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नाथ गोरखपुरी की कविताएँ

01

"14 Feb crpf पर आतंकवादी हमला"

आज फिदायिनी हमले से ,देश हमारा घायल है
फिर कुर्बानी दी वीरों ने  ,देश हमारा कायल है

कुछ शैतानों ने मिलकर ,मानवता को मारा है
उन हैवानों ने मिलकर ,देश को फिर ललकारा है

चलते राह जवानों को ,धोखे से है मार दिया
सैनिक के जज्बातों को,फिर से है ललकार दिया

अब कुछ नेता मिलकर के, जनता को बहकायेंगे
उलटे सीधे अल्फाजों से ,पानी में आग लगायेंगे

असल में दुश्मन बाहर नहीं, वो घर के ही अन्दर है
सारे छुप के बैठे हुये, कहीं नेता कहीं धर्म धुरंधर है

इनकी गंदी राजनीति, इक लाइलाज बीमारी है
उनकी गंदी धर्मनीति से, मानवता ही हारी है

अपने अपने स्वार्थनीति में ,देशप्रीति को भूल गये
कैसे राज चलाना चहिये, उस धर्मनीति को भूल गये

है वीरों की चिता सजी आज बहुत तन्हा हूँ मैं
है दिल में इक आगलगी ठहरा हुआ लम्हा हूँ मैं

कैसे कहूँ सियासत ने फिर वीरों को मारा है
कैसे सहूँ हिफाज़त में देता जवाब जो करारा है

उन वीरों को कुछ जेहादी, छुपके कैसे मार गये
इतनी बारूद भरे गाड़ी सीमा के कैसे पार भये

मेरे एक एक शेर अकेले सौ सियार पर भारी हैं
चालीसदो मरे इकसाथबोलो आई कैसेलाचारी है

वो जेहादी पिल्ले तो, इतने बड़े ना काबिल हैं
कुछ अपने जो साथ खड़े हैं वो उनमें भी शामिल हैं

मेरे रक्षक की रक्षा में ,बोलो कैसे चूक हुई
सैनिक छले गये हमारे आज सियासत मूक हुई

तू तू मैं मैं छोड़ो सारे, देश को अब तो बचा डालो
सेना को आदेश तो दो, कि कोहराम मचा डालो

ऐसे मुद्दों पर अक्सर ,दिल्ली भी कभी ना बोली है
पुलवामा उरी घाटी में सेना ने,जब जब खाई गोली है

खुल के बोलो सेनासंग में, अबसे कोई ना चूक करो
बात करो ना वीरों तुम, दुश्मन सम्मुख बंदूक करो

बोल नही सकती दिल्ली ,तो दिल्ली अब रोके ना
सेना छाती पर चढ़ती है,तो दिल्ली अब टोके ना

इन गद्दारों को अब तो, सेना को सबक सिखाने दो
सेना को आजाद करो,दुश्मन के घर घुस जाने दो

"नाथ" नेह अब देतें हैं, तुम आजाद परिंदों को
घर घर घुसके मारो अब, उन शैतान दरिंदों को

गरज पड़ो बादल बनके, उनको औकात दिखा डालो
गर दिल्ली बीच में आती तो, उसको भी आग लगा डालो

02-

तेरे शहर की हवा कुछ कह रही थी,
मैं ही ना समझा अंजाना जो था...

कह रही थी कातिलों का शहर है ये,
मैं सुनता ही क्यों तेरा दीवाना जो था...

हर तरफ चर्चे चल रहे थे जोरों से ,
तेरे मेरे मोहब्बत का फ़साना जो था

हर शख्स की नजरें उठ रही थी हमपे,
मोहब्बत का दुश्मन ये जमाना जो था

नाथ ने मोहब्बत लिखा ही था आंसुओं से ,
आखिर अश्कों से इक दिन मिटाना ही था

03-

देखो दूर तक कुछ दिखाई नहीं देता
कहते रहो अपनों को सुनाई नहीं देता

ख्वाबों के धुंध में लिपटी है जिंदगी
सबको यहां खुदा खुदाई नहीं देता

हासिल करो अगर इंसानियत को तुम
तो सामने वाला बधाई नहीं देता

"नाथ" थाम लेता है दामन जो सत्य का
जहां में हर किसी को वो सफाई नहीं देता

जहां में जुल्मों सितम तो बेख़ौफ बिकते हैं
सच के बाजार में कोई शख्स दिखाई नहीं देता

