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जय बोलो हिन्दुस्तान की - राजेश गोसाईं की कविताएँ

1.अ....  जय बोलो हिन्दुस्तान की

ना फिक्र कोई विज्ञान की
ना चिंता है चन्द्रयान की
जय बोलो हिन्दुस्तान की
जय बोलो


सारे देशों ने खूब आजमाया
दक्षिणी ध्रुव कोई पहुंच ना पाया
पहल  हुई हमारे चन्द्रयान की
जय बोलो हिन्दुस्तान की 
जय बोलो

हट गई धारा 370
जो गमों की खान थी
मुस्कुरा रही है केसर क्यारी
अपने भारत महान की
जय बोलो हिन्दुस्तान की
जय बोलो

हो गई ऊँची पगड़ी अपनी
आन बान और शान की
जय बोलो हिन्दुस्तान की
जय बोलो

जय जवान जय किसान
जय हो विज्ञान की
जय बोलो हिन्दुस्तान की
जय बोलो
राजेश गोसाईं
***

2 ..1.ब....  जय बोलो हिन्दुस्तान की

मिलती हैं खुशियां यहाँ सारे जहान की
जय बोलो --- जय बोलो हिन्दुस्तान की

ना हम बंटे हैं कभी मजहब के नाम पे
ना दीवारें हैं कहीं भी दिलों में इंसान के
सजती है बगिया हमारी लाल हरे रंग से
बस्ती है अमन प्रेम की , ये गीता और  कुरान की

हस्ती है वतन अपना इक तिरंगा निशान की
जय बोलो ..........जय बोलो हिन्दुस्तान की

चाँद तारों में हो या नजर सूरज से मिलायें
मिलती है इक यहीं झलक सारे हिन्दुस्तान की


हम बुलबुलें हैं उठते ही रहेंगे
संकट में हो किनारे तो पीछे भी न रहेंगे
फौलाद बन के खेलेंगे और सींच देंगे
लहु से धरती इस गुलिस्तान की

हिन्दी हैं हिन्दुस्तान हैं इक कारवां हैं हम
मिल के चले हैं मिल के चलेंगे सदा हर कदम
चाँद मंगल पे फहरा तिरंगा है हमारी शान भी
जय बोलो ......जय बोलो हिन्दुस्तान की
राजेश गोसाईं
******



3....चाँद तारों में तिरंगा फहरा दिया

काँप रहा है थर्र थर्र
आतंकी पाकिस्तान
जब से पी ओ के पर
गया सरकार का ध्यान

बड़ा बेशर्म है ये भैया
इसकी तो डुबो देंगे नैया

आजादी के पेड़ की छाँव में
लेते हैं चैन की खुली सांस
लगने ना देंगे आतंक का डंक
मंद मंद नहीं जल्द होगा
तेरा विष गल बंद

दिल है हमारा कश्मीर
हम इसको नहीं देंगे
चाँद तारों पर फहरा दिया तिरंगा
होश में आ पाकिस्तान
वरन् मुजफ्फराबाद में और
सारे पाकिस्तान में भी
तिरंगा लहरा देंगे
राजेश गोसाईं
****


4......फरमान.....

केसर बाग हो गया आजाद
अब पी ओ के की बारी है
पी ओ के की बारी है
भारत की पूरी तैयारी है
अब पाकिस्तान होगा बर्बाद
जिसने आतंकी से की यारी है

सुन ले पापी पाकिस्तान
मेरा ये कड़वा फरमान
केसर क्यारी को बनाया
जो तूने क्रिकेट का मैदान
मारेंगे छक्के इतने कि
तू गिन भी ना पायेगा
सुन ले कान खोल के
ओ आतंक के आका इमरान
राजेश गोसाईं
*******


5......गिरगिट....

कांटों के जहान में लोग
लहू पिया करते हैं
जख्म दिल में हों जिनके
वो दर्द दिया करते हैं

रिश्तों के मकड़जाल में
यही तो देखा है
फंसे हुये अपनों में
कोई नहीं फसता है
धोखे चारों तरफ
अपनों से ही मिला करते हैं

रंग बदलती दुनिया में
सब बेरंग ही दिखते हैं
कहीं सियार तो कहीं पे
गिरगिट मिला करते हैं

अपनों ने अपनों की
अर्थी उठाने में मुँह मोड़ लिया
बहुत दूर ही रह गया है वो वादा
जिन्दगी भर साथ निभाने का
लोग कन्धे तो जनाजे में भी
बदल लिया करते हैं
राजेश गोसाईं
****
6


.....जख्म.....

