---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

(सांस्कृतिक धरोहर) :-‘‘छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पावन धरा में सतनामधर्मियों के सात धाम’’ - डॉ.रामायणप्रसाद टण्डन (सतनामी)

साझा करें:

सतनामियों के धर्मगुरू प्रातः स्मरणीय गुरू घासीदास बाबा जी की जन्म स्थली एवं तपोस्थली गिरौदपुरी धाम की फिजाओं से उठने वाले साहेब सतनाम! सतनाम...

सतनामियों के धर्मगुरू प्रातः स्मरणीय गुरू घासीदास बाबा जी की जन्म स्थली एवं तपोस्थली गिरौदपुरी धाम की फिजाओं से उठने वाले साहेब सतनाम! सतनाम की अनुगूंज समाज के अन्य धामों जैसे भण्डारपुरी धाम, तेलासी धाम, अमरधाम (चटुआपुरी), अगमधाम (खड़वापुरी), गुरू बालकदास धाम (कुंआ बोड़सरा), एवं गुरू आसकरणदास धाम (खपरीपुरी) में सुनाई पड़ती है, जहां गुरू घासीदासजी एवं उनके वंशज गुरूओं की गुरू गद्दी, गुरूद्वारा, समाधि जैतखाम मंदिर, तपोस्थली, चरणकुण्ड, अमृतकुण्ड, पंचकुंड, के अतिरिक्त धामों में निर्मित बाड़ों की भव्यता एवं उनके भीतर निर्मित गुरूगद्दी, हाथी, अस्तबल में उनका इतिहास छिपा हुआ है।

सतनाम धर्म के अनुयायी इन सातों धामों में न केवल दर्शन करने जाते हैं बल्कि गुरूओं के अलौकिक एवं चमत्कारिक कार्यो को जिज्ञासावश जाकर अपनी श्रद्धासुमन श्रीफल गुरू गद्दी में अर्पित करते हुए श्री गुरू प्रसाद पाकर परमशांति का अनुभव करते हैं।

समाज के साहित्यकारों ने सतनामियों के मात्र चार धार्मिक स्थल बताए हैं यथा-गिरौधपुरीधाम, भण्डारपुरीधाम, तेलासीधाम, और अमरदासधाम (चटुआपुरी), को रेखांकित कर गुरू बालकदास धाम (कुंआ बोड़सरा), एवं गुरू आसकरणदास धाम (खपरीपुरी) अगमधाम (खड़वापुरी), को अनदेखा कर दिया गया है, जबकि वास्तविक रूप से सतनामियों के सात धाम हैं। जिनके दर्शन करने प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, यह धाम गुरूओं के अद्भुत कार्यो एवं अलौकिक स्मृतियों जैसी कई अनकही कहानियां बयां करती है।

1.गिरौधपुरीधामः-गिरौधपुरीधाम की प्रसिद्धि और महत्व छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे भारत सहित विदेशों में भी इनका बड़ा महत्व है। छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा मेला लगने का भी इन्हें सर्वप्रथम दर्जा प्राप्त है। यह सतनामधर्मी सतनामियों के लिए बहुत ही पावन स्थल भी माना गया है। यहां फाल्गुन शुक्ल पक्ष के पंचमी से सप्तमीं तक तीन दिवसीय मेला गिरौदपुरी गांव से लेकर छाता पाहाड़ 10 किमी. की दूरी तक लाखों दर्शनार्थियों की वजह से दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों का चलना भी दुश्कर होता है। ऐसे विशाल मेला का विहंगम एवं मनोमुग्धकारी दृश्य छत्तीसगढ़ के किसी भी मेले में देखने को नहीं मिलता। यह मेला सतनाम धर्म के अनुयायियों का अपने पूज्य गुरूओं के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धाभक्ति, संगठन एवं शक्ति प्रदर्शन का अनूठा उदाहरण बन गया है। मेले की पवित्रता एवं दर्शनार्थियों की अटूट भक्तिभाव का अंदाजा इसी से लगता है कि सदियों से लगने वाले इस मेले में आज तक कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है एवं किसी भी जीव जन्तुओं द्वारा दर्शनार्थियों को पीड़ा पहुंचाने की बात तो दूर चींटी काटने की घटना भी सुनने को नहीं मिली है। किन्तु सात मार्च को हुई भगदड़ में दो लोगों की मौत ने सतनाम धर्म से जुड़े लोगों की आस्था को आहत किया है। गुरू घासीदासली की जन्मस्थली एवं तपोभूमि गिरौदपुरीधाम सतनाम धर्म के अनुयायियों की आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास का ऐसा संगम है, जहां मनुष्य दर्शनमात्र से ही परम शांति का अनुभव करता है। गिरौधपुरीधाम में बाबा की जन्मस्थली, मकान की गुरूगद्दी, तपोभूमि, गुरू गद्दी, चरणकुण्ड, अमृतकुण्ड, पंचकुण्ड, छाता पाहाड़, जोंकनदी, में हाथियों एवं शेरों की आकृति की पाषाण मूर्तियां दर्शनीय है।

