगडंडी पर कौन चलेगा?

पगडंडी जो मिल न सकी है
राजपथों से, शहरों से
जिसका भारत केवल-केवल
खेतों से औ' गाँवों से

इस अतुल्य भारत पर बोलो
सबसे पहले कौन मरेगा?

जहाँ केन्द्र से चलकर पैसा
लुट जाता है रस्ते में
और परिधि भगवान भरोसे
रहती ठण्डे बस्ते में

मारीचों का वध करने को
फिर वनवासी कौन बनेगा?

कार-क़ाफिला, हेलीकॉप्टर
सभी दिखावे का धंधा
दो बित्ते की पगडंडी पर
चलता गाँवों का बन्दा

कूटनीति का मुकुट त्यागकर
कंकड़-पथ को कौन वरेगा?


परिचय :

अवनीश सिंह चौहान

जन्म तिथि : 4 जून, 1979

शिक्षा : अंग्रेज़ी में एम०ए०, एम०फिल० एवं पीएच०डी० और बी०एड०

प्रकाशन : दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, नई दुनिया, कल्पतरु एक्सप्रेस, प्रभात खबर, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भाष्कर, डेली न्यूज़, जन सन्देश टाइम्स, अमर उजाला, डी एल ए, प्रेस-मेन, नये-पुराने, सिटीज़न पावर, अक्षर शिल्पी, सार्थक, उत्तर प्रदेश, सद्भावना दर्पण, उत्तरायण, प्राची, साहित्य समीर दस्तक, शिवम पूर्णा, अभिनव प्रसंगवश, सोच विचार, गोलकोण्डा दर्पण, गर्भनाल, संकल्प रथ, नव निकष, परती पलार, यदि, अनंतिम, गुफ़्तगू, कविता कोश, सृजनगाथा, अनुभूति, ख़बर इण्डिया, अपनी माटी, पूर्वाभास, रचनाकार आदि हिन्दी व अंग्रेजी की पत्र-पत्रिकाओं में नवगीत, आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ आदि प्रकाशित।

समवेत संकलन: साप्ताहिक पत्र ‘प्रेस मेन’, भोपाल, म०प्र० के ‘युवा गीतकार अंक’ (30 मई, 2009),  'शब्दायन' (2012), 'त्रिसुगन्धि', सरस्वती सुमन पत्रिका का 'गीत विशेषांक', 'नवगीत के नये प्रतिमान' (2012), 'गीत वसुधा' (2013), 'सहयात्री समय के'  (2017), 'गीत कोश', 'नयी सदी के गीत', 'गीत प्रसंग', 'गुनगुनाएं गीत फिर से' (2018), 'नयी सदी के नये गीत', प्रभात खबर 'साहित्य विशेषांक' (2109) आदि में गीत-नवगीत संकलित।

प्रकाशित कृतियाँ: स्वामी विवेकानन्द: सिलेक्ट स्पीचेज, किंग लियर: ए क्रिटिकल स्टडी, स्पीचेज आफ स्वामी विवेकानन्द एण्ड सुभाषचन्द्र बोस: ए कॅम्परेटिव स्टडी, फंक्शनल स्किल्स इन लैंग्वेज एण्ड लिट्रेचर, फंक्शनल इंगलिश, टुकड़ा कागज़ का (नवगीत संग्रह), बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाधर्मिता (सं), बर्न्स विदिन (हिन्दी कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद) एवं द फिक्शनल वर्ल्ड ऑफ़ अरुण जोशी : पैराडाइम शिफ्ट इन वैल्यूज।

संपादन:  वेब पत्रिका 'पूर्वाभास' (www.poorvabhas.in) एवं क्रिएशन एन्ड क्रिटिसिज़्म (www.creationandcriticism.com) के संपादक

सम्मान : प्रथम कविता कोश सम्मान, बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड, सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार, नवांकुर पुरस्कार,  हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान सहित एक दर्जन सम्मान

संपर्क: वृन्दावन, मथुरा-281121 (उ.प्र.)
           ई-मेल:  abnishsinghchauhan@gmail.com 


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