हमने फूलों से ही खायें हैं जख्म
लोग तो अपने हो कर भी दगा करते हैं
किस पर विश्वास करें हम
ये समझ आता ही नहीं
रिश्तों की दुकानों में अक्सर दिल
टूटे हुये मिला करते हैं

जो मेरे सामने होकर मेरे ही नहीं हैं
वो बुरे भी बहुत हैं जो बुरे ही नहीं हैं
गौर से देखा जाये तो हमें
शहद में डूबे हुये खंजर मिला करते हैं
जख्म फूलों से ही तो
अक्सर मिला करते हैं

जिनको प्यार है चाँदी सोने से
सिक्के उनके भी खोटे चला करते हैं
ढोंग और पाखण्ड की दुनिया में
दर्द कहाँ छुपा के रखें
आँसू भी तो पलकों की
मुंडेरों पे चला करते हैं

जाने वो फूल कहाँ खिलते होंगे
जिनसे काँटों का कोई वास्ता ही नहीं
शहर को बबूलों ने घेर लिया
बगिया के दामन में नासूर मिला करते हैं
राजेश गोसाईं
******
7---

....आरजू....

बार बार मैं मिट जाऊं
हजार बार मैं खिल जाऊं
इस मिट्टी में लेकर जन्म
वतन की सेवा कर जाऊं

आजाद रहे...आजाद रहे
युगों युगों तक आबाद रहे
शहीदों के मधुबन में
आजादी के नन्दन वन में
खिलते रहें सदा ही सुमन ये
ऐ चन्दन धरती तेरी याद रहे

कही फूलों में कहीं झूलों में
कहीं बागों में कहीं मेलों में
मुझे झलक तेरी ये मिलती रहे

हर वन वन में हर उपवन में
मैं बन के तेरा ही रह जाऊं

जनम लिया तेरी गोदी में
मरने का सुख यहीं पाऊँ
फिर अंतिम साँसे लेकर के
कहीं खेतों में तेरे लहराऊँ

कहीं राख बन तिरंगे के चरणों में
मैं रह जाऊँ ...आजाद रहे तू
है मेरी ये आरजू

ऐ वतन
है मेरा मन
सदा तेरे लिये हो मेरा तन
अपने लहू से तिलक तेरा कर जाऊँ

ऐ मेरे वतन ओ दिल ए वतन
जब कोई मुझको याद करे
यादों में तेरी बात करे
हर बात तू मेरे साथ करे

और साथ में तेरे हों नदियां
ऊपर पर्वत नीचे घाटी में
झरने संग हम नाच करें

हो चारों तरफ मंगल घट
जल में थल में और नभ में
स्वर्ण कलश तेरे में
भरी रहे केसर की खुशबू
है मेरी ये आरजू

जब अंत समय आये
मैं तेरे लिये कहीं डगमगा ना जाऊँ
इस मिट्टी का हूँ इस मिट्टी में
मैं मिट्टी हो जाऊं.. आजाद रहे तू
है मेरी ये आरजू

खुली हवाओं में तू गुनगुनाये
गीत तेरे मैं गाता जाऊं
खुश रहें मेरे देश के प्यारे
जब तक रहें ये चाँद सितारे
मैं मर के भी तेरा ही रह जाऊँ

बस आबाद रहे ..आबाद रहे
ऐ दिल ए वतन ..आजाद रहे
हो चारों तरफ सोंधी सोंधी खुशबू
है मेरी ये आरजू......3
राजेश गोसाईं
*****
8...

.....पंख....

मुस्कुरा रहा है मौसम
खिल रही है धूप गुनगुनी
ये देखो आसमां कह रहा है
छू लो मुझे तुम कभी भी

उम्मीदों के जहां में
है पंखों की कमी कहाँ पे
बस उड़ लो जरा
सुनहरे ख्वाबों में कहीं भी

यूँ ही टूट जाते हैं फूल डाली से
मगर दे जाते हैं हमें
खुशियों की जर जमीं भी

सजा लो कांटों के ताज
सर पे तुम भी
मिल जायेंगी लड़ियाँ
सुख की तुम्हें भी
मुस्कुरा लो मुश्किलों मे ं
जरा तुम कहीं भी
राजेश गोसाईं
*****
9..

....बदला हुआ देश....

बदला बदला ये देश मेरा बदला
के चलते हैं अब हम शान से
ऐसे लगता है कश्ती
निकल आई है तूफान से

70 साल से जो नहीं हुआ था
थोड़े समय में ही कर दिया
इस सरकार ने

रावण को दिखा दी
तेरी लंका खराब है
विदेशों में तो छवि
हमारी खूब लाजवाब है

कूटनीति से ध्वस्त कर
दुश्मन के खेमे
ले लिया बदला तूने.
बिन महाभारत के
महाभारत स्वयं ही
बन गया हिन्दुस्तान ये

दिखा दी ताकत भी सारी
अपने चन्द्रयान से
नजर कैसे मिलायेगा
अब कोई हिन्दुस्तान से
राजेश गोसाईं



******
10.

....बम बम...

जंग ए आजादी के दीवाने हम
बरसा देंगे दुश्मन पे बम
बोलेंगे फिर हर हर महादेव बम बम
हर हर महादेव बम बम

कल कोई नापाक हमसे ना टकरायेगा
आयेगा यहाँ तो चूर चूर हो जायेगा
करेगा टेढ़ी नजर जब भी इधर
गाड़ देंगे हर आँख में तिरंगा हम
बोलेंगे फिर हर हर  महादेव बम बम
हर हर महादेव बम बम
राजेश गोसाई

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