2.भण्डारपुरीधामः-सतनाम धर्म के इतिहास में भण्डारपुरी को गुरू वंश को जन्म देने वाली जननी के रूप में जाना जाता है। बाबा गुरूघासीदास गिरौदपुरी छोड़ने के बाद भण्डारपुरी में अपने ज्येश्ठ पुत्र अमरदास का विवाह कर गुरू वंश परंपरा को आगे बढ़ाने कार्यो का निर्वहन किया। भण्डारपुरी में स्थापित गुरू गद्दी, प्रतापपुरहिन माता का सालों से बिछा हुआ पलंग, गुरू गद्दी की तिजौरी, भण्डारपुरी का बाड़ा, गुरूओं की समाधि आदि स्मृतियां अपने अंदर कई कहानियों को समेटे हुए हैं। गुरूघासीदास की पांचवी पीढ़ी के गद्दीदार धर्मगुरू बालदास साहेब जी हैं। धर्म गुरू बालदास के नेतृत्व में भण्डारपुरी में निर्माणाधीन गुरूद्वारा मंदिर की भव्यता देखते ही बनता है, कहते हैं धर्मगुरू बालदास को अद्भुत नेतृत्व क्षमता एवं साहस विरासत से मिली है। भण्डारपुरीधाम में दशहरा पर्व पर दो दिवसीय गुरूदर्शन मेला लगता है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन सैकड़ों दर्शनार्थी गुरू गद्दी पर श्रीफल अर्पित कर अपने को धन्य मानते हैं।

3.तेलासीधामः- गुरूघासीदास जी के चमत्कारी व्यक्तित्व के कारण तेलासी गांव के अन्य जाति के लोग भी सतनामी समाज में शामिल हो गए, कोढ़ से ग्रस्त लोगों को अमृत पिलाकर जीवनदान देना, अभिशप्त तालाब का शुद्धिकरण करना आदि जनश्रुतियां इस धाम से जुड़ी हुई हैं। गुरूघासीदास के ज्येष्ठ पुत्र गुरू अमरदास और द्वितीय पुत्र गुरूबालकदास एवं तीसरी पीढ़ी के वंशज गुरू अगरमनदास और गुरू अजबदास सपरिवार तेलासी बाड़ा में रहते थे। तेलासीबाड़ा को सेठ हस्तीमल लुक्कड़ के पास गिरवी रखे जाने से लेकर मुक्ति कराने तक की दिलचस्प कहानियां गुरू भक्ति की जिज्ञासा को प्रबल कर देती है। तेलासीबाड़ा के गुरूगद्दी कक्ष में बने सुरंग की जनश्रुतियों पर आधारित कहानी और भी अधिक दिलचस्प हैं। कहते हैं यह सुरंग का अंत गिरौदपुरी पर होता है।

