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लघुकथा - माँ का सम्मान - चलमेशवरी राव

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        आँखें  भर आई उस दृश्य  को देखकर  ।
मैं तेरहवीं  के कार्यक्रम में  शामिल होने  के लिए  गयी  थी। मेरी  सहेली थी सावी जिसके पिता की  कुछ  दिन पहले ही  मृत्यु  हो  गयी  थी।  मैं उस परिवार  का अभिन्न  हिस्सा  थी। उनके हर सुख दुःख की साथी  रही हूं।
           उनके  माता-पिता का 50 सालों  का साथ और प्यार  रहा । दोनों  एक दूसरे के  बिना अधूरे सपने  की तरह हैं  जहां  भी  जाते  साथ  जाते।  उनके  प्रेम की  मिसाल दिया  जाता  रहा। हम सोचते हैं कि  काश हर इनसान  ऐसा ही होता  मगर ये संभव नहीं  क्योंकि पांचों  उँगलियाँ  बराबर  नहीं होती।
            आज उन्हीं की  तेरहवीं का कार्यक्रम था।
जिसमें मैं शामिल  होने के लिए आई थी। कार्यक्रम  बहुत ही सुनियोजित ढंग से  किया  जा रहा था। 
           मेरी  दोस्त  सावी के  पति  बहुत  ही  सुलझे हुये  थे शहर  में काफी  नाम था उनका । बहुत  भीड़ थी  सभी  रिशतेदारों  का मजा लगा रहा। दोस्त  शहर के प्रतिष्ठित नागरिक  भी  मौजूद थे।  अचानक  सावी के पति  शेखर ने पूछा  मां  दिखाई  नहीं  दे रही है  कहाँ है ?
     सावी  ने कहा  मां  तो घर पर है उन्हें  यहाँ  नहीं  आना  चाहिए  नियम यही है। शेखर  ने  पूछा कि  ये किसने कह दिया कि वो यहाँ  नहीं आ सकती ?  घर के बंद  दरवाजों  के बीच  उन्हेx  सिसकता  छोड़ कर  आ गये  तुम  लोग , और उस समाज की  चिंता  कर रहे हो  जो सारे नियम कायदे कानून  अपनी सुविधानुसार  बनाता है।
       जिसका  जीवन  उजड़ गया  उनका  साथी बिछड़  गया,  तो क्या  जिन्होंने  अपना  सारा  जीवन  इस परिवार के लिए  समर्पित कर दिया उनको अपने  पति  की तस्वीर पर फूल  चढ़ाने का  अधिकार  भी  छीन  लेना चाहते हैं  आप सब? मैं ऐसा हरगिज़ नहीं  होने  दूंगा । ये तो नियति है,  हर इनसान को  ऐसे  घटनाओं का  सामना  करना पड़ता है।  इसका मतलब ये नहीं की काल कोठरी में  बंद कर दिया  जाए।
        मैं अभी  जाकर  उन्हें यहाँ  लेकर  आऊंगा।  मैं उन्हें  एकांत का  हिस्सा  नहीं  भीड़  का  हिस्सा  बनाऊँगा। ताकि  उन्हें  संबल प्रदान हो सके। गम से  लड़ने की  ताकत  मिल  सके।
          विधि के विधान को  हम मिटा नहीं  सकते  लेकिन  किसी  की तकलीफ़ों को  हम चाहे तो  कम कर सकते है  । उन्हें भी  जीना  होगा  इसी समाज में  इस भीड़ में  एकांत में  नहीं।
       शेखर  ऊपर से  जब मां को  नीचे  लेकर  आया  और आयोजन  स्थल  पर पहुँच  कर उनके  द्वारा उनके  पति की तस्वीर पर फूल चढ़ाने के लिए  दिया गया  तो वहाँ  उपस्थित सभी  की आँखें  नम हो चली थी।

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