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सीमा तिवारी की कविताएँ

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"माँ"

माँ ने उर अमृत पिलाकर
हमको जीवन दान दिया,
अपनी-जान को पाल-पोसकर दूसरा जग में नाम दिया ।

"माँ"रूपी छोटे से शब्द में,
संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित है ।
निष्कपट भाव है रग-रग में
ममता  की परिचायक है ।

हे ममतामयी!तेरा हृदय तो,
ममता का समंदर है,
ब्रह्मा-विष्णु को कहां ढूंढूं
सब तो तेरे अंदर हैं ।

बात-बात में तुमने ,
हमको पढना सिखलाया है ।
खेल-खेल मे तुमने ,
हमको चलना सिखलाया है।

तेरे इस विधि को तो,
विधाता न समझ पाया
है कौन?इस जग में जो,
ममता से है पार पाया।

मां!मैं तेरे सामने,
क्या कहूं करबद्ध हूँ ।
कर सकूं बखान तेरी,
कुछ नहीं नि:शब्द हूँ ।

मैं तो बस नि:शब्द हूँ
मैं तो बस नि:शब्द हूँ ।

सीमा तिवारी
अम्बिकापुर ।


माँ शारदे वंदन
               

वीणावादिनी मां सरस्वती
जयती जय जय मां ।
हंसवाहिनी, ज्ञानदायिनी
जयती जय जय मां ।

तम का बादल छा रहा मां
कुछ नजर ना आ रहा मां
आकर करो उजियार 2सरस्वती
जयती जय जय मां ।
वीणावादिनी.........।

दुर्गूणों को दूर करो मां
तन-मन में सद्गुणों को भरो मां
नमन है बारंबार 2सरस्वती
जयती जय जय मां ।
वीणावादिनी.........।

ज्ञान रूपी मां दीप जलाकर
प्रेम -सुधा बरसा दो आकर
करो सबका उद्धार  2सरस्वती
जयती जय जय मां ।
वीणावादिनी मां सरस्वती
जयती जय जय मां,

हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी
जयती जय जय मां ।

सीमा तिवारी
अम्बिकापुर छ.ग.

पुलकित-पुकार

मुझे यूं छोड़ न जाओ मां
अपने गले लगाओ मां ।

बूंद - बूंद को तरस रहा
तन - मन भी है झुलस रहा।
अब और सहा न जाये मां
अपने गले लगाओ मां ।।

निज स्वार्थ नहीं है ,हममें
हम होगें सदा तेरे हित में
चाहो तो आजमालो मां ।
अपने गले लगालो मां ।।

केवल बीज बो - देने से
कहीं यूं ही खड़ा कर देने से।
हम कैसे कुछ कर पायें मां
अपने गले लगाओ मां ।।

गर सींच - सींच तू जल से
थोड़ी देर।देखले स्नेह भाव से।
वादा है ।उर्जा से भर जाओ मां
अपने गले लगाओ मां ।।

समीक्षार्थ
सीमा तिवारी
अम्बिकापुर छ.ग.।

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