तेलासीबाड़ा मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व गुरू आसकरणदास जी ने किया। महंतों एवं जन सहयोग से यह संभव हो पाया। प्रतिवर्श तेलासीधाम में दो दिवसीय गुरूदर्शन मेला, दशहरा में आयोजित होता है। यहां एक दिवसीय गुरू बालकदास जयंती एवं मुक्ति का मेला लगता है। तेलासीबाड़ा की मुक्ति के बाद सतनामी समुदाय के लोगों में अपने आराध्य के प्रति आस्था और श्रद्धा और भी बढ़ गई है।

4.अमरधाम (चटुवापुरी):- शिवनाथ नदी के तट पर रमणीय एवं सुरम्य वातावरण के बीच स्थापित है, अमरधाम चटुवापुरी दुर्ग जिले के बेरला तहसील से 29 किमी. की दूरी पर स्थित है। जहां चटुवापुरीधाम में बाबागुरू घासीदासजी के ज्येष्ठ पुत्र गुरू गोसाई अमरदास जी ने मानव के दुख-दर्द के निवारण तथा उपदेश हेतु पढ़ाव डाला। वहां उन्होंने समाधि भी लगाई। जनश्रुतियों के अनुसार समाधि स्थल पर गुरू अमरदास को मृत समझकर लोंगों ने अंतिम संस्कार कर दिया। गुरू गोसाई अमरदास बचपन से ही तेजस्वी थे। कहा जाता है कि इसे गुरू घासीदास के सदृश्य चमत्कारिक एवं अलौकिक शक्तियां प्राप्त थीं। बाल्यावस्था से ही आध्यात्मिक एवं वैराग्यमय जीवन यापन करते थे। अपनी विवाहित पत्नी प्रतापपुरहिन माता से पृथक रहकर समाज को सत्य का संदेश देते रहे। अमरधाम चटुवापुरी में हरिनभट्ठा के गौटिया महंत आधारदास ने मंदिर का निर्माण कर गुरू गद्दी स्थापित किया। वहां पर श्री भुजबल महंत के निर्देशन में तीन दिवसीय मेला लगना प्रारंभ हुआ। सतनाम धर्म के अनुयायी सतनामी जन आज भी मृत्यु संस्कार के बाद अस्थि को अमरधाम से लगे शिवनाथ नदी में विसर्जित कर अपनी श्रद्धा भक्ति का अनूठा नमूना पेश कर रहे हैं।

5.अगमधाम (खड़ुवापुरी):- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 50 किमी. दूर बिलासपुर रोड पर सिमगा से तीन किलोमीटर की दूरी पर खड़ुवापुरी नामक ग्राम में अगमधाम स्थित है। इस धाम को सामाजिक उत्थान एवं समाज को राजनीतिक पहचान देने वाली जननी माना जाता है। जहां गुरू अगमदास, मिनीमाता, करूणामाता एवं विजय गुरू की अहम् भूमिका से सारा समाज नतमस्तक है। इस धाम की मिट्टी में सामाजिक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक सोच की महक है। छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद एवं समाज की गुरूमाता मिनीमाता का संपूर्ण जीवन काल जनकल्याण, सामाजिक उत्थान एवं समाज के बेहतर जीवन की सोच अगमधाम की मिट्टी की महक में व्याप्त है। वर्तमान में धर्मगुरू विजय कुमार गुरू इस धाम के गद्दीनशीन है जो अन्त्याव्यवसायी विकास निगम के अध्यक्ष पद पर रहते हुए समाज को बेहतर दिशा निर्देश कर रहे हैं। इन्हीं के परिवार से गुरू अगमदास के पौत्र एवं विजयगुरू के सुपुत्र आज युवा और उर्जावान गुरू रूद्रकुमार जी मंत्री मडल में शामिल छत्तीसगढ़ राज्य के केबिनेट मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग विकास के रूप में सरकार और सतनामी समाज का सक्रियता के साथ निर्वहन कर रहे हैं।