04-

कभी हँसके मेरी महफिल में आया कीजिए
दीदार में कमी हो तो, बताया कीजिए

ग़र मेरे जान को जरूरत जो हो जान की
तो इक बार नही सौ बार मार जाया कीजिए

हर बार मुझे देख कर मुस्कुराते हैं जनाब़
कभी तो मुस्कुराके देख जाया कीजिए

हम चाहते हैं तुमको तुम चाहते हमें
दुनिया से मेरी जान ना शरमाया कीजिए

"ये कैसी कश्मकश है" दिल में दिलरूबा
"नाथ" नेह में इस कदर ना सताया कीजिए

05-

कहके किस्मत को क्यों कोसूं?
कहने को किस्मत की कमी है
नाम नहीं लूँगा मैं लेकिन
उन नयनों में भी तो नमी है

जिनकी किस्मत अच्छी कहते
उनकी इच्छा पूरी है क्या?
जीवन गम ने छोड़ दिया है ?
उनकी परीक्षा पूरी है क्या?

मैंने किस्मत को देखा है ...
कर्मों की कठपुतली बनते,
किस्मत मैंने जान लिया है
तभी तो मेरे हाथ हैं चलते,

"नाथ" नहीं है रुकने वाले
  जिनकी अभिलाषा ना थमी है
जिसने हाथ पे हाथ धरा है
उसकी आंखों में ही नमी है।

06-

सब कहते हैं  जीतना ही जिंदगी है
पर कभी अपनों से हार कर देखो
जीत तो सकते हो उनसे हर मोड़ पर
पर कभी  हार स्वीकार कर देखो

जीतकर पल भर का सुकून पा जाओगे
पर हार कर उम्र भर का रिश्ता बनाओगे
लापरवाही में खो दिए हैं तुमने बहुत से रिश्ते
पर किसी रिश्ते को संभाल कर देखो

माना तुम दुनिया की दौलत नहीं पाओगे
पर रिश्ते में रूठने की मोहलत नहीं पाओगे
जिंदगी की परिभाषा समझ में आ जाए शायद
किसी डूबती कश्ती को किनारे उतार कर देखो

पल भर की जिंदगी में सब को अपना बना लो
हर रिश्ते को निभाना जीवन का सपना बना लो
'नाथ' पाल रहे हैं समर्पण का भाव मन में
खुद की खुशी कभी किसी पर निसार कर देखो


07-शे'र
A
  हमेशा ही नहीं होता अंधेरे का पहरा...
मोहब्बत का सूरज भी जवां होता है...

चांद भी इश्क में चांदनी बिखेरता...
चांद भी मोहब्बत में मेहरबां होता है...
B
दिल ना माने....... मग़रूर होने के लिए
दिल ना माने....... मजबूर होने के लिए
वैसे मानता है यह..दुनिया की सारी बातें
पर दिल ना माने.. तुमसे दूर होने के लिए

C

मारो मत मोहब्बत में...मैं मयकशी न कर बैठूं
दिल की बेकसी को मैं....... बेबसी न कर बैठूं

सामने आ गए हो...जरा आंखों को मूंद लेने दो
मिलने की खुशी में कहीं...खुदखुशी न कर बैठूं

D

पथ में लाख बाधाएं हों हम पार कर जाएंगे
जीवन में हर चुनौती को स्वीकार कर जाएंगे

ये जिंदगी बस उम्मीद के दिये जलाए रखना
फिर हम मौत पर भी मौत का वार कर जाएंगे

E

सही है जख्म भरता था तुम्हारे मुस्कुराने से
सही है दिल ये डरता था तुम्हारे दूर जाने से
गए हो छोड़कर मुझको तो बस आबाद रहना तुम
मैं दुबारा जी नहीं सकता तुम्हारे लौट आने से

F

गमों को पालकर के ...... जो हमेशा मुस्कुराता है
वह कोयले को कर्म से ...............हीरा बनाता है
फ़िदा होती है यह दुनिया...बाजुओं के मशक्कत पे
  "नाथ'और लोग कहते हैं...कि वो काजल लगाता है

G

आज फिर तुम ,मेरे ख्वाबों में आकर..
लौटे हकीकत में  , दिल को जलाकर..


- नाथ गोरखपुरी

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