6.गुरू बालकदास धाम (कुंआ बोड़सरा):- सतनामियों के सात धामों में से एक है-गुरू बालकदास धाम कुंआ बोड़सरा बिलासपुर जिले के बिल्हा तहसील से 29 किमी दूर ग्राम कुंआबोड़सरा में स्थित है। यहां चार एकड़ के परकोटे पर बना बाड़ा विगत 4 सालों से पुलिस के पहरे में है। जिससे बाड़े के भीतर स्थापित गुरू गद्दी के दर्शन से लाखों श्रद्धालु वंचित हो जाते हैं। बाड़ा मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष धर्मगुरू बालदास साहेब के नेतृत्व में सतनामी समाज धैर्यपूर्वक अपनी धर्मस्थली के मुक्त होने का इंतजार कर रहे हैं। जो दुर्गाप्रसाद और अखिलेश बाजपेयी बंधुओं के कब्जे में है। इस धाम में गुरू बालकदास के 178 एकड़ खेत भी है, जो बाजपेयी बंधुओं के कब्जे में है, जो पड़त भूमि के रूप में तब्दील होती जा रही है। ग्रामवासी बृजलाल चतुर्वेदी, पूर्व सरपंच धनसाय बघेल, उप सरपंच अगरमन जोशी एवं जामदास का कहना है कि सतनामी समाज के प्रथम राजा गुरूबालकदास के राजसी ठाट-बाठ के अवशेश बाड़ा में आज भी देखे जा सकते हैं। इस धाम में चैत्र शुक्ल पक्ष के पंचमी से सप्तमी तक तीन दिवसीय गुरू दर्शन मेला आयोजित होती है। यहां के अमृत कुंड से अविरल प्रवाहित जलधारा कभी समाप्त नहीं होती ह,ै इसके पवित्र जल से अपशकुन भी टल जाते हैं। बाड़े से दस फीट दूर स्थित तालाब में जैत खाम का ठूंठ पाया जाना भी उसे सामाजिक पूंजी निरूपित करती है। यह सामाजिक पूंजी ही है जिसे छल-बल और अन्याय पूर्ण तरीके से बाजपेयी परिवार अपने कब्जे में कर लिया है। लेकिन उस बाजपेयी परिवार को एक दिन छोड़ना ही पडे़गा। सतनामियों के सीधे-सादेपन का फायदा उठाकर एक निरीह और भिखारी ब्राहमण सतनामी गुरूओं के तलुए चाटते थे और उन्हीं के टुकड़ों पर पलते थे। वही बाजपेयी ब्राम्हण परिवार कालांतर में गुरू की भूमि पर अजगर की तरह कुण्डली मारकर बैठ गया है, और कह रहा है कि यह बाड़ा मेरे स्वयं के नाम पर है। उसे यह नहीं मालूम कि गलत तरीके से अपने नाम किया गया सम्पति एक दिन सतनामी और सतनाम धर्मियों को देना ही पड़ेगा। हम देखते है कि सतनामियों की धरती और उनके सम्पत्ति को इन दुष्टों के द्वारा छल-बल एवं कपटपूर्वक,षड्यंत्र के तहत हथियाने का कार्य कल भी होता रहा है, और आज भी गलत तरीके से कब्जा कर लिया जाता है। और अब अगर सतनामी समाज सचेत और सजग नहीं हुआ तो आने वाले समय में भी हमारे धार्मिक स्थल गुरूओं के धरोहर को लूटते ही रहेंगे। अब हम सतनाम धर्मी किसी भी हालात में अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को लूटने नहीं देंगे। क्योंकि यह सतनाम धर्मानुयायियों की सांस्कृतिक धरोहर है। सतनामी अपने गुरू की पूंजी और धरोहर जो कि सतनामी समाज की आस्था एवं श्रद्धा से जुड़ी हुई है। जिसे किसी भी हालात में उसे छोड़ा नहीं जा सकता है।

7.गुरू आसकरण धाम (खपरीपुरी):- रायपुर से बलौदाबाजार रोड पर भैंसा गांव से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर गुरू घासीदास की छठीं पीढ़ी के सर्वोच्च गुरू आसकरणदास के देह त्याग करने के बाद उनके ज्येश्ठ पुत्र गुरू आसामदास गद्दीनशीन हैं। इसी तरह गुरू आसकरण के भाई गुरू संतनदास के देह त्यागने के बाद गुरू मुक्तिदासजी गद्दीदार हैं। गुरू आसकरणदास एवं गुरू संतनदास के आवास में स्थापित गुरू गद्दी एवं गुरू अतिबलदास (डंडाफटकार), गुरू प्रकाशदास, गुरू उबारनदास एवं गुरू आसकरणदास की समाधि स्थल का दर्शन कर दर्शनार्थी गुरू दर्शन का लाभ प्रतिवर्ष दशहरा पर्व में आयोजित एक दिवसीय मेले में करते हैं। सातों धामों की अपनी विशिष्टता को हम इन पंक्तियों के माध्यम से उल्लेखित कर सकते हैं:- ‘‘आओ ऐसा कर गुजरे हम, विश्व करे जिसका अभिनंदन, एक धर्म सतनाम धर्म हो, कहीं न हो करूणा के क्रंदन।’’

जीर्णोद्धार के इंतजार में गुरू घासीदास की जन्स्थलीः- सतनाम धर्म के संस्थापक एवं सतनाम पंथ के प्रणेता परम पूज्य संत गुरू घासीदस बाबाजी की जन्म स्थली गिरौधपुरी धाम का वह मकान ढाई सौ से भी अधिक साल से उपेक्षित सा है, जहां उनका जन्म हुआ था। स्वतंत्रता के 70 साल बीत गए, मध्यप्रदेश से अब छत्तीसगढ़ राज्य भी बन गया। इस दौरान कई सरकार भी आई और गई हो गई, पर सतनाम के सहारे सामान्य नागरिकों को संतत्व की शिक्षा देने वाले संत बाबा गुरू घासीदास का नेरूवा (नाभिकमल,नाल) गड़ा जीर्ण-शीर्ण मकान जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। गिरौदपुरी धाम में मेले तो हर साल लगते हैं, दर्शनार्थियों की संख्या सैकड़ों से अब लाखों में पहुंच गई है किंतु किसी ने इस दिशा में चिंतन नहीं किया कि बाबा का जन्म स्थान को उपेक्षा से बचाएं, सतनामियों की तीर्थ स्थल गिरौधपुरी पर गुरूगद्दी और जैतखाम की पूजा अर्चना करने वाले पुजारी भरतलाल रात्रे का कहना है कि मेले और सामान्य दिनों में श्रद्धालु आते तो हैं, पर जीर्णोद्धार के बारे में कोई कुछ नहीं कहते। बड़े-बड़े मंत्री, अफसर और जिम्मेदार लोग भी आते रहते हैं लेकिन बाबा के जन्म स्थान का नमन कर वापस चले जाना ही अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं। शायद यह पवित्र स्थान सतनामी समुदाय के भोले-भाले और सीधे-साधे लोगों की निष्क्रियता का भी परिणाम हो। अब आज गुरू घासीदासजी के ही वंश परंपरा में पांचवी पीढ़ी के गुरू रूद्रकुमारजी केबिनेट मत्री में शामिल हैं और पावरफुल मंत्री भी हैं। अगर वो इस तरफ जरा ध्यान दें तो गुरू बाबा घासीदास जी की जन्म स्थली को भव्य भवन में तब्दील किया जा सकता है। ताकि लोग दूर-दूर से आकर दर्शन लाभ लेकर गद्गद हो सकते है। और इससे सतनामियों की शान-बान और स्वाभिमान में इज़ाफा भी हो सकता है।

गिरौधपुरीधाम की आहत हुई आस्थाः- गुरू घासीदासजी की तपोभूमि गिरौदपुरीधाम में सात मार्च 2006 को हुई हिंसक वारदात ने सतनामी समाज को झकझोर कर रख दिया है। इसे न केवल सतनाम पंथ से जुड़े लोगों की आस्था आहत हुई है बल्कि अहिंसा पर विश्वास करने वाले और गुरू घासीदास जी के बताए मार्ग पर जीवन यापन करने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर कुठाराघात हुआ है। सन् 1935 से निरंतर लग रहे इस तीन दिवसीय मेले के दौरान कभी कोई हिंसक घटनाएं नहीं घटी थी। लेकिन इस बार अहिंसा के तीर्थ पर हिंसा का दाग लग गया। यह घटना तब घटी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.रमनसिंह मेला स्थल से राजधानी रायपुर के लिए रवाना हुए थे। मुख्यमंत्री के जाने के बाद बिहार और झारखण्ड के लोगों द्वारा अबोध बच्चों को बोरों में भरकर ले जाने की अफवाह फैलाई गई। इस अफवाह ने मेला स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं के धैर्य को तोड़ दिया, प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना को अंजाम देने वाले लोग लघु व्यापारी थे, जो श्विरीनारायण मेले की समाप्ति के बाद यहां अपना व्यवसाय करने आए थे।

बिहार व झारखण्ड से आए इन व्यापारियों की दुकाने लूट ली गई। कईयों को आग में झोंक दिया गया। इस हादसे में महादेव और बबलू केसरी की मौत हो गई। पुलिस ने क्षत-विक्षत शव भी बरामद किया। वहां पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे सतनामी समाज के अन्तर्द्वन्द और राजनीतिक कटुता का परिणाम कहा है। बहरहाल, घटना के बाद समाज से जुड़े लोगों, मेला आयोजकों ने और आस्थावान नागरिकों ने शासन-प्रशासन से इसकी त्वरित जांच करने की मांग की है। ताकि छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र बन चुके गिरौदपुरीधाम को रक्तरंजित धरती न कह सके।

अंत्यावसायी विकास निगम छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष एवं सतनामी समाज के धर्मगुरू विजय गुरू ने कहा-‘‘ मेलास्थल पर चिन्हित लोगों को मारना किसी षड्यंत्र का हिस्सा जान पड़ता है। बच्चों को बोरे में भरकर ले जाने की अफवाह फैलाई गई। मुख्यमंत्री को जांच का आग्रह किया गया है। यह हादसा समाज के वैचारिक मतभेद का हिस्सा कतई नहीं है।’’ वहीं सतनामी समाज के दूसरे धर्मगुरू बालदास साहेब का कहना है कि-‘‘ सतनामी समाज के इतिहास को कलंकित करने की साजिश में किसी न किसी जिम्मेदार लोगों का हाथ हो सकता है। इस हादसे ने न केवल सतनामी समाज के लोगों की आस्था को ठेस पहुंचायी है अहिंसा की इस पवित्र धरती पर हिंसा का बीजारोपण करने का कुत्सित प्रयास किया है। इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।’’

प्रस्तुतकर्ताः-डॉ.रामायणप्रसाद टण्डन (सतनामी)

90,आदर्शनगर कांकेर जिला-कांकेर, छत्तीसगढ़

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

|कथा-कहानी_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|हास्य-व्यंग्य_$type=three$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|काव्य-जगत_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|आलेख_$type=two$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|संस्मरण_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लघुकथा_$type=blogging$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|उपन्यास_$type=list$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

---प्रायोजक---

---***---

|लोककथा_$type=complex$au=0$label=1$count=7$page=1$com=0$va=0$rm=1$src=random$h=100$d=0

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4064,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3029,कहानी,2268,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,99,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,244,लघुकथा,1256,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2009,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,711,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,798,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: (सांस्कृतिक धरोहर) :-‘‘छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पावन धरा में सतनामधर्मियों के सात धाम’’ - डॉ.रामायणप्रसाद टण्डन (सतनामी)
(सांस्कृतिक धरोहर) :-‘‘छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पावन धरा में सतनामधर्मियों के सात धाम’’ - डॉ.रामायणप्रसाद टण्डन (सतनामी)
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2019/09/blog-post_15.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2019/09/blog-post_